परमेश्‍वर का अनुग्रह क्या है?


प्रश्न: परमेश्‍वर का अनुग्रह क्या है?

उत्तर:
अनुग्रह बाइबल में एक निरन्तर चलते रहने वाला विषय है, और यह यीशु के आने के साथ नए नियम में समाप्त होता है (यूहन्ना 1:17)। नए नियम में "अनुग्रह" या कृपा का अनुवाद शब्द यूनानी शब्द क़रिस से आता है, जिसका अर्थ "कृपा, आशीष, या दयालुता" से है। हम सभी अनुग्रह या कृपा को दूसरों तक बढ़ा सकते हैं; परन्तु जब परमेश्‍वर के सम्बन्ध में शब्द अनुग्रह का उपयोग किया जाता है, तो यह अधिक सामर्थी अर्थ को देता है। अनुग्रह में परमेश्‍वर हमें स्त्राप के स्थान पर आशीष देने के लिए चुनता है, क्योंकि हम हमारे पाप के दण्ड को पाने के योग्य हैं। यह हम अयोग्य के ऊपर उसकी परोपकारिता है।

इफिसियों 2:8 कहता है कि, "क्योंकि विश्‍वास के द्वारा अनुग्रह ही से तुम्हारा उद्धार हुआ है; और यह तुम्हारी ओर से नहीं, वरन् परमेश्‍वर का दान है।" परमेश्‍वर के साथ सम्बन्ध में आने के लिए एकमात्र तरीका हमारे प्रति उसकी कृपा का होना है। अदन की वाटिका में अनुग्रह दिया जाना आरम्भ हुआ जब परमेश्‍वर ने आदम और हव्वा के पाप को ढकने के लिए एक पशु को मार दिया (उत्पत्ति 3:21)। वह उनकी अवज्ञा के लिए मनुष्य को मार सकता था। परन्तु उन्हें नष्ट करने की अपेक्षा, उसने मनुष्य को उसके साथ सही होने के लिए एक तरीका बनाने का निर्णय लिया। अनुग्रह की यह पद्धति पुराने नियम में चलती रही जब परमेश्‍वर ने पाप से भरे हुए लोगों के लिए प्रायश्‍चित करने के लहू की बलि को माध्यम के रूप में दिया। यह उन बलिदानों का भौतिक लहू नहीं था, जो पापियों को शुद्ध करता था; यह परमेश्‍वर का अनुग्रह था, जिसके कारण परमेश्‍वर ने उन्हें क्षमा किया जिसने उस पर भरोसा किया (इब्रानियों 10:4; उत्पत्ति 15:6)। पाप से भरे हुए लोगों परमेश्‍वर के द्वारा बलि चढ़ाए जाने में अपना विश्‍वास दिखाया, जिसे परमेश्‍वर ने ठहराया था।

प्रेरित पौलुस ने कई पत्रों का आरम्भ इस वाक्यांश के साथ किया है, "हमारे पिता परमेश्‍वर और प्रभु यीशु मसीह की ओर से तुम्हें अनुग्रह और शान्ति मिलती रहे" (रोमियों 1:7; इफिसियों 1:1; 1 कुरिन्थियों 1:3)। परमेश्‍वर ही अनुग्रह को आरम्भ करने वाला है, और यह वही जिसमें से अन्य सभी तरह के अनुग्रह बहते हैं।

परमेश्‍वर दया और अनुग्रह दोनों ही को दिखाता है, परन्तु वे एक नहीं हैं। दया उस दण्ड को रोकती है, जिसे हम पाने के योग्य हैं; अनुग्रह एक ऐसी आशीष को देता है, जिसे हम पाने के योग्य नहीं हैं। अनुग्रह में, परमेश्‍वर ने हमारे स्थान पर अपने सिद्ध पुत्र को त्यागकर हमारे पापों के ऋण को अदा कर देना चुना है (तीतुस 3:5; 2 कुरिन्थियों 5:21)। परन्तु वह दया में भी बहुत आगे बढ़ जाता है और अपने शत्रुओं को अनुग्रह प्रदान करता है (रोमियों 5:10)। जब हम उसके प्रस्ताव को स्वीकार करते हैं और उसके बलिदान में अपने विश्‍वास को रखते हैं, तब वह हमें क्षमा (इब्रानियों 8:12; इफिसियों 1:7), मेल-मिलाप (कुलुस्सियों 1:19-20), बहुतायत का जीवन (यूहन्ना 10:10), शाश्‍वतकालीन मीरास (लूका 12:33), अपना पवित्र आत्मा (लूका 11:13), और उसके साथ स्वर्ग में रहने के लिए स्थान (यूहन्ना 3:16-18) को प्रदान करता है।

अनुग्रह में परमेश्‍वर सबसे अधिक अयोग्य व्यक्ति को भी सबसे बड़ा खजाना दे रहा है — जो हम में से प्रत्येक के लिए है।

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