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प्रश्न

क्या हम सभों ने आदम और हव्वा से वंशानुगत पाप को प्राप्त किया है?

उत्तर


हाँ, सभी लोगों ने आदम और हव्वा, विशेषकर आदम से पाप को वंशानुगत रीति से अर्थात् विरासत में प्राप्त किया है। पाप को बाइबल में परमेश्‍वर की व्यवस्था का विरोध करना (1 यूहन्ना 3:4) और परमेश्‍वर के विरूद्ध विद्रोह (व्यवस्थाविवरण 9:7; यहोशू 1:18) कहा गया है। उत्पत्ति 3 परमेश्‍वर और उसकी आज्ञा के विरूद्ध आदम और हव्वा के विद्रोह को वर्णित करता है। आदम और हव्वा की अनाज्ञाकारिता के कारण पाप उसके सभी वंशजों के लिए "मीरास" बन गया है। रोमियों 5:12 हमें बताता है, कि आदम के द्वारा, पाप ने इस संसार में प्रवेश किया और इस तरह सभी मनुष्यों पर मृत्यु आ गई क्योंकि सभों ने पाप किया। इस पारित-हुए पाप को विरासत या वंशानुगत पाप के रूप में जाना जाता है। ठीक वैसे ही जैसे हम हमारे अभिभावकों से शारीरिक गुणों को प्राप्त करत हैं, हम आदम में हमारे पाप पूर्ण स्वभाव को वंशानुगत रीति से प्राप्त करते हैं।

आदम और हव्वा को परमेश्‍वर के स्वरूप और समानता में रचा गया था (उत्पत्ति 1:26-27; 9:6)। इसी तरह से, हम में भी आदम का स्वरूप और समानता पाया जाता है (उत्पत्ति 5:3)। जब आदम पाप में गिर गया, तो इसके फलस्वरूप उसके वंशज भी पाप के साथ "प्रभावित" हो गए। दाऊद ने अपने भजनों में से एक में इस सच्चाई पर विलाप किया है: "देख, मैं अधर्म के साथ उत्पन्न हुआ, और पाप के साथ अपनी माता के गर्भ में पड़ा" (भजन संहिता 51:5)। इसका अर्थ यह नहीं है कि उसकी माता ने उसे व्यभिचार में जन्म दिया था; इसकी अपेक्षा, उसकी माता ने उसके अभिभावकों से वंशानुगत अर्थात् विरासत में पाप के स्वभाव को प्राप्त किया था, और उन अभिभावकों ने अपने पूर्वजों से प्राप्त किया था। दाऊद ने वंशानुगत पाप को उसके अभिभावकों से प्राप्त किया था, ठीक वैसे ही जैसे हम सभी भी प्राप्त करते हैं। चाहे हम हमारे जीवन को कितना भी अधिक अच्छी रीति से निर्वाह करने के प्रयास क्यों न करें, हम वंशानुगत पाप के परिणामस्वरूप अभी भी पापी ही हैं।

पापी के रूप में जन्म लेने का परिणाम की सच्चाई यह है कि हम सभी पाप करते हैं। रोमियों 5:12 में दी हुई प्रगति पर ध्यान दें: पाप आदम के द्वारा इस संसार में प्रवेश करता है, पाप के पश्चात् मृत्यु आती है, मृत्यु सभी लोगों के ऊपर आ जाती है, सभी लोग पाप करते हैं क्योंकि उन्होंने आदम से वंशानुगत पाप को प्राप्त किया है। क्योंकि "सभों ने पाप किया है और सभी परमेश्‍वर की महिमा से रहित हैं" (रोमियों 3:23)। हम सभों को हमारे पापों को धो देने के लिए एक सिद्ध, निर्दोष बलिदान की आवश्यकता है, यह ऐसी कुछ बात है जिसे हम स्वयं की सामर्थ्य से नहीं कर सकते हैं। धन्यवाद सहित, यीशु मसीह पाप से बचाने वाला उद्धारकर्ता है! हमारे पापों को यीशु ने क्रूस के ऊपर क्रूसित कर दिया, और अब "हम को उसमें उसके लहू के द्वारा छुटकारा, अर्थात् अपराधों की क्षमा उसके उस अनुग्रह के धन के अनुसार मिला है" (इफिसियों 1:7)। परमेश्‍वर ने, अपनी असीमित बुद्धि में होकर, उस पाप के समाधान का प्रबन्ध किया जिसे हमने वंशानुगत प्राप्त किया था, और यह समाधान प्रत्येक के लिए उपलब्ध है: "इसलिये, हे भाइयो, तुम जान लो कि इसी के द्वारा पापों की क्षमा का समाचार तुम्हें दिया जाता है" (प्रेरितों के काम 13:38)।

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