केनोसिस क्या है?



प्रश्न: केनोसिस क्या है?

उत्तर:
शब्द "केनोसिस" यूनानी भाषा के शब्द से निकला है जो मसीह के द्वारा अपने देहधारण में स्वयं-को-शून्य कर देने के धर्मसिद्धान्त के लिए उपयोग हुआ है। केनोसिस स्व-त्याग था, यह ईश्‍वरत्व से स्वयं को शून्य करना नहीं और न ही यह ईश्‍वरत्व को मानवता में परिवर्तित करना था। फिलिप्पियों 2:7 हमें बताता है कि यीशु "ने अपने आप को ऐसा शून्य कर दिया, और दास का स्वरूप धारण किया, और मनुष्य की समानता में हो गया।" यीशु अपनी पार्थिव सेवकाई के समय परमेश्‍वर होने से न रूका था। परन्तु उसने अपनी स्वर्गीय महिमा को जो परमेश्‍वर के साथ एक सामंजस्यपूर्ण सम्बन्ध में थी, एक ओर रख दिया। उसने साथ ही अपने आत्मनिर्भर होने के अधिकार को भी एक ओर रख दिया। अपनी पार्थिव सेवकाई के समय, मसीह ने पूर्ण रीति से स्वयं को पिता की इच्छा के अधीन कर दिया।

केनोसिस का भाग होने के नाते, यीशु ने कई बार मानवता की सीमा में रहकर कार्य किया (यूहन्ना 4:6, 19:28)। परमेश्‍वर कभी थकता या प्यासा नहीं होता है। मत्ती 24:36 हमें बताता है, "उस दिन और घड़ी के विषय में कोई नहीं जानता, न स्वर्ग के दूत और न पुत्र, परन्तु केवल पिता।" हो सकता है कि हम आश्चर्य में पड़ जाएँ, कि यदि यीशु परमेश्‍वर था, तब वह कैसे सभी बातों को नहीं जानता है, जैसा कि परमेश्‍वर जानता है (भजन संहिता 139:1-6)? ऐसा प्रतीत होता है कि जब यीशु इस पृथ्वी पर था, तब उसने अपने कुछ ईश्‍वरीय गुणों के उपयोग को अधीन कर दिया था। यीशु अभी भी सिद्ध रूप से पवित्र, दयालु, कृपालु, धर्मी, और प्रेमी था, परन्तु विभिन्न मात्रा में, यीशु सर्वज्ञानी और सर्वउपस्थित नहीं था।

तथापि, जब बात केनोसिस की आती है, तब हम उस बात के ऊपर अपने ध्यान को अधिक केन्द्रित करते हैं, जिन्हें यीशु ने छोड़ दिया था। केनोसिस साथ ही उन बातों का भी निपटारा करता है कि यीशु ने अपने ऊपर क्या ले लिया था। यीशु ने स्वयं के साथ मानवीय स्वभाव को जोड़ और स्वयं को नम्र कर दिया था। यीशु स्वर्ग की महिमा को छोड़ते हुए मानवीय प्राणी बन गया जिसे क्रूस के ऊपर मृत्यु दी गई थी। फिलिप्पियों 2:7-8 घोषित करता है, "वरन् अपने आप को ऐसा शून्य कर दिया, और दास का स्वरूप धारण किया, और मनुष्य की समानता में हो गया। और मनुष्य के रूप में प्रगट होकर अपने आप को दीन किया, और यहाँ तक आज्ञाकारी रहा कि मृत्यु — हाँ, क्रूस की मृत्यु भी सह ली।!" मानवता का सर्वोच्चत्तम कार्य, ब्रह्माण्ड का परमेश्‍वर एक मानवीय प्राणी बन गया और अपने सृष्टि के लिए मर गया। इस कारण, केनोसिस मसीह के द्वारा स्वयं के ऊपर मानवीय स्वभाव को इसकी सारी सीमाओं के साथ, पाप को छोड़ते हुए ले लेना है।

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