मैं परमेश्वर को सर्वोत्तम तरीके से कैसे जान सकता हूँ?


प्रश्न: मैं परमेश्वर को सर्वोत्तम तरीके से कैसे जान सकता हूँ?

उत्तर:
सभी जानते हैं कि परमेश्वर विद्यमान है। “परमेश्वर ने इसे स्पष्ट कर दिया है” कि वह वास्तविक है, “इसलिये कि परमेश्‍वर के विषय का ज्ञान उनके मनों में प्रगट है — क्योंकि परमेश्‍वर ने उन पर प्रगट किया है — उसके अनदेखे गुण, अर्थात् उसकी सनातन सामर्थ्य और परमेश्‍वरत्व, जगत की सृष्‍टि के समय से उसके कामों के द्वारा देखने में आते हैं, यहाँ तक कि वे निरुत्तर हैं” (रोमियों 1:19-20)। कुछ लोग परमेश्वर के ज्ञान को दबाने का प्रयास करते हैं; अधिकांश इसे जोड़ने का प्रयास करते हैं। एक मसीही विश्वासी के पास परमेश्वर को सर्वोत्तम तरीके से जानने की गहरी इच्छा होती है (भजन संहिता 25:4)।

यूहन्ना 3 में हम एक ऐसे व्यक्ति के बारे में पढ़ते हैं जो स्पष्टता के साथ परमेश्वर को सर्वोत्तम तरीके से जानना चाहता था और जो अन्यों की अपेक्षा परमेश्वर की बातों का सबसे अधिक अध्ययन करता है। उसका नाम नीकुदेमुस था, और वह एक फरीसी था, जो यहूदियों का एक सरदार था। नीकुदेमुस यह जानता था कि यीशु परमेश्वर की ओर आया था, और वह वास्तव में यीशु के बारे में अधिक जानने के लिए उत्सुक था। यीशु ने धैर्यपूर्वक नीकुदेमुस को समझाया कि उसे फिर से कैसे नया जन्म लेना चाहिए (यूहन्ना 3:3-15)। परमेश्वर को सर्वोत्तम तरीके से जानने के लिए, नीकुदेमुस सही व्यक्ति के पास आया था — “क्योंकि उसमें ईश्‍वरत्व की सारी परिपूर्णता सदेह वास करती है” (कुलुस्सियों 2:9)। यीशु वास्तव में परमेश्वर का वचन है जो शरीर में था (यूहन्ना 1:14)। यीशु ने अपने शब्दों और कार्यों के माध्यम से परमेश्वर को प्रकट किया। उसने यह भी कहा कि कोई भी पिता के पास नहीं आ सकता है परन्तु केवल उसके द्वारा ही यह सम्भव है (यूहन्ना 14:6)। यदि आप जानना चाहते हैं कि परमेश्वर कौन है, तो यीशु की ओर देखें।

इसलिए, हमें विश्वास के साथ आरम्भ करना चाहिए। परमेश्वर को सर्वोत्तम तरीके से जानने की ओर पहला कदम यीशु मसीह को जानना है, जो परमेश्वर की ओर से भेजा गया था (यूहन्ना 6:38)। एक बार जब हम पवित्र आत्मा की सामर्थ्य के द्वारा नया जन्म ले लेते हैं, तो वास्तव में हम परमेश्वर, उसके चरित्र और उसकी इच्छा के बारे में सीखना आरम्भ कर सकते हैं। “आत्मा सब बातें, वरन् परमेश्‍वर की गूढ़ बातें भी जाँचता है” (1 कुरिन्थियों 2:10)। इसके विपरीत, “परन्तु शारीरिक मनुष्य... [परमेश्वर के आत्मा की बातें] ग्रहण नहीं करता, क्योंकि उनकी जाँच आत्मिक रीति से होती है” (1 कुरिन्थियों 2:14)। “शारीरिक” व्यक्ति और “आत्मिक” व्यक्ति के बीच में अन्तर है।

रोमियों 10:17 कहता है कि, “अत: विश्‍वास सुनने से और सुनना मसीह के वचन से होता है।” इसके ऊपर पर्याप्त रूप से जोर नहीं दिया जा सकता है कि परमेश्वर के वचन, बाइबल का अध्ययन, परमेश्वर को सर्वोत्तम जानने के लिए सर्वोपरि है। हम “नये जन्मे हुए बच्‍चों के समान निर्मल आत्मिक दूध की लालसा करें, ताकि उसके द्वारा [हम] उद्धार पाने के लिये बढ़ते जाएँ, क्योंकि [हमने] प्रभु की कृपा का स्वाद चख लिया है” (1 पतरस 2:2-3 )। परमेश्वर का वचन हमारा “आनन्द” होना चाहिए (भजन संहिता 119:16, 24)।

जो लोग परमेश्वर के बारे में अधिक सीख रहे हैं वे ऐसे भी हैं जो पवित्र आत्मा से भरे जाने की आज्ञा का पालन करते हैं। नया जन्म प्राप्त विश्वासियों के पास पवित्र आत्मा है, परन्तु इफिसियों 5:15-21 हमें आत्मा में चलना सिखाता है और यह सिखाता है हम उसकी इच्छा के प्रति समर्पण करें।

परमेश्वर को सर्वोत्तम तरीके से जानने के लिए प्रार्थना भी एक महत्वपूर्ण भाग है। जब हम प्रार्थना करते हैं, हम उसके चरित्र और उसने जो कुछ किया है उसके लिए परमेश्वर की स्तुति करते हैं। हम उसके साथ समय बिताते हैं, उसकी सामर्थ्य के ऊपर भरोसा करते हैं और आत्मा के द्वारा हमारे लिए “आहें भर-भर कर” हस्तक्षेप करने की अनुमति देते हैं (रोमियों 8:26)।

साथ ही यह भी विचार करें कि अन्य विश्वासियों के साथ संगति करके परमेश्वर को सर्वोत्तम तरीके से जान सकते हैं। मसीही जीवन अकेले रहने के लिए नहीं है। हम परमेश्वर के वचन के प्रचार और उसके साथ चलने वालों के ईश्वरीय परामर्श के माध्यम से परमेश्वर के बारे में अधिक सीखते हैं। अपनी कलीसिया के अनुभव का अधिकतम लाभ उठाएँ, इसमें सम्मिलित हों, छोटे-समूह के बाइबल अध्ययन को करें, साथी विश्वासियों के साथ गवाही दें। जैसे चूल्हे पर रखा हुआ अंगारा तब तक जलता रहता है जब तक यह अन्य अंगारों के साथ होता जब इसे हटा दिया जाता और एक तरफ रख दिया जाता है, तो यह ठण्डा हो जाता इसी तरह हम परमेश्वर के लिए अपने उत्साह को खो देंगे यदि हम अन्य विश्वासियों के साथ संगति नहीं करते हैं। परन्तु अंगारे को वापस अन्य अंगारों के साथ आग में डाल दिया जाए, और यह एक फिर से जलने लगता है।

परमेश्वर को सर्वोत्तम तरीके से जानने के लिए संक्षेप में बताएँ तो:1) मसीह को अपने उद्धारकर्ता के रूप में स्वीकार करें। 2) उसका वचन पढ़ें... यह जीवित है (इब्रानियों 4:12)। 3) प्रतिदिन के आधार पर, पवित्र आत्मा से भरे रहें। 4) प्रार्थना के माध्यम से प्रभु की खोज करो। 5) संगति और संतों के साथ अपने जीवन को व्यतीत करें (इब्रानियों 10:25)।

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