उद्धार क्या है? उद्धार का मसीही धर्मसिद्धान्त क्या है?



प्रश्न: उद्धार क्या है? उद्धार का मसीही धर्मसिद्धान्त क्या है?

उत्तर:
उद्धार दुख या खतरे से छुटकारा है। बचाए जाने का अर्थ सुरक्षा या छुटकारा प्रदान करना है। इस शब्द में विजय, तन्दरूस्ती या संरक्षण का विचार समाहित है। कभी कभी बाइबल बचाए जाने या उद्धार के शब्दों को अस्थाई, शारीरिक छुटकारे जैसे कि पौलुस का कैदगृह से छुटकारे के लिए उपयोग करती है (फिलिप्पियों 1:19)।

अधिकत्तर, शब्द "उद्धार" का सम्बन्ध एक अनन्तकालीन, आत्मिक छुटकारे से है। जब पौलुस ने फिलिप्पी दरोगा से कहा कि उसे बचना अवश्य है तो वह दरोगा को अनन्तकालीन गतव्य की ओर संकेत दे रहा था (प्रेरितों के काम 16:30-31)। यीशु ने बचाए जाने की समानता परमेश्‍वर के राज्य में प्रवेश करने से की है (मत्ती 19:24-25)।

हम किस से बचाए गए हैं? उद्धार के मसीही धर्मसिद्धान्त में, हम "क्रोध" से बचाए गए हैं, अर्थात् परमेश्‍वर का पाप के लिए किए जाने वाले न्याय से (रोमियों 5:9; 1 थिस्सलुनीकियाँ 5:9)। हमारे पापों ने हमें परमेश्‍वर से अलग कर दिया था, और पाप का परिणाम मृत्यु है (रोमियों 6:23)। बाइबल आधारित उद्धार पाप से होने वाले परिणाम से छुटकारे के लिए उद्धृत किया हुआ है और इसलिए इसमें पाप का दूर कर दिया जाना सम्मिलित है।

कौन बचाए जाने के कार्य को करता है? केवल परमेश्‍वर ही पाप को दूर कर सकता है और हमें पाप के दण्ड से छुटकारा दे सकता है (2 तीमुथियुस 1:9; तीतुस 3:5)।

परमेश्‍वर कैसे बचाता है? उद्धार के मसीही धर्मसिद्धान्त में, परमेश्‍वर ने हमें मसीह के द्वारा बचा लिया है (यूहन्ना 3:17)। विशेष रूप से, यह मसीह की क्रूस पर हुई मृत्यु और फलस्वरूप पुनरुत्थान है जो हमारे उद्धार को ले आता है (रोमियों 5:10; इफिसियों 1:7)। पवित्रशास्त्र इस बात को लेकर पूर्ण स्पष्ट है कि उद्धार परमेश्‍वर के अनुग्रह से, बिना किसी योग्यता के दिया हुआ वरदान है (इफिसियों 2:5, 8) और यह केवल यीशु मसीह के द्वारा ही विश्‍वास करने पर उपलब्ध है (प्रेरितों के काम 4:12)।

हम कैसे उद्धार को प्राप्त करते हैं? हम विश्‍वास के द्वारा बचाए जाते हैं। प्रथम, हमें सुसमाचार को सुनना है - यह यीशु की मृत्यु और पुनरुत्थान का शुभ सन्देश है (इफिसियों 1:13)। इसके पश्चात्, हमें विश्‍वास करना चाहिए - प्रभु यीशु में पूर्ण रूप से भरोसा करना है (रोमियों 1:16)। इसमें पश्चाताप, अर्थात् पाप और मसीह के बारे में अपने मन को फिराना (प्रेरितों के काम 3:19), और प्रभु यीशु मसीह के नाम के पुकारना (रोमियों 10:9-10, 13) सम्मिलित है।

उद्धार के लिए मसीही धर्मसिद्धान्त की परिभाषा कुछ इस तरह से होगी, "परमेश्‍वर के अनुग्रह के द्वारा, पाप के अनन्तकालीन दण्ड से छुटकारा, एक व्यक्ति को, जो परमेश्‍वर के द्वारा पश्चाताप और प्रभु यीशु में विश्‍वास करने की शर्तों को विश्‍वास के द्वारा स्वीकार करता है, को प्रदान किया जाता है।" उद्धार केवल यीशु में ही उपलब्ध है (यूहन्ना 14:6; प्रेरितों के काम 4:12) और यह अपने संरक्षण, आश्‍वासन और सुरक्षा के लिए केवल परमेश्‍वर के ऊपर ही निर्भर है।



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