पूरे घराने के उद्धार के बारे में बाइबल क्या कहती है?


प्रश्न: पूरे घराने के उद्धार के बारे में बाइबल क्या कहती है?

उत्तर:
पूरे घराने के उद्धार की धारणा यह है कि पूरा परिवार या पूरा घराना एक ही समय में उद्धार को पाता है। पूरे परिवार का बचाया जाना परिवार के अगुवे के विश्‍वास के द्वारा होता है। यदि पिता या घर का मुखिया स्वयं के मसीही विश्‍वासी होने की घोषणा करता है, तो वह एक मसीही परिवार की अध्यक्षता करता है — अपने पिता/पति के निर्णय के आधार पर, उसके परिवार के सदस्य स्वत: ही मसीही विश्‍वासी कहलाते हैं। पूरे घराने के उद्धार की धारणा के अनुसार, परमेश्‍वर पूरे परिवार की इकाई को बचाता है, न केवल एक व्यक्ति अपने विश्‍वास को व्यक्त कर रहा है।

पूरे घराने के उद्धार के ऊपर दी हुई बाइबल की शिक्षा की उचित समझ से यह जानकारी प्राप्त होती है कि बाइबल सामान्य रूप से उद्धार के बारे में क्या सिखाती है। हम जानते हैं कि उद्धार का केवल एक ही मार्ग है, और यह यीशु मसीह में विश्‍वास के माध्यम से है (मत्ती 7:13-14; यूहन्ना 6:67-68; 14:6; प्रेरितों के काम 4:12; इफिसियों 2:8)। हम यह भी जानते हैं कि विश्‍वास करने का आदेश व्यक्तिगत् रूप से निर्देशित किया गया है और विश्‍वास करने का कार्य एक व्यक्तिगत गतिविधि है। इस प्रकार, उद्धार केवल एक ऐसे व्यक्ति के पास आता है, जो व्यक्तिगत रूप से मसीह में विश्‍वास करता है। मसीह में विश्‍वास करना ऐसा कुछ नहीं है, जिसे एक पिता अपने पुत्र या पुत्री के लिए कर सकता है। सच्चाई तो यह है कि एक परिवार या एक घराने के एक सदस्य का विश्‍वास करना यह गारन्टी नहीं देता है कि परिवार के अन्य सभी भी सदस्य विश्‍वास करेंगे।

यीशु स्वयं इंगित करता है कि सुसमाचार अक्सर परिवारों को विभाजित करता है। मत्ती 10:34-36 में यीशु कहता है कि, "यह न समझो कि मैं पृथ्वी पर मिलाप कराने आया हूँ; मैं मिलाप कराने नहीं, पर तलवार चलवाने आया हूँ। मैं तो आया हूँ कि 'मनुष्य को उसके पिता से, और बेटी को उसकी माँ से, और बहू को उसकी सास से अलग कर दूँ;' मनुष्य के बैरी उसके घर ही के लोग होंगे।" ये शब्द पूरे घराने के उद्धार की अवधारणा को पूरी तरह से कमजोर कर देते हैं।

यदि लोगों को व्यक्तिगत् रूप में बचाया जाता है, तो हम बाइबल में उन अनुच्छेदों की व्याख्या कैसे कर सकते हैं, जिनमें पूरे घराने के उद्धार की प्रतिज्ञा सम्मिलित है? प्रेरितों के काम 11:14 जैसे वचनों और व्यक्तिगत् रूप से उद्धार के पाए जाने की धारणा के लिए विश्‍वास की आवश्यकता की हम कैसे तुलना कर सकते हैं? इस अनुच्छेद में, कुरनेलियुस से प्रतिज्ञा की गई है, उसका घराना बचाया जाएगा। सबसे पहले, पवित्रशास्त्र के किसी भी अनुच्छेद के साथ, हमें उसकी शैली या पुस्तक के प्रकार के ऊपर विचार करना चाहिए, जिसमें यह अनुच्छेद प्रगट हुआ है। इस घटना में यह प्रेरितों के काम की पुस्तक में, वास्तविक घटनाओं की एक ऐतिहासिक कथा में पाया जाता है। बाइबल के इतिहास से सम्बन्धित एक सिद्धान्त यह है कि प्रत्येक परिस्थिति में एक ही घटना को स्वचालित रूप से लागू नहीं किया जा सकता है। उदाहरण के लिए, शिमशोन ने गाजा से शहर के फाटकों को तोड़ दिया था और उन्हें एक पहाड़ी के ऊपर ले गया (न्यायियों 16:3), परन्तु इसका अर्थ यह नहीं है कि यदि हम अपने बालों को लम्बे समय तक बढ़ाते हैं, तो हम उसी तरह के सामर्थ्य के काम को करने में सक्षम हो जाएंगे। प्रेरितों के काम 11 में यह सच्चाई कि परमेश्‍वर ने कुरनेलियुस से प्रतिज्ञा की थी कि उसका पूरा घर बचाया जाएगा इसका अर्थ यह नहीं है कि वही प्रतिज्ञा प्रत्येक समय सभी घरों के लिए विश्‍वव्यापी रूप से लागू होती है। दूसरे शब्दों में, प्रेरितों के काम 11:14 में एक विशेष व्यक्ति को समय के एक विशेष बिन्दु पर दी गई एक विशेष प्रतिज्ञा थी। विश्‍वव्यापी रूप में ऐसी प्रतिज्ञा को समझने के बारे में हमें सावधान रहना चाहिए; उन्हें उनके ऐतिहासिक सन्दर्भ से अलग नहीं किया जाना चाहिए।

