क्या यीशु जीवित है? इसका क्या अर्थ है कि यीशु जीवित है?


प्रश्न: क्या यीशु जीवित है? इसका क्या अर्थ है कि यीशु जीवित है?

उत्तर:
यीशु दो हजार वर्षों पहले पृथ्वी पर आया। हम उसके क्रूसीकरण और उसकी शिक्षाओं के बारे में सुनते हैं। ईस्टर उसके पुनरुत्थान के बारे में है। परन्तु यह कुछ लोगों को बाधा प्रतीत होती है। क्या इसका अर्थ यह है कि यीशु जीवित है? एक व्यक्ति जो सार्वजनिक रूप से मृत हो चुका था, वह फिर कैसे जीवित हो सकता है? इतिहास खण्डन न किए जाने वाले प्रमाण को प्रदान करता है कि नासरत का यीशु मसीह जीवित हो गया था, परन्तु क्या वह आज भी जीवित है? मसीह विश्वासी आराधना करते हैं, भजन गाते हैं और यीशु से प्रार्थना करते हैं मानो कि वह जीवित है। क्या उनका ऐसा करना गलत है? यीशु किस अर्थ में "जीवित" है?

जैसा कि हम जानते हैं कि मनुष्य भौतिक संसार तक ही सीमित है, हम अक्सर जीवन को भौतिकता से सीधे जुड़े हुए होना समझते हैं — एक व्यक्ति तब तक जीवित है जब तक उसका शरीर जीवित है। परन्तु जीवन इससे कहीं अधिक बढ़कर है। आत्मिक लोग उतना ही वास्तविक होता है जितने कि सांसारिक लोक। फिलिप्पियों 2:5-11 बताता है कि मसीह इससे पहले कि पृथ्वी अस्तित्व में आती, पहले से ही परमेश्वर के साथ एक होने के कारण जीवित था (यूहन्ना 1:1-3 को देखें)। परमेश्वर का शाश्वत पुत्र सदैव से ही जीवित रहा है। यीशु तब भी जीवित था, जब उसका शरीर कब्र में पड़ा हुआ था।

यीशु ने अक्सर भौतिक संसार से परे के जीवन के बारे में बात की (यूहन्ना 10:10)। उसने उस पर विश्वास करने वाले प्रत्येक को शाश्वत जीवन देने की प्रतिज्ञा की है (यूहन्ना 3:16-18)। उसने वर्णित किया कि वह जिस राज्य को स्थापित करने आया था, वह इस संसार का नहीं था (यूहन्ना 18:36)।

जब परमेश्वर ने पहला व्यक्ति बनाया तब, "उसके उसकी नथनों में जीवन का श्‍वास फूँक दिया; और आदम जीवित प्राणी बन गया" (उत्पत्ति 2:7)। वह जीवन परमेश्वर की ओर से आया था, जो शाश्वतकालीन है। परमेश्वर ने मनुष्य में अपने जीवन के श्वास को फूँका था, और यही वह कारण है कि मनुष्य का जीवन पौधों और जानवरों के विपरीत है। मनुष्य में एक आत्मा है जिसे सदैव के लिए जीवित रहना है, ठीक वैसे ही जैसे परमेश्वर सदैव रहेगा। शरीर मर जाएगा, परन्तु वह फिर से जी उठेगा। जब यीशु क्रूस पर मरा, तो उसका शरीर सही अर्थ में मर गया था और उसे गाड़ा गया था, परन्तु उसकी आत्मा कहीं और जीवित और अच्छी तरह से जीवित थी। उसने अपनी आत्मा को पिता के हाथों में सौंप दिया था (लूका 23:46)।

जब परमेश्वर ने यीशु को मृतकों में से जीवित किया, तो उसकी आत्मा ने उसके शरीर को पुनः प्राप्त कर लिया, जो अब एक महिमामयी शरीर था (फिलिप्पियों 3:21)। पौलुस ने लिखा कि पाँच सौ से अधिक लोगों ने यीशु को उसके पुनरुत्थान के बाद देखा (1 कुरिन्थियों 15:6)। नया नियम उन प्रत्यक्षदर्शियों के द्वारा लिखा गया था जिन्होंने अपनी आँखों से देखा था कि यीशु वास्तव में जीवित था और शरीर में था।

यीशु आज भी जीवित है। वह मरे हुओं में से शारीरिक रूप से जी उठा है, और वह शारीरिक रूप से स्वर्ग में ऊपर गया है। प्रेरितों के काम 1 में बताया गया है कि, कैसे पुनरुत्थान के चालीस दिनों बाद तक, यीशु के शिष्य उसके साथ थे, जब वह अचानक हवा में ऊपर उठाया गया था। वे विस्मित होते हुए उसे घूरते रहे, क्योंकि वह ऊपर जा रहा था और उनकी दृष्टि से लुप्त हो गया था (प्रेरितों 1:9–11)। यीशु ने भविष्यद्वाणी की थी कि वह पिता के पास लौट जाएगा, और उसने ठीक वैसे ही किया (यूहन्ना 14:1-2; यूहन्ना 20:17)।

यीशु स्वर्ग में परमेश्वर, स्वर्गदूतों और उन सभी लोगों के साथ जीवित है, जिन्होंने उद्धार के लिए उस पर भरोसा किया है (2 कुरिन्थियों 5:8)। वह पिता के दाहिने हाथ (कुलुस्सियों 3:1), "सारे आकाश में सबसे ऊँचे" पर बैठा है (इफिसियों 4:10)। वह पृथ्वी पर रहने वाले उसके अनुयायियों के लिए "सदैव मध्यस्थता करता है" (इब्रानियों 7:25)। और उसने फिर से लौट आने की प्रतिज्ञा की है (यूहन्ना 14:1-2)।

ठीक वैसे ही जैसे यीशु का आत्मा कभी नहीं मरा, हमारी आत्माएँ भी कभी नहीं मरेंगी (यूहन्ना 11:25-26)। हम सदैव के लिए कहीं पर जीवित रहेंगे। हम परमेश्वर के उद्धार के प्रस्ताव पर कैसे अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हैं, यह हमारे गंतव्य को निर्धारित करता है (यूहन्ना 3:16–18)। यीशु ने उसके अनुयायियों से कहा है कि, "मैं जीवित हूँ, तुम भी जीवित रहोगे" (यूहन्ना 14:19)। इस महान् आशा के ऊपर हम अपने जीवन का निर्माण, यह जानते हुए कर सकते हैं कि, हमारे प्रभु यीशु की तरह, हम मरेंगे तो, तथापि मृत्यु अन्त नहीं है।

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