मैं कैसे अन्त-के-दिनों के प्रति के अपने डर को दूर कर सकता हूँ ?


प्रश्न: मैं कैसे अन्त-के-दिनों के प्रति के अपने डर को दूर कर सकता हूँ ?

उत्तर:
यीशु ने कहा कि अन्त के समय में कुछ डरावनी घटनाएँ घटित होंगी; वास्तव में, "भय के कारण और संसार पर आनेवाली घटनाओं की बाट देखते-देखते लोगों के जी में जी न रहेगा" (लूका 21:26)। कुछ लोग आज भी डर से भरे हुए हैं कि क्या घटित होगा। परन्तु प्रभु हमें डराना नहीं चाहता: "हे छोटे झुण्ड, मत डर; क्योंकि तुम्हारे पिता को यह भाया है, कि तुम्हें राज्य दे" (लूका 12:32)।

अन्त के दिनों के डर को दूर करने का सबसे अच्छा तरीका आत्मिक रूप से इसके लिए तैयार होना है। सबसे पहले और सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि आपके पास अनन्तकालीन जीवन को पाने के लिए यीशु मसीह के साथ व्यक्तिगत सम्बन्ध होना चाहिए (यूहन्ना 3:16; रोमियों 10:9-10)। केवल उसके माध्यम से ही आप पाप की क्षमा प्राप्त कर सकते हैं और परमेश्‍वर के साथ अनन्तकाल को प्राप्त कर सकते हैं। यदि परमेश्‍वर आपका पिता है और यीशु आपका प्रभु है, तो वास्तव में चिन्ता करने के लिए कुछ भी नहीं है (फिलिप्पियों 4:7)।

दूसरा, प्रत्येक मसीही विश्‍वासी को मसीह में उस बुलाहट के योग्य जीवन जीना चाहिए जिसमे हमें बुलाया गया है। इफिसियों 4:1-3 सिखाता है, "इसलिये मैं जो प्रभु में बन्दी हूँ तुम से विनती करता हूँ कि जिस बुलाहट से तुम बुलाए गए थे, उसके योग्य चाल चलो, अर्थात् सारी दीनता और नम्रता सहित, और धीरज धरकर प्रेम से एक दूसरे की सह लो; और मेल के बन्धन में आत्मा की एकता रखने का यत्न करो।" मसीह को जानना और उसकी इच्छा में चलना किसी भी प्रकार के भय को कम करने की दिशा में एक लम्बे मार्ग पर चलना निर्धारित करता है।

तीसरा, मसीह विश्‍वासियों को परमेश्‍वर ने छुटकारे की प्रतिज्ञा की है और यह उत्साहजनक है। पहले थिस्सलुनीकियों 4:13-18 में ऐसे लिखा हुआ है,

"हे भाइयो, हम नहीं चाहते कि तुम उनके विषय में जो सोते हैं, अज्ञानी रहो; ऐसा न हो कि तुम दूसरों के समान शोक करो जिन्हें आशा नहीं। क्योंकि यदि हम विश्‍वास करते हैं कि यीशु मरा और जी भी उठा, तो वैसे ही परमेश्‍वर उन्हें भी जो यीशु में सो गए हैं, उसी के साथ ले आएगा। क्योंकि हम प्रभु के वचन के अनुसार तुम से यह कहते हैं कि हम जो जीवित हैं और प्रभु के आने तक बचे रहेंगे, सोए हुओं से कभी आगे न बढ़ेंगे। क्योंकि प्रभु आप ही स्वर्ग से उतरेगा; उस समय ललकार, और प्रधान दूत का शब्द सुनाई देगा, और परमेश्‍वर की तुरही फूँकी जाएगी; और जो मसीह में मरे हैं, वे पहले जी उठेंगे। तब हम जो जीवित और बचे रहेंगे उनके साथ बादलों पर उठा लिये जाएँगे कि हवा में प्रभु से मिलें; और इस रीति से हम सदा प्रभु के साथ रहेंगे। इस प्रकार इन बातों से एक दूसरे को शान्ति दिया करो।"

भविष्य से डरने से बहुत दूर, हम इसी आनन्द को प्राप्त करने की प्रतीक्षा कर रहे हैं। जो लोग मसीह में हैं वे उससे मिलने के लिए हवा में ऊपर "उठा लिए" जाएँगे, और हम "सदैव के लिए प्रभु के साथ रहेंगे।"

इसके अतिरिक्त, पवित्रशास्त्र कहता है कि हमें न्याय के दिन से डरने की आवश्यकता नहीं है: "इसी से प्रेम हम में सिद्ध हुआ कि हमें न्याय के दिन हियाव हो; क्योंकि जैसा वह है वैसे ही संसार में हम भी हैं। प्रेम में भय नहीं होता, वरन् सिद्ध प्रेम भय को दूर कर देता है; क्योंकि भय का सम्बन्ध दण्ड से होता है, और जो भय करता है वह प्रेम में सिद्ध नहीं हुआ" (1 यूहन्ना 4:17-18)।

जो लोग मसीह को नहीं जानते उनके पास भविष्य में शान्ति की कोई प्रतिज्ञा नहीं हैं। अविश्‍वासियों के लिए, वास्तविक चिन्ता की बात है, क्योंकि उन्होंने इस विषय का समाधान नहीं किया है कि वे अनन्तकाल कहाँ व्यतीत करेंगे। अविश्‍वासियों को मेघारोहण अर्थात बादलों पर हवा में उठा लिए जाने के समय ऊपर नहीं उठाया जाएगा और वे क्लेशकाल का अनुभव होगा; उनके पास वास्तव में डरने के लिए कुछ है। विश्‍वासियों को अन्त के दिन से कोई डर नहीं है। इसके अपेक्षा, हम अपनी बुलाहट के योग्य जीवन जीने का प्रयास करते हैं, यीशु की वापसी की प्रतीक्षा करते हैं और इस ज्ञान में विश्राम पाते हैं कि हमारा समय उसके हाथों में हैं (भजन संहिता 31:15)।

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