दूसरा, कैसे परमेश्‍वर ने कुरनेलियुस के साथ अपनी प्रतिज्ञा को पूरा किया महत्वपूर्ण है। प्रेरितों के काम 10 में कुरनेलियुस पतरस का स्वागत अपने घर में करता है और कहता है, "हम सब यहाँ हैं" (प्रेरितों के काम 10:33)। दूसरे शब्दों में, कुरनेलियुस का पूरा घर इकट्ठा हुआ था, जो पतरस के सारे उपदेश को सुनाने के लिए इकट्ठा हुआ था। उन सभों ने सुसमाचार सुना, और उन सभों ने प्रतिउत्तर दिया। कुरनेलियुस के घर में हर कोई विश्‍वास करता था और बपतिस्मा लेता है (प्रेरितों के काम 11:15-18)। यह सटीकता के साथ वही बात है, जिसकी प्रतिज्ञा परमेश्‍वर ने की थी। कुरनेलियुस का घराना इसलिए नहीं बचाया गया क्योंकि कुरनेलियुस ने विश्‍वास किया, अपितु क्योंकि उन सबों ने विश्‍वास किया था।

एक और अनुच्छेद पूरे घराने के उद्धार की प्रतिज्ञा करता है, यह प्रेरितों के काम 16:31 है। यहाँ फिलिप्पियों का जेलर पौलुस और सीलास से पूछता है, "हे सज्जनो, उद्धार पाने के लिये मैं क्या करूँ?" मिश्नरियों ने उत्तर दिया, "प्रभु यीशु मसीह पर विश्‍वास कर — तो तू और तेरा घराना उद्धार पाएगा।" एक बार फिर से यह प्रतिज्ञा एक विशेष व्यक्ति को एक विशेष सन्दर्भ में दी जाती है; यद्यपि, इस में एक अतिरिक्त प्रतिज्ञा पाई जाती है जो स्पष्ट रूप से विश्‍वव्यापी स्वभाव की है और सभी समयावधि और सन्दर्भों के ऊपर लागू होती है। तथापि, यह प्रतिज्ञा पूरे घराने के उद्धार के विषय में से एक नहीं है, अपितु उद्धार के बारे में बाइबल में हर दूसरे वचन के साथ पूरी तरह से संगत पाई जाती है। प्रतिज्ञा यह है कि यदि तू प्रभु यीशु में विश्‍वास करता है, "तू उद्धार पाएगा।" इसके अतिरिक्त, उद्धार जेलर के घर में परमेश्‍वर के वचन को सुनाने और व्यक्तिगत् रूप से विश्‍वास में अपनी प्रतिक्रिया को व्यक्त करने के परिणामस्वरूप आया: पौलुस और सीलास "उसको और उसके सारे घर के लोगों को प्रभु का वचन सुनाया" (प्रेरितों के काम 16:32)। पूरे परिवार ने सुसमाचार सुना था। वे सभी बचाए गए थे, जैसा कि परमेश्‍वर ने प्रतिज्ञा की थी, परन्तु उनका उद्धार जेलर के घर में उनके भागी होने के कारण नहीं था; वे बचाए गए क्योंकि उन्होंने स्वयं के उद्धार के लिए सुसमाचार पर विश्‍वास किया था।

