क्या यीशु हमारे लिए प्रार्थना करता है?


प्रश्न: क्या यीशु हमारे लिए प्रार्थना करता है?

उत्तर:
प्रार्थना परमेश्वर के साथ वार्तालाप करने की एक गतिविधि है। हम जानते हैं कि जब वह पृथ्वी पर था, तब प्रार्थना यीशु के जीवन का एक बड़ा भाग थी (लूका 6:12; मरकुस 14:32; मत्ती 26:36)। उसने अपने पिता के साथ एकान्त में बहुत अधिक समय व्यतीत किया। अधिकांश समय, वह जिस बारे में प्रार्थना करता था, हम केवल अनुमान ही लगा सकते हैं; यद्यपि, नए नियम में कुछ स्थान हमें बताते हैं कि उसने क्या प्रार्थना की थी। मत्ती 19:13 में, उसने छोटे बच्चों के लिए प्रार्थना की। लूका 22:32 में, वह हमें बताता है कि उसने पतरस के विश्वास को दृढ़ बने रहने के लिए प्रार्थना की। और यूहन्ना 17 में, यीशु की महा याजकीय प्रार्थना में, उसने अपने अनुयायियों और "उनके लिये भी प्रार्थना की जो उसके शिष्यों के वचन के द्वारा उस पर विश्‍वास करेंगे" (वचन 20)। वे लोग हम हैं! अब जब यीशु स्वर्ग में वापस चला गया है, तब भी वह हमारे लिए प्रार्थना करता है। हमारी ओर से की जाने वाली उसकी सेवकाई निरन्तर चल रही है (इब्रानियों 7:25)।

यीशु हमारे "पिता के पास हमारा एक सहायक" है (1 यूहन्ना 2:1)। एक सहायक अर्थात् अधिवक्ता या वकील वह होता है, जो किसी दूसरे के लिए मुकदमा लड़ता है। अधिवक्ता उन लोगों के स्थान पर खड़े होते हैं, जो स्वयं के लिए नहीं बोल सकते हैं। यीशु, हमारे अधिवक्ता के रूप में, पिता के सामने हमारे स्थान पर खड़ा है और हमारी ओर से प्रार्थना करता है। यीशु की वकालत का प्रभाव होना निश्चित है, क्योंकि वह उनमें से एक है, जिसके लिए पिता ने कहा है कि, "यह मेरा प्रिय पुत्र है, जिससे मैं अत्यन्त प्रसन्न हूँ" (मत्ती 3:17)। हमारे लिए यीशु की प्रार्थनाएँ निरन्तर चलने वाली हैं, और वे सिद्ध हैं।

हमारे पास मसीह में एक वकील अर्थात् अधिवक्ता है, परन्तु हमारे पास एक अभियुक्त: शैतान भी है, जो रात और दिन हमारे ऊपर दोष लगाता रहता है (प्रकाशितवाक्य 12:10; जकर्याह 3:1)। हमारा नश्वर शत्रु हमारे पापों को परमेश्वर के सामने प्रसारित करता रहता है, उनका मजाक उड़ाता रहता है और उन लोगों का अपमान करता है, जिन्हें यीशु ने अपने लिए खरीदा है। परन्तु रोमियों 8:33-34 का कहना है कि हमें शैतान की ईर्ष्या के बारे में चिन्ता करने की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि यीशु, हमारा अधिवक्ता, उससे कहीं अधिक सामर्थी हैं: "परमेश्‍वर के चुने हुओं पर दोष कौन लगाएगा? परमेश्‍वर ही है जो उनको धर्मी ठहरानेवाला है। फिर कौन है जो दण्ड की आज्ञा देगा? मसीह ही है — जो मर गया वरन् मुर्दों में से जी भी उठा — और परमेश्‍वर के दाहिनी ओर है, और हमारे लिये निवेदन भी करता है।"

यूहन्ना 17 में, यीशु अपने अनुयायियों के लिए प्रार्थना करता है, और उस प्रार्थना से हम सीख सकते हैं कि यीशु अब हमारे लिए किस तरह की प्रार्थना कर रहा है। यीशु हमारे लिए प्रार्थना करता है कि हम निम्न कामों को करें और निम्न बातों को जानें:
• परमेश्वर और उसके पुत्र, यीशु मसीह को जानें (वचन 3)
• धर्मत्यागी से सुरक्षित रहें (वचन 11)
• आत्मा में एक हों जैसे पिता और पुत्र हैं (वचन 11)
• उसके आनन्द से भर जाएँ (वचन 13)
• बुराई से दूर रहें (वचन 15)
• परमेश्वर के वचन के द्वारा पवित्र बनें (वचन 17)
• आने वाली पीढ़ियाँ मसीह में बनी रहें (वचन 20–21)
• हमारा प्रेम मसीह के सन्देश को संसार तक पहुँचाए (वचन 23)
• उसके साथ स्वर्ग में अनन्त काल के लिए जुड़ जाए (वचन 24)
• एक-दूसरे के लिए उसी तरह के प्रेम का अनुभव करें जैसा पिता और पुत्र साझा करते हैं (वचन 26)

इब्रानियों 4:14-16 में यीशु को हमारे महान् महायाजक के रूप में वर्णित किया गया है। हमारे लिए उसकी मध्यस्थता के कारण, हम स्वयं पिता के पास पहुँचते हैं: "इसलिये जब हमारा ऐसा बड़ा महायाजक है, जो स्वर्गों से होकर गया है, अर्थात् परमेश्‍वर का पुत्र यीशु, तो आओ, हम अपने अंगीकार को दृढ़ता से थामे रहें। क्योंकि हमारा ऐसा महायाजक नहीं जो हमारी निर्बलताओं में हमारे साथ दु:खी न हो सके; वरन् वह सब बातों में हमारे समान परखा तो गया — तौभी निष्पाप निकला। इसलिये आओ, हम अनुग्रह के सिंहासन के निकट हियाव बाँधकर चलें कि हम पर दया हो, और वह अनुग्रह पाएँ जो आवश्यकता के समय हमारी सहायता करे।" इस जीवन में हम जिन भी बातों का सामना करते हैं, उसके बाद भी हम इस विश्वास के साथ जीवन व्यतीत कर सकते हैं, कि यदि हम यीशु से सम्बन्धित हैं, वह सदैव हमारे लिए प्रार्थना कर रहा है।

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