मैं अपने विश्‍वास को कैसे बढ़ा सकता हूँ?


प्रश्न: मैं अपने विश्‍वास को कैसे बढ़ा सकता हूँ?

उत्तर:
सभी मसीही विश्‍वासी चाहते हैं, या उन्हें चाहिए कि वे अपने विश्‍वास को बढ़ाएँ। परन्तु जिन्होंने अपने जीवन को मसीह को दिया है, उन्होंने यह पहचान लिया है कि सफलता मानवीय प्रयासों से नहीं आती है; हम सदैव असफल हो जाते हैं। पहला कुरिन्थियों 4:7 हमें स्मरण दिलाता है कि, "क्योंकि तुझ में और दूसरे में कौन भेद करता है? और तेरे पास क्या है जो तू ने (दूसरे से) नहीं पाया? और जब कि तू ने (दूसरे से) पाया है, तो ऐसा घमण्ड क्यों करता है कि मानो नहीं पाया?" परमेश्‍वर के बिना, हम अपने स्वयं के संसाधनों पर निर्भर रहने के लिए छोड़ दिए जाते हैं, जो हमें घमण्ड, हठ, उदासीनता, असंवेदनशीलता और विफलता के साथ पीड़ित करते हैं। केवल एक ही है, जिसके ऊपर हम भरोसा कर सकते हैं कि वह हमें कभी भी असफल नहीं होने देगा, और वह परमेश्‍वर है (इब्रानियों 13:5)।

परमेश्‍वर के साथ विश्‍वास की अपनी यात्रा आरम्भ करने के लिए आवश्यक है कि हम अपने वचन में स्वयं को डुबो दें (रोमियों 10:17; 1 पतरस 2: 2)। हमें उसके प्रेम, उसके न्याय, उसकी दया और उसकी योजना के बारे में शिक्षा प्राप्त करनी चाहिए। हमें उसके साथ एक सम्बन्ध को निर्मित करना चाहिए, ताकि हम उसे उसके पुत्र, यीशु मसीह के द्वारा व्यक्तिगत् रूप से जान सकें (यूहन्ना 17:3)। हमें उस से स्वयं को प्रकट करने और हमें बदल देने के लिए कहना चाहिए। बाइबल प्रतिज्ञा करती है कि यदि हम परमेश्‍वर की खोज करते हैं, तो हम उसे पाएंगे (मत्ती 7:7)। और यदि हम उसे अनुमति देते हैं, तो वह हमें नए लोगों में परिवर्तित कर देगा, जो उसकी इच्छा जान सकते हैं (रोमियों 12:2)। हमें हमारे पुराने स्वयं को मारने के लिए तैयार रहना होगा और अंहकार और स्वार्थ को छोड़ना होगा, जिसे हमें इतने लम्बे समय से अपने पास रखे हुए हैं। जैसे-जैसे परमेश्‍वर हमें बदलता चला जाता है, वैसे ही वैसे हम पवित्र आत्मा की ओर से आने वाले फल को विकसित करना सीख लेते हैं, जो सभी मसीही विश्‍वासियों के भीतर वास करता है (गलतियों 5:22-23; यूहन्ना 14:17)। जब हम आत्मा में चलते हैं, जिसे हम अपने जीवन का नियन्त्रण देते हैं, हम उस के ऊपर भरोसा करना आरम्भ कर देते हैं। "और उसी में जड़ पकड़ते और बढ़ते जाओ; और जैसे तुम सिखाए गए वैसे ही विश्‍वास में दृढ़ होते जाओ, और अधिकाधिक धन्यवाद करते रहो"(कुलुस्सियों 2:7)।

यदि परमेश्‍वर के ऊपर हमें हमारे भरोसा को बढ़ाना है, तो हमें विश्‍वास में कदम उठाना, अपने आराम के क्षेत्र से बाहर निकलना और चुनौतियों को सामना करना सीखना होगा। यदि हम विश्‍वास करते हैं कि परमेश्‍वर उस दिन तक बनाए रखेगा, तो हम परिणामों की चिन्ता किए बिना उसकी इच्छा को पूरी करने के लिए स्वतन्त्र हो सकते हैं। जब भी हम परीक्षाओं का सामना करते हैं, तो परमेश्‍वर सदैव हमारे लिए एक तरीके को प्रदान करेगा ताकि वे हमारे ऊपर जय को न प्राप्त करें (1 कुरिन्थियों 10:13)। हमें उस तरीके की खोज करने की आवश्यकता है, और जब हम इसे पाते हैं, तो परमेश्‍वर की प्रशंसा करते हैं। पहला पतरस 1:7 कहता है कि वह हमारे विश्‍वास की जाँच के लिए परीक्षाओं का उपयोग करेगा ताकि हम दृढ़ विश्‍वासी बन सकें; हमें और अधिक आदर प्रदान किया जाएगा यदि हम दृढ़ता से खड़े रहें और न डरें। "अत: विश्‍वास सुनने से और सुनना मसीह के वचन से होता है" (रोमियों 10:17)।

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