नए नियम में तीसरा वचन जिसे कुछ लोग पूरे घर के उद्घार की शिक्षा देने के लिए उपयोग करते हैं, 1 कुरिन्थियों 7:14 है: "क्योंकि ऐसा पति जो विश्‍वास न रखता हो, वह पत्नी के कारण पवित्र ठहरता है; और ऐसी पत्नी जो विश्‍वास नहीं रखती, पति के कारण पवित्र ठहरती है; नहीं तो तुम्हारे बाल-बच्‍चे अशुद्ध होते, परन्तु अब तो पवित्र हैं।" यह वचन यह सिखाता है कि एक अविश्‍वासी जीवन साथी मसीह में अपने जीवन साथी के विश्‍वास के आधार पर बचाया जा सकता है। ऐसा जान पड़ता है कि उनके बच्चे परमेश्‍वर के सामने पवित्र होंगे क्योंकि उनके माता-पिता में से एक बचाया गया है। परन्तु यह निष्कर्ष पवित्रशास्त्र के कुल शिक्षा के साथ असंगत पाया जाता है। इस सन्दर्भ में पवित्र शब्द उद्धार का वर्णन नहीं कर रहा है या परमेश्‍वर के सामने पवित्र नहीं किया गया को सन्दर्भित नहीं कर रहा है। इसकी अपेक्षा, यह वैवाहिक सम्बन्धों की पवित्रता को ही सन्दर्भित करता है। पौलुस ने सिखाया कि मसीही विश्‍वासियों को अविश्‍वासियों के साथ "असमान जुए में नहीं जुड़ना" चाहिए (2 कुरिन्थियों 6:14)। कलीसिया में कुछ लोगों को डर था कि, क्योंकि वे अविश्‍वासियों के साथ विवाहित थे, वे पाप में जीवन व्यतीत कर रहे थे — उनका विवाह "अपवित्र" था और उनकी एकता से हुए बच्चे अवैध थे। पौलुस उनके डर को यह कहते हुए समाप्त करता है: विश्‍वास करने वाले जो पहले से ही अविश्‍वासियों से विवाह कर चुके हैं, उन्हें तब तक वैवाहिक सम्बन्ध में बने रहना चाहिए जब तक कि अविश्‍वासी वैवाहिक सम्बन्ध में बने करने की सहमति को बनाए रखता है। उन्हें तलाक नहीं लेना चाहिए; उनका वैवाहिक सम्बन्ध जीवन साथी के विश्‍वास के कारण पवित्र (शुद्ध या परमेश्‍वर की दृष्टि में पृथक किया हुआ) है। इसी तरह, उनके वैवाहिक सम्बन्धों से उत्पन्न हुए बच्चे परमेश्‍वर की दृष्टि में वैध हैं।

यह सच्चाई है कि 1 कुरिन्थियों 7:14 पूरे घराने के उद्धार के बारे में बात नहीं कर रहा है, को पौलुस के द्वारा 1 कुरिन्थियों 7:16 में पूछे जाने वाले प्रश्न में स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है: "क्योंकि हे स्त्री, तू क्या जानती है कि तू अपने पति का उद्धार करा लेगी? और हे पुरुष, तू क्या जानता है कि तू अपनी पत्नी का उद्धार करा लेगा?" यदि पूरे घराने के उद्धार की बात सच थी, तो पत्नी पहले से ही बचाई हुई है (पति के उद्धार के आधार पर); पौलुस को उसके उद्धार को भविष्य में होने के समय का उल्लेख करने की आवश्यकता नहीं होती।

बाइबल पूरे घराने के उद्धार की प्रतिज्ञा नहीं करती है। परन्तु इसका अर्थ यह नहीं है कि एक धर्मी पिता या माता का उनके परिवार में बच्चों पर गहरा आत्मिक प्रभाव नहीं पड़ता है। घर का अगुवा कई तरीकों से परिवार के लिए आत्मिक जीवन चक्र को निर्धारित करता है। हमें अपने परिवारों के उद्धार के लिए ईमानदारी से आशा, प्रार्थना और उनके उद्धार के लिए काम को करना चाहिए। ऐसे कई समय आए हैं, जब अब्राहम का परमेश्‍वर सारा और फिर इसहाक और फिर याकूब का परमेश्‍वर बन जाता है। जैसा कि चार्ल्स स्पर्जन ने कहा है कि, "यद्यपि अनुग्रह लहू में नहीं चलता है, और नवजीवन लहू से नहीं और न ही जन्म से है, तौभी ऐसा अक्सर घटित होता है... ऐसा घटित होता है कि परमेश्‍वर, एक घराने के एक व्यक्ति के द्वारा शेष सभी सदस्यों को अपनी ओर आकर्षित करता है। वह एक व्यक्ति को बुलाता है, और फिर उसे परिवार के शेष सदस्यों को सुसमाचार के जाल में ले आने के लिए आत्मिक नमूने के रूप की तरह का उपयोग करता है।"

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