अविवाहित यौन सम्पर्क और व्यभिचार में क्या भिन्नता है?


प्रश्न: अविवाहित यौन सम्पर्क और व्यभिचार में क्या भिन्नता है?

उत्तर:
आधुनिक शब्दकोश में अविवाहित यौन सम्पर्क की परिभाषा ("एक दूसरे से विवाह किए बिना दो व्यक्तियों के मध्य में किए जाने वाला स्वेच्छिक सम्भोग, जिसमें व्यभिचार भी सम्मिलित है") और व्यभिचार ("एक विवाहित व्यक्ति और वैध जीवन साथी को छोड़ कर होने वाले स्वेच्छिक सम्भोग") के रूप में दी गई है, जो कि समझने में बहुत ही अधिक सरल हैं, परन्तु बाइबल हमें इस बारे में अधिक जानकारी देती है कि परमेश्‍वर इन दोनों तरह के यौन पापों को कैसे समझता है। बाइबल में, दोनों को ही शाब्दिक रूप से संदर्भित किया गया है, परन्तु मूर्तिपूजा को संदर्भित करने के लिए दोनों को ही उपयोग किया जाता है।

पुराने नियम में, मूसा की व्यवस्था और यहूदी रीति रिवाजों के द्वारा सभी तरह के यौन पापों की मनाही की गई थी। तथापि, पुराने नियम में "अविवाहित यौन सम्पर्क" के लिए इब्रानी शब्द का उपयोग मूर्तिपूजा के सन्दर्भ में भी किया गया था और इसे आध्यात्मिक वेश्यागमन भी कहा जाता है। 2 इतिहास 21:10-14, परमेश्‍वर यहोराम के ऊपर विपत्तियों और बीमारियों को ले आया था, क्योंकि उसने लोगों को मूर्ति पूजा की ओर मार्गदर्शन दिया था। उसने "यरूशलेम के निवासियों से व्यभिचार कराया" (वचन11) और "और अहाब के घराने के समान यहूदियों और यरूशलेम के निवासियों से व्यभिचार कराया" (वचन 13)। राजा अहाब इज़ेबेल का पति था, जो कि काम-देवता बाल की पुजारी थी, जिसने इस्राएलियों को सबसे भव्य प्रकार की मूर्ति की आराधना में मार्गदर्शन प्रदान किया था। यहेजकेल 16 में भविष्यद्वक्ता यहेजकेल ने परमेश्‍वर के लोगों के इतिहास को विस्तार सहित वर्णन किया है कि वे परमेश्‍वर को छोड़ दूसरे देवताओं के साथ "वेश्या गमन" के कार्यों में लगे हुए हैं। शब्द अविवाहित यौन सम्पर्क, का अर्थ इस अकेले अध्याय में ही असँख्य बार "मूर्तिपूजा" के रूप में उपयोग किया गया है। जैसा कि इस्राएलियों को उनके ज्ञान, धन और शक्ति के लिए उनके चारों ओर की जातियों में जाना जाता था, जो उनके लिए एक जाल बन गया ठीक वैसे ही जैसे एक सुन्दर महिला के लिए उसकी सुन्दरता जाल होती है, उनकी प्रशंसा की जाती थी और उनके पड़ोसियों के द्वारा उन्हें शुभकामनाएँ और बधाइयाँ दी जाती थीं और इस कारण वे मूर्तिपूजा की ओर खिंचे चले जाते थे। शब्द अविवाहित यौन सम्पर्क या कुँवारों के मध्य में होने वाला सम्भोग का उपयोग अन्यजातियों की मूर्तिपूजा के साथ जोड़ते हुए इसलिए किया गया है, क्योंकि अन्यजातियों की "पूजा" की प्रथाओं में बहुत अधिक यौन क्रियाएँ सम्मिलित होती थीं। मंदिर में होने वाला वेश्यागमन या देव-दासियों के द्वारा प्रसाद के रूप में किए जाने वाले यौन सम्पर्क बाल और अन्य झूठे देवताओं की पूजा में सामान्य रूप से पाए जाते थे। सभी प्रकार के यौन पाप इन धर्मों में न केवल स्वीकार किए गए थे, अपितु पूजा करने वालों के लिए देवताओं से अधिक आशीष, विशेष रूप से उनके भेड़-बकरियों और फसलों की वृद्धि में देने के साधन के रूप में भी प्रोत्साहित किए गए थे।

