पीढ़ियों के शाप को तोड़ने के बारे में बाइबल क्या कहती है?



प्रश्न: पीढ़ियों के शाप को तोड़ने के बारे में बाइबल क्या कहती है?

उत्तर:
बाइबल में कई स्थानों पर "पीढ़ियों के शाप" का उल्लेख मिलता है (निर्गमन 20:5; 34:7; गिनती 14:18; व्यवस्थाविवरण 5:9)। यह परमेश्‍वर के लिए अनुचित प्रतीत होता है कि वह बच्चों को उनके पूर्वजों के पापों के लिए दण्डित करे। यद्यपि, इस तरह से देखना इसे एक सांसारिक दृष्टिकोण से देखना है। परमेश्‍वर जानता है कि पाप के प्रभाव एक पीढ़ी से दूसरे में चले जाते हैं। जब एक पिता पापी जीवन शैली को यापन करता है, तो उसकी सन्तान की भी ऐसी ही पापी जीवन शैली होती है। यही कारण है कि यह परमेश्‍वर के लिए गलत नहीं है कि वह तीसरे या चौथे पीढ़ी तक पाप को दण्डित करता है — क्योंकि वे उसी पाप को करते चले जा रहे हैं, जिसे उनके पूर्वजों ने किया था। परन्तु उन्हें उनके अपने पापों के लिए, न कि उनके पूर्वजों के पापों के लिए दण्डित किया जा रहा है। बाइबल विशेष रूप से हमें बताती है कि परमेश्‍वर सन्तान को उनके अभिभावकों के पाप के लिए उत्तरदायी नहीं ठहराता है (व्यवस्थाविवरण 24:16)।

कलीसिया में आज भी एक प्रचलन मिल रहा है, जिसमें किसी भी प्रकार की समस्या और पाप के लिए पीढ़ियों के शाप के ऊपर दोष लगाया जाता या इसे ही दोषी ठहराया जाता है। यह बाइबल आधारित नहीं है। पीढ़ियों के शाप का उपचार यीशु मसीह के द्वारा प्रदत्त मुक्ति है। जब हम मसीही विश्‍वासी बन जाते हैं, तब हम नई सृष्टि बन जाते हैं (2 कुरिन्थियों 5:17)। तब कैसे परमेश्‍वर की एक सन्तान अभी भी परमेश्‍वर के शाप के अधीन हो सकती है (रोमियों 8:1)? "पीढ़ियों के शाप" के चँगाई तब मसीह में विश्‍वास करना और उसके लिए एक पवित्र पृथक जीवन को यापन करना है (रोमियों 12:1-2)।

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