क्या यीशु वास्तविक है?


प्रश्न: क्या यीशु वास्तविक है?

उत्तर:
यीशु एक वास्तविक व्यक्ति है। वह सबसे जटिल, चर्चित और ऐतिहासिक व्यक्तियों में से एक हैं। अधिकांश विद्वान, मसीह विश्वासी, गैर-मसीह विश्वासी और धर्मनिरपेक्ष लोग सब कोई, यह मानते हैं कि यीशु एक ऐतिहासिक व्यक्ति था। प्रमाण आश्चर्य में डाल देते हैं। यीशु को प्राचीन इतिहासकारों के द्वारा लिखा गया है, जिसमें जोसीफुस और टैकिट्स भी सम्मिलित हैं। एक ऐतिहासिक दृष्टिकोण से, कदाचित् ही कोई प्रश्न ऐसा हो: कि वास्तव में यीशु नाम का एक व्यक्ति था जो पहली शताब्दी के इस्राएल में रहता था।

पुराने नियम ने मसीह के आने की भविष्यद्वाणी की गई है, एक वास्तविक व्यक्ति जो अपने शत्रुओं से इस्राएल को छुटकारा प्रदान करेगा। मसीह का जन्म बेतलहम में (मीका 5:2), दाऊद के गोत्र से हुआ (उत्पत्ति 49:10)। उसे मूसा से सम्बन्धित एक भविष्यद्वक्ता (व्यवस्थाविवरण 18:18), शुभ सन्देश की एक तुरही (यशायाह 61:1), और बीमारियों को चँगा करने वाला होना था (यशायाह 35:5–6)। मसीह परमेश्वर का एक सेवक होगा जो अपनी महिमा में प्रवेश करने से पहले दु:ख को उठाएगा (यशायाह 53)। यीशु वास्तविक व्यक्ति हैं जिसने वास्तव में इन भविष्यद्वाणियों को पूरा किया है।

नए नियम में एक वास्तविक व्यक्ति के रूप में यीशु मसीह के सैकड़ों सन्दर्भ पाए जाते हैं। हो सकता है कि सबसे पहला सुसमाचार यीशु की मृत्यु के 10 वर्षों के भीतर ही लिखा गया हो, और पौलुस की पत्रियाँ यीशु की मृत्यु के 25 वर्षों के भीतर ही लिख दी गई हो। यह महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसका अर्थ यह है कि, जब सुसमाचार प्रसारित हो रहा था, तब बहुत सारे प्रत्यक्षदर्शी जीवित थे जो सुसमाचार की सच्चाई के विवरणों को सत्यापित कर सकते थे (1 कुरिन्थियों 15:6 को देखें)।

नए नियम की प्रामाणिकता के लिए पाण्डुलिपि के प्रमाण भारी मात्रा में पाए जाते हैं: नए नियम की लगभग 25,000 आरम्भिक पाण्डुलिपियाँ हैं। जबकि पहली शताब्दी ईसा पूर्व में सीज़र द्वारा लिखी गई गैलिक वार्स की कथा की केवल 10 आरम्भिक पाण्डुलिपियाँ विद्यमान हैं — और उनमें से सबसे आरम्भिक मूल प्रति में से एक को 1,000 वर्षों बाद लिखा गया था। इसी तरह, अरस्तू की कविताओं की केवल पाँच आरम्भिक पाण्डुलिपियाँ पाई जाती हैं, जो मूल पाण्डुलिपि के लिखे जाने के 1,400 वर्ष बाद की हैं। जिन लोगों को सन्देह है कि यीशु वास्तविक नहीं है, उन्हें जूलियस सीज़र और अरस्तू के अस्तित्व के ऊपर भी प्रश्न उठाना चाहिए।

बाइबल के बाहर, यीशु का उल्लेख कुरान और यहूदी धर्म, ज्ञानवाद और हिन्दू धर्म के लेखनकार्यों में भी किया गया है। आरम्भिक इतिहासकारों ने यीशु को वास्तविक माना। पहली सदी के रोमी इतिहासकार टैकिट्स ने मसीह के अनुयायियों का उल्लेख किया है। एक प्राचीन यहूदी इतिहासकार, फ्लेवियस जोसीफुस, ने यहूदियों के लिए लिखे गए अपने लेखनकार्य ऐन्टिक्वटीज़ ऑफ द ज्यू अर्थात् यहूदियों का प्राचीन इतिहास में मसीह को सन्दर्भित किया है। यीशु के अन्य सन्दर्भ, सम्राट हेरोदेस के मुख्य सचिव, सुएटोनियस के लेखनकार्य में विद्यमान हैं; जूलियस अफ्रीकी, इतिहासकार थैलस; समोसाटा के लुसियन, दूसरी शताब्दी के यूनानी लेखक; प्लनी द यंगर; और मारा बार-सेरापियन को उद्धृत करते हुए लिखता है।

यीशु मसीह ने संसार में किसी भी अन्य ऐतिहासिक व्यक्ति से कहीं अधिक प्रभाव डाला है। चाहे कोई ईसा पूर्व (यीशु मसीह से पहले) या ईस्वी सन् (यीशु के आने के बाद) की गणना का ही उपयोग क्यों न करे, पूरे पश्चिम में उपयोग होने वाली तिथि पद्धति को एक ही घटना : यीशु का जन्म, एक वास्तविक व्यक्ति से मापा जाता है। यीशु के नाम पर असँख्य अनाथालयों, अस्पतालों, क्लीनिकों, स्कूलों, विश्वविद्यालयों, बेघरों के लिए आश्रय स्थलों, आपातकालीन राहत एजेंसियों और अन्य धर्मार्थ संगठनों की स्थापना की गई है। लाखों लोग अपने जीवन में यीशु के निरन्तर काम की व्यक्तिगत् गवाही दे सकते हैं।

इस बात के दोनों धर्मनिरपेक्ष और बाइबल आधारित इतिहास में अत्यधिक प्रमाण मिलते हैं कि, यीशु वास्तविक है। कदाचित् सबसे बड़ा प्रमाण कि यीशु विद्यमान था और उसने वही किया जिसे बाइबल कहती है, आरम्भिक कलीसिया की दी हुई गवाही है। पहली सदी में, शाब्दिक रूप से बारह प्रेरितों सहित, हजारों विश्वासीगण यीशु मसीह के सुसमाचार के लिए शहीद के रूप में अपने प्राण देने के लिए तैयार थे। लोग उस बात के लिए मर सकते हैं, जिसे वे मानते हैं कि सच है, परन्तु कोई भी उस बात के लिए नहीं मरेगा, जिसे वे जानते हैं कि यह झूठ है।

हमें विश्वास करने के लिए बुलाया गया है — एक गढ़ी-हुई कहानी के ऊपर — अन्धे विश्वास के लिए नहीं — अपितु एक वास्तविक व्यक्ति में वास्तविक विश्वास के लिए जो इतिहास में वास्तविक समय में एक वास्तविक स्थान पर रहा। यह व्यक्ति, जिसने अपने चँगाई के कामों और भविष्यद्वाणियों के चिन्हों के द्वारा अपने ईश्वरीय होने के मूल को प्रमाणित किया, जिसकी मृत्यु रोमी क्रूस के ऊपर हुई, जो एक यहूदी कब्र में गाड़ा गया, और हमारी धार्मिकता के लिए पुन: जीवित हो गया। यीशु वास्तविक है। "धन्य वे हैं जिन्होंने बिना देखे विश्‍वास किया" (यूहन्ना 20:29)।

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