पूर्वी ऑर्थोडॉक्स चर्च क्या है और ऑर्थोडॉक्स मसीही विश्‍वासियों के धार्मिक मान्यताएँ क्या हैं?



प्रश्न: पूर्वी ऑर्थोडॉक्स चर्च क्या है और ऑर्थोडॉक्स मसीही विश्‍वासियों के धार्मिक मान्यताएँ क्या हैं?

उत्तर:
पूर्वी ऑर्थोडॉक्स अर्थात् धर्मनिष्ठक चर्च एक एकलौती कलीसिया नहीं है, अपितु यह 13 स्व-शासित निकायों का एक परिवार होते हुए उस राष्ट्र की अधीनता में हैं, जिसमें वे स्थित हैं (जैसे, ग्रीक ऑर्थोडॉक्स चर्च, रूसी ऑर्थोडॉक्स चर्च)। वे अपने संस्कारों, धर्मसिद्धान्तों, अनुष्ठानिक प्रथा विधियों और कलीसिया शासन की समझ के कारण एकीकृत हैं, परन्तु प्रत्येक अपनी गतिविधियों का संचालन स्वयं करती हैं।

प्रत्येक ऑर्थोडॉक्स चर्च के मुखिया को "प्रेट्रीआर्क" अर्थात् कुलपति या "मेट्रोपोलीटन" अर्थात् महाधर्माध्यक्ष कह कर पुकारा जाता है। कांस्टेंटिनोपल (इस्तांबुल, तुर्की) के मुखिया को सार्वभौमिक-या विश्‍वव्यापी- प्रेट्रीआर्क माना जाता है। वह रोमन कैथोलिक चर्च के पोप के समकक्ष के पद का अधीकारी माना जाती है। पोप के विपरीत, जिसे VICARIUS FILIUS DEI (परमेश्‍वर के पुत्र का प्रतिनिधि) के नाम से जाना जाता है, कांस्टेंटिनोपल के बिशप PRIMUS INTER PARES (बराबरी पर रहने वाले सभों के मध्य प्रथम) के नाम से जाना जाता है। उसे विशेष सम्मान मिलता है, परन्तु उसके पास अन्य ऑर्थोडॉक्स सहभागिता की अन्य 12 कलीसियाओं में हस्तक्षेप करने की कोई शक्ति नहीं है।

ऑर्थोडॉक्स चर्च स्वयं को मसीह की एक सच्ची कलीसिया मानती है, और अपनी पहचान को मूल प्रेरितों से आते हुए प्रेरिताई उत्तराधिकार की एक न टूटी हुई श्रृंखला से पाती है। ऑर्थोडॉक्स विद्वान रोमन कैथोलिक और प्रोटेस्टैंट कलीसिया के आत्मिक स्थिति पर तर्क वितर्क करते हैं, और कुछ इन्हें गलत शिक्षाओं वाली मानते हैं। तथापि, कैथोलिक और प्रोटेस्टैंट के मसीही विश्‍वासियों की तरह ही, ऑर्थोडॉक्स मसीही विश्‍वासी त्रिएकत्व की, बाइबल को परमेश्‍वर के वचन के रूप में होने की, यीशु को परमेश्‍वर के पुत्र के रूप में और कई अन्य बाइबल आधारित धर्मसिद्धान्तों की पुष्टि करते हैं। तथापि, धर्मसिद्धान्त के भाव में, वे प्रोटेस्टैंट मसीही विश्‍वासियों की अपेक्षा बहुत कुछ रोमन कैथोलिकवाद से मिलते जुलते हैं।

दुर्भाग्य से, ऑर्थोडॉक्स कलीसिया के इतिहास और धर्मविज्ञान में दृश्य रूप से विश्‍वास द्वारा धर्मी ठहराया जाना लुप्त है। इसकी अपेक्षा, ऑर्थोडॉक्स कलीसिया थिओसिस (शाब्दिक रूप से, "अलौकिकतावाद") पर महत्व देती है, एक धीमी गति से चलने वाली प्रक्रिया जिसमें एक मसीही विश्‍वासी मसीह के सदृश परिवर्तित होता चला जाता है। बहुत सी ऑर्थोडॉक्स परम्पराएँ जिस बात को समझने में असफल हो गई हैं, वह यह है, कि "अलौकिकतावाद" उद्धार का प्रगतिशील परिणाम है, न कि यह स्वयं उद्धार की एक शर्त है। अन्य ऑर्थोडॉक्स विशेषताएँ जो बाइबल के विरोध में हैं, निम्नलिखित हैं:
कलीसियाई परम्परा और पवित्रशास्त्र का अधिकार एक समान होना
व्यक्तिगत् लोगों को परम्परा से पृथक बाइबल की व्याख्या करने के लिए निरूत्साहित करना
मरियम का स्थाई रूप से कुँवारी रहना
मृतकों के लिए प्रार्थना
व्यक्तिगत उत्तरदायित्व और विश्‍वास के सन्दर्भ के बिना शिशुओं को बपतिस्मा देना
मृत्यु उपरान्त उद्धार को प्राप्त करने की सम्भावना
उद्धार को खो देने की सम्भावना

जबकि पूर्वी ऑर्थोडॉक्स चर्च अपनी कलीसिया में कई बड़े मसीही विश्‍वासी के उत्पन्न होने का दावा करती है, और जबकि बहुत सी ऑर्थोडॉक्स परम्पराएँ हैं, जिनमें यीशु मसीह के साथ वास्तविक उद्धार का सम्बन्ध मिलता है, ऑर्थोडॉक्स स्वयं ऐसे स्पष्ट सन्देश की बात नहीं करती है, जिसे की मसीह के बाइबल आधारित सुसमाचार के साथ सामंजस्य किया जा सके। धर्मसुधारकों की "एकमात्र पवित्रशास्त्र, एकमात्र विश्‍वास, एकमात्र अनुग्रह, और एकमात्र मसीह" की बुलाहट पूर्वी ऑर्थोडॉक्स चर्च में लुप्त है, और इस खजाने के बिना एक कलीसिया के लिए मूल्यवान् होना अनहोनी सी बात है।



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पूर्वी ऑर्थोडॉक्स चर्च क्या है और ऑर्थोडॉक्स मसीही विश्‍वासियों के धार्मिक मान्यताएँ क्या हैं?