चंगाई का आत्मिक वरदान क्या है?


प्रश्न: चंगाई का आत्मिक वरदान क्या है?

उत्तर:
चंगाई का आत्मिक वरदान परमेश्‍वर के आत्मा की अलौकिक अभिव्यक्ति है, जो आश्‍चर्यजनक रीति से रोग और/या बीमारी से चंगा करता और उद्धार को ले आता है। यह परमेश्‍वर की ऐसी सामर्थ्य है, जो मानवीय शरीर में पाप और/या शैतान के काम को नष्ट कर देती है, जैसे कि यीशु और शिष्यों के द्वारा किए गए चंगाई के कामों ने किया था (मत्ती 4:24; 15:30; प्रेरितों 5:15-16; 28:8-9)। कलीसिया को दिए गए चंगाई के वरदान का मुख्य रूप से 1 कुरिन्थियों 12 में उल्लेख किया गया है, जहाँ आत्मिक वरदान सूचीबद्ध हैं।

आत्मिक वरदान मसीही विश्‍वासियों को परमेश्‍वर के पवित्र आत्मा के द्वारा दी गई सामर्थ्य, कौशल, क्षमताएँ या ज्ञान हैं। पौलुस ने कलीसिया को बताया है कि आत्मिक वरदानों का उद्देश्य अन्य विश्‍वासियों की उन्नति करना और अन्त में परमेश्‍वर की महिमा को ले आना है। परमेश्‍वर इन वरदानों को उनके उपयोग के लिए देता है, परन्तु कुरिन्थ की कलीसिया में, वे दिखावे के रूप में एक प्रकार की पदवी के प्रतीक थे या श्रेष्ठता को इंगित करने के लिए उपयोग किए जा रहे थे। दिलचस्प बात यह है कि 1 कुरिन्थियों 12:9 में वर्णित चंगा करने के "वरदान" को बहुवचन में सन्दर्भित किया गया है, जो यह संकेत देता है कि चंगाई के वरदान कई तरह के हैं। चंगाई के वरदानों का अर्थ कौशल या क्षमताओं की एक विस्तृत श्रृंखला से हो सकता है। यह आश्‍चर्यजनक तरीके या नाटकीय तरीके से जैसे लंगड़े का चलना, या दवा का उपयोग या इसकी समझ से चंगा करने की सामर्थ्य हो सकती है। यह भावनात्मक घाव को चंगा करने के बिन्दु तक या दूसरों को प्रेम और सहानुभूति दिखाने की क्षमता भी हो सकती है।

मसीही विश्‍वासियों के मध्य में चंगाई के आत्मिक वरदान के उपयोग के बारे में बहुत अधिक विवाद छिड़ा हुआ है। कुछ लोगों का मानना है कि चंगाई और चिन्हों को प्रगट करने वाले कुछ अन्य वरदान अब कार्यरत् नहीं है, जबकि अन्य मानते हैं कि आश्‍चर्यजनक कार्यों को करने वाले वरदान आज भी उपयोग में हैं। निस्सन्देह, चंगा करने की सामर्थ्य एक वरदान प्राप्त व्यक्ति में नहीं होती है। चंगा करने की सामर्थ्य एकमात्र और अकेले परमेश्‍वर में होती है। यद्यपि, परमेश्‍वर आज भी चंगा करता है, हम मानते हैं कि चंगा करने का वरदान मूल रूप से पहली — सदी की कलीसिया के प्रेरितों से सम्बन्धित था, जिससे इस बात की पुष्टि हो सके कि उनका सन्देश परमेश्‍वर की ओर से था (प्रेरितों के काम 2:22; 14:3)।

परमेश्‍वर अभी भी आश्‍चर्यकर्मों को प्रगट करता है। परमेश्‍वर अभी भी लोगों को चंगा करता है। ऐसी कोई भी बात नहीं है, जो परमेश्‍वर को एक व्यक्ति की सेवकाई के द्वारा दूसरे व्यक्ति को चंगा करने से रोक सके। यद्यपि, आत्मिक वरदान के रूप में चंगा करने का आश्‍चर्यजनक वरदान आज कार्यरत् होता हुआ प्रतीत नहीं होता है। परमेश्‍वर निश्‍चित रूप किसी भी बात में हस्तक्षेप कर सकता है, जिस में वह हस्तक्षेप को सही समझता है, चाहे वह "सामान्य" रीति से या आश्‍चर्यकर्म के द्वारा हस्तक्षेप करना ही क्यों न हो। हमारा उद्धार ही स्वयं में आश्‍चर्यकर्म है। हम पाप में मर गए थे, परन्तु परमेश्‍वर ने हमारे जीवन में प्रवेश किया और हमें नया व्यक्ति बना दिया (2 कुरिन्थियों 5:17)। यही सभी चंगाइयों में सबसे बड़ी चंगाई है।

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