अति — कॉल्विनवाद क्या है और क्या यह बाइबल आधारित है?


प्रश्न: अति — कॉल्विनवाद क्या है और क्या यह बाइबल आधारित है?

उत्तर:
हाइपर-कॉल्विनवाद अर्थात् अति-कॉल्विनवाद की एक सरल परिभाषा यह है : अति-कॉल्विनवाद की यह मान्यता है कि परमेश्‍वर अपनी प्रभुता सम्पन्न इच्छा के माध्यम उसके चुने हुओं के लिए मुक्ति को ले आने में किसी भी तरीके का या किसी भी तरीके (जैसे सुसमाचार प्रचार, उपदेश और खोए हुओं के लिए प्रार्थना इत्यादि करना) का बहुत ही कम उपयोग करता है। एक गैर-बाइबल आधारित कमजोरी से, अति-कॉल्विनवादी परमेश्‍वर की सम्प्रभुता पर अत्यधिक-महत्व देते हैं और मुक्ति के कार्य में मनुष्य के उत्तरदायित्व को बहुत ही कम आँकते हैं।

अति-कॉल्विनवादी की एक स्पष्ट उपशाखा यह है कि यह खोए हुओं को सुसमाचार सुनने की किसी भी इच्छा को दबा देते हैं। अति-कॉल्विनवादी धर्मविज्ञान को मानने वाली बहुत सी कलीसियाएँ या सम्प्रदाओं को भाग्यवादी, ठण्डे या विश्‍वास के आश्‍वासन की कमी के होने के रूप में चिन्हित किया जाता है। इस दृष्टिकोण में खोए हुओं और परमेश्‍वर के लोगों के प्रति परमेश्‍वर के प्रेम के ऊपर बहुत ही कम महत्व दिया गया है, परन्तु इसकी अपेक्षा स्वयं को परमेश्‍वर की सम्प्रभुता उसके द्वारा बचाए हुओं के चुने जाने और खोए हुए के ऊपर उसके क्रोध के ऊपर गैर-बाइबल आधारित पूर्वव्यस्तता में दे दिया गया है। अति-कॉल्विनवादी दृष्टिकोण के सुसमाचार की घोषणा यह है कि परमेश्‍वर का उद्धार चुने हुओं और खोए हुओं के लिए उसका दण्ड है।

बाइबल स्पष्ट रूप से शिक्षा देती है कि परमेश्‍वर पूरे ब्राह्माण्ड के ऊपर प्रभुता सम्पन्न है (दानिय्येल 4:34-35), जिसमें मनुष्य का उद्धार भी सम्मिलित है (इफिसियों 1:3-12)। परन्तु परमेश्‍वर की सम्प्रभुता के साथ बाइबल साथ ही यह शिक्षा भी देती है कि खोए हुओं के लिए परमेश्‍वर का प्रेम बचाने के लिए प्रेरित होता है (इफिसियों 1:4-5; यूहन्ना 3:16; 1 यूहन्ना 4:9-10) और खोए हुओं को बचाने के लिए परमेश्‍वर के तरीकों में उसके वचन की घोषणा किया जाना सम्मिलित है (रोमियों 10:14-15)। बाइबल साथ ही यह भी घोषणा करती है कि मसीही विश्‍वासियों को अविश्‍वासियों के साथ सुसमाचार को साझा करने के लिए; मसीह के राजूदत के रूप में दयालु और निर्णायक होना चाहिए, जो परमेश्‍वर के साथ लोगों के मेल-मिलाप के लिए "आग्रह" करते हैं (2 कुरिन्थियों 5:20-21)।

अति-कॉल्विनवाद बाइबल आधारित एक धर्मसिद्धान्त, परमेश्‍वर की सम्प्रभुता को उपयोग करता है और इसे गैर-बाइबल आधारित चरम की ओर धकेलता है। ऐसा करने के द्वारा, अति-कॉल्विनवाद परमेश्‍वर के प्रेम और सुसमाचार की अनिवार्यता को कम आँकता है।

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अति — कॉल्विनवाद क्या है और क्या यह बाइबल आधारित है?