विश्‍वास के द्वारा धर्मी ठहराया जाना क्यों एक महत्वपूर्ण धर्मसिद्धान्त है?


प्रश्न: विश्‍वास के द्वारा धर्मी ठहराया जाना क्यों एक महत्वपूर्ण धर्मसिद्धान्त है?

उत्तर:
विश्‍वास के द्वारा धर्मी ठहराए जाने की शिक्षा ही बाइबल के मसीही विश्‍वास को अन्य सभी विश्‍वास पद्धतियों से अलग कर देती है। प्रत्येक धर्म में, और कुछ शाखाओं में जिसे "ईसाई धर्म" कहा जाता है, मनुष्य परमेश्‍वर तक पहुँचने के लिए स्वयं के मार्गों से प्रयास कर रहा है। केवल बाइबल के सच्चे मसीही विश्‍वास में अनुग्रह के द्वारा विश्‍वास से ही एक व्यक्ति उद्धार को प्राप्त कर सकता है। केवल जब हम बाइबल की ओर मुड़ आते हैं, तो हम देखते हैं कि कामों से अलग, विश्‍वास के द्वारा ही धर्मी ठहराया जाना होता है।

शब्द धर्मी ठहराए जाने का अर्थ "धर्मी व्यक्ति के रूप में घोषणा या व्यवहार करना।" एक मसीही विश्‍वासी के लिए, धार्मिकता केवल परमेश्‍वर की ओर से किया जाने वाला कार्य है, जिसमें न केवल विश्‍वासी के पापों को क्षमा करना, अपितु उसमें मसीह की धार्मिकता को रोपित कर देना भी सम्मिलित है। बाइबल कई स्थानों पर बताती है कि धार्मिकता केवल विश्‍वास के माध्यम से आती है (उदाहरण के लिए, रोमियों 5:1; गलतियों 3:24)। धार्मिकता को हम अपने कार्यों के माध्यम से अर्जित नहीं कर सकते हैं; अपितु, हम यीशु मसीह की धार्मिकता से जुड़े हुए हैं (इफिसियों 2:8; तीतुस 3:5)। मसीही विश्‍वासी, जिसे धर्मी घोषित किया गया है, इस तरह पाप के दोष से मुक्त किया जाता है।

धार्मिकता परमेश्‍वर का एक पूरा काम है, और यह तात्कालिक है, यह पवित्रता के विरोध में है, जो विकास की स्वयं से चलते रहने वाली प्रक्रिया है, जिसके द्वारा हम मसीह के जैसा बनते चले जाते हैं ("बचाया जाने" का कार्य, इसकी तुलना 1 कुरिन्थियों 1:18; 1 थिस्सलुनीकियों 5:23 से करें)। धर्मी ठहराए जाने के बाद पवित्रीकरण का कार्य आता है।

एक मसीही विश्‍वासी के लिए धर्मी ठहराए जाने के धर्मसिद्धान्त को समझना अत्यन्त महत्वपूर्ण है। सबसे पहले, यह धर्मी ठहराया जाना और अनुग्रह का ही वह ज्ञान है, जो भले कामों और आत्मिक विकास को प्रेरित करता है; इस प्रकार, धर्मी ठहराया जाना पवित्रता की ओर ले जाता है। साथ ही, यह सच्चाई कि धर्मी ठहराया जाना परमेश्‍वर की ओर से किया जाने वाला पूर्ण कार्य है, जिसका अर्थ यह हुआ कि यह मसीही विश्‍वासियों को उनके उद्धार का आश्‍वासन है। परमेश्‍वर की दृष्टि में, विश्‍वासियों के पास अनन्त जीवन प्राप्त करने के लिए आवश्यक धार्मिकता है।

एक बार जब व्यक्ति को धर्मी ठहरा दिया जाता है, तो स्वर्ग में प्रवेश पाने के लिए उसे और कुछ भी नहीं चाहिए। क्योंकि धर्मी ठहराया जाना हमारी ओर से उसके द्वारा किए हुए काम के आधार पर मसीह में विश्‍वास से आता है, इसलिए हमारे अपने काम उद्धार के तरीकों के रूप में अयोग्य हैं (रोमियों 3:28)। जटिल धर्मसिद्धान्तों के साथ विशाल धार्मिक पद्धतियाँ विद्यमान हैं, जो कामों के द्वारा धर्मी ठहराए जाने के झूठे धर्मसिद्धान्त को सिखाती हैं। परन्तु वे "एक अलग ही सुसमाचार की शिक्षा दे रहे हैं — जो वास्तव में सुसमाचार है ही नहीं" (गलतियों 1:6-7)।

केवल विश्‍वास के द्वारा धर्मी ठहराए जाने की समझ के बिना, हम वास्तव में अनुग्रह के महिमामयी वरदान को नहीं देख सकते हैं — परमेश्‍वर की "शर्तहीन कृपा" हमारे मनों में "धार्मिकता" बन जाती है, और हम सोचते हैं कि हम उद्धार पाने के योग्य हैं। विश्‍वास के द्वारा धर्मी ठहराए जाने का धर्मसिद्धान्त हमें "मसीह के प्रति शुद्ध भक्ति" को बनाए रखने में सहायता प्रदान करता है (2 कुरिन्थियों 11:3)। विश्‍वास के द्वारा धर्मी ठहराए जाने को थामे रहना हमें इस झूठ से बचाता है कि हम स्वर्ग को स्वयं से कमा सकते हैं। ऐसा कोई अनुष्ठान नहीं है, ऐसा कोई संस्कार नहीं, ऐसा कोई कार्य नहीं है, जो हमें मसीह की धार्मिकता के योग्य बना सकता है। यह केवल उसके अनुग्रह के अनुसार है, हमारे विश्‍वास के प्रतिउत्तर स्वरूप परमेश्‍वर ने हमें उसके पुत्र की पवित्रता का श्रेय दिया है। पुराने और नए नियम दोनों कहते हैं कि, "धर्मी जन केवल विश्‍वास से ही जीएगा" (हबक्कूक 2:4; रोमियों 1:17; गलतियों 3:11; इब्रानियों 10:38)।

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विश्‍वास के द्वारा धर्मी ठहराया जाना क्यों एक महत्वपूर्ण धर्मसिद्धान्त है?