नए नियम में अविवाहित यौन सम्पर्क या कुँवारों के मध्य में होने वाला सम्भोग के लिए उपयोग किया गया शब्द यूनानी शब्द पोर्निया से निकल कर आया है, जिसका अर्थ है व्यभिचार और कौटुम्बिक व्यभिचार अर्थात् सगे-सम्बन्धी के साथ यौन सम्पर्क से है। पोर्निया एक अन्य यूनानी शब्द से आया है, जिसकी परिभाषा में समलैंगिकता सहित किसी भी प्रकार की अवैध वासना सम्मिलित है। सुसमाचार और पत्रों में इस शब्द का प्रयोग सदैव ही यौन पापों के सन्दर्भ में किया गया है, जबकि प्रकाशितवाक्य की पुस्तक में "अविवाहित यौन सम्पर्क" सदैव मूर्तिपूजा को ही दर्शाता है। प्रभु यीशु अविवाहित यौन सम्पर्क वाली मूर्तिपूजा को छोड़ने के लिए एशिया माइनर की दो कलीसियाओं की निन्दा करता है (प्रकाशितवाक्य 2:14, 20), और वह अन्त के समयों में आने वाली "बड़ी वेश्या" को भी उद्धृत करता है, जो कि मूर्तिपूजा आधारित झूठा धर्म है "जिसके साथ पृथ्वी के राजाओं ने व्यभिचार किया और पृथ्वी के रहनेवाले उसके व्यभिचार की मदिरा से मतवाले हो गए थे" (प्रकाशितवाक्य 17:1-2)।

दूसरी ओर, व्यभिचार, विवाहित लोगों के मध्य में अपने पति या पत्नी के अतिरिक्त किसी अन्य के साथ किए जाने वाले व्यभिचार को संदर्भित करता है, और यह शब्द पुराने नियम में शाब्दिक और रूपक अर्थात् दोनों में अर्थों में उपयोग किया गया है। इब्रानी शब्द जिसका अनुवाद "व्यभिचार" है, का शाब्दिक अर्थ है "विवाह को तोड़ना" से है। दिलचस्प बात यह है कि कि परमेश्‍वर उसके लोगों के द्वारा दूसरे देवताओं के लिए उसका त्याग किए जाने को व्यभिचार के रूप में वर्णित करता है। यहूदी लोगों को यहोवा का जीवन साथी अर्थात् पति के रूप में माना जाता था, इसलिए जब वे अन्य जातियों के देवताओं की ओर चले जाते थे, तो उनकी तुलना व्यभिचारिणी पत्नी से की जाती थी। पुराना नियम अक्सर इस्राएल की मूर्तिपूजा को एक उदासीन स्त्री के रूप में संदर्भित करता है, जो अन्य देवताओं के पीछे "वेश्या" बन कर चली गई थी (निर्गमन 34:15-16; लैव्यव्यवस्था 17:7; यहेजकेल 6:9 बी. एस. आई हिन्दी बाइबल)। इसके अतिरिक्त, होशे की पुस्तक परमेश्‍वर और इस्राएल के मध्य के सम्बन्ध को भविष्यद्वक्ता होशे और एक व्यभिचार स्त्री गोमर के मध्य में होने वाले विवाह के रूप में प्रगट करती है। होशे के विरूद्ध गोमेर की गतिविधियाँ, इस्राएल के पाप और विश्‍वासघात के एक चित्र को प्रस्तुत करती है, जिसने समय के व्यतीत होने के साथ ही अपने सच्चे पति (यहोवा) को अन्य देवताओं के साथ आध्यात्मिक व्यभिचार करने के लिए छोड़ दिया।

नए नियम में, "व्यभिचार" के लिए दो यूनानी शब्दों का उपयोग निकटता के साथ सदैव ही वैवाहिक साथियों के द्वारा विवाह से बाहर जुड़े हुए यौन पाप को शाब्दिक रूप से दिखाने के लिए किया जाता है। एकमात्र अपवाद थुआतीरा की कलीसिया को लिखे हुए पत्र में जो "उस स्त्री ईज़ेबेल को रहने देती है, जो अपने आप को भविष्यद्वक्तिन कहती है" के लिए उसकी लिए निन्दा पाया जाता है (प्रकाशितवाक्य 2:20)। यह स्त्री कलीसिया को अनैतिकता और मूर्तिपूजा की प्रथाओं की ओर आकर्षित करती थी और उसके झूठे सिद्धान्त किसी को भी उसके साथ व्यभिचार करने के लिए प्रेरित करते थे।

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