राजा शाऊल को पीड़ा देने के लिए परमेश्‍वर ने एक दुष्ट आत्मा को क्यों भेजा?



प्रश्न: राजा शाऊल को पीड़ा देने के लिए परमेश्‍वर ने एक दुष्ट आत्मा को क्यों भेजा?

उत्तर:
"यहोवा का आत्मा शाऊल पर से उठ गया और यहोवा की ओर से एक दुष्ट आत्मा उसे घबराने लगा" (1 शमूएल 16:14)। 1 शमूएल 16:15-16, 23,18:10, और 19:9 में भी इसे लिखा गया है। परमेश्‍वर ने शैतानिक "दुष्ट आत्मा" को शाऊल को परेशान करने के लिए भेज दिया। शाऊल ने सीधे ही दो घटनाओं में परमेश्‍वर की आज्ञा की अवहेलना की थी (1 शमूएल 13:1-14; 15:1-35)। इसलिए, परमेश्‍वर ने अपने आत्मा को शाऊल से हटा लिया और उसे एक दुष्ट आत्मा पीड़ित करने के लिए दे दी। सम्भवतः शैतान और दुष्ट आत्माएँ सदैव ही शाऊल के ऊपर आक्रमण करना चाहते थे, परन्तु परमेश्‍वर अब उन्हें ऐसा करने की अनुमति दे रहा था।

यह हमें इससे सम्बन्धित एक और प्रश्‍न की ओर ले जाता है — क्या परमेश्‍वर आज भी लोगों को पीड़ा देने के लिए बुरी आत्माओं को भेजता है? नए नियम में ऐसे व्यक्तियों के उदाहरण पाए जाते हैं, जिन्हें शैतान या दुष्ट आत्माओं को दण्ड देने के लिए छोड़ दिया गया था। परमेश्‍वर ने हनन्याह और सफीरा को शैतान की आत्मा से भर जाने के द्वारा आरम्भिक कलीसिया के लिए एक चेतावनी और उदाहरण के रूप में होने की अनुमति दी (प्रेरितों के काम 5: 1-11)। कुरिन्थ की कलीसिया में एक व्यक्ति कौटुम्बिक व्यभिचार और व्यभिचार कर रहा था, और परमेश्‍वर ने अगुवों को उसके पापी स्वभाव को नष्ट करने और उसकी आत्मा को बचाने के लिए उसे "शैतान के हाथों में" दे देने का आदेश दिया (1 कुरिन्थियों 5:1-5)। शैतान के द्वारा यीशु की परीक्षा होने के लिए आत्मा ने उसे जंगल में जाने के लिए अगुवाई दी (मत्ती 4:1-11) और उसकी वहाँ पर जाँच की गई। परमेश्‍वर ने भी शैतान के एक दूत को प्रेरित पौलुस को पीड़ा देने की अनुमति दी, ताकि वह वह परमेश्‍वर के अनुग्रह और सामर्थ्य के ऊपर भरोसा करना सीख सके और वह आत्मिक सत्यों की बहुतायत के कारण घमण्ड से न भर जाए (2 कुरिन्थियों 12:7)।

यदि परमेश्‍वर बुरी आत्माओं को आज भी लोगों को पीड़ित करने की अनुमति देता है, तो वह हमारे अच्छे और अपनी महिमा के लक्ष्य की प्राप्ति के लिए ऐसा करता है (रोमियों 8:28)। यद्यपि दुष्ट आत्माएँ बुरी होती हैं, तथापि वे परमेश्‍वर के सार्वभौमिक नियन्त्रण के अधीन हैं। जैसे अय्यूब की घटना में घटित हुआ, शैतान और उसके छोटे-दूत-केवल उन्हीं कार्यों को कर सकते हैं, जिनकी अनुमति परमेश्‍वर उन्हें करने के लिए देता है (अय्यूब 1:12; 2:6)। वे स्वयं पर निर्भर हो परमेश्‍वर के प्रभुत्व और सिद्ध इच्छा और उद्देश्य से परे हो स्वतन्त्रता के साथ कार्य नहीं कर सकते हैं। यदि मसीही विश्‍वासियों को सन्देह है कि उन्हें शैतानिक शक्तियों के द्वारा यातना दी जा रही है, तो इसका पहला उत्तर किसी भी ज्ञात् पाप से पश्चाताप करना है। तत्पश्चात् हमें यह समझ प्राप्ति के लिए बुद्धि की माँग करनी चाहिए कि हम परिस्थिति से शिक्षा प्राप्त कर सकें। तब हम अपनी जीवन में परमेश्‍वर ने जिस बात के होने की अनुमति दी है, उसे इस भरोसे के साथ होने दें कि इसके परिणामस्वरूप हम में विश्‍वास और परमेश्‍वर की महिमा का निर्माण होगा।

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राजा शाऊल को पीड़ा देने के लिए परमेश्‍वर ने एक दुष्ट आत्मा को क्यों भेजा?