क्या आज संसार में शैतानिक गतिविधि पाई जाती हैं?


प्रश्न: क्या आज संसार में शैतानिक गतिविधि पाई जाती हैं?

उत्तर:
भूतों का होना, भूतों के द्वारा पीछा किया जाना, प्रेतों को आह्वान् करना, टैरो कार्ड अर्थात् ताश के पत्ते के द्वारा शुभ सूचना को प्राप्त करना, ओहिजा बोर्ड अर्थात् प्रश्‍न फलक, क्रिस्टल बॉल्स अर्थात् भविष्यफलबटी पारदर्शक पत्थरों की गेंदें इत्यादि — इन सभी में सामान्य बात क्या है? ये बहुत से लोगों को आकर्षित कर रही हैं, क्योंकि ये एक ऐसे अज्ञात् संसार के प्रति अन्तर्दृष्टि प्रदान करती हुई प्रतीत होती हैं, जो हमारे भौतिक अस्तित्व की सीमाओं से परे है। और बहुत से लोगों के लिए ऐसी वस्तुएँ निर्दोष और हानि रहित प्रतीत होती हैं।

बहुत से लोग जो इन वस्तुओं का उपयोग बाइबल आधारित दृष्टिकोण के बिना करते हैं, ऐसा विश्‍वास करते हैं कि भूत अर्थात् दुष्टात्माएँ ऐसे मरे हुए लोगों की आत्माएँ, जो किसी कारण वश, जीवन की "अगली अवस्था" में नहीं पहुँचे हैं। भूतों में विश्‍वास करने वालों के अनुसार, पीछा करने वाले भूत तीन प्रकार के होते हैं : (1) भूतों के द्वारा साए के रूप में पीछा करना (यह किसी भी आत्मा के साथ वास्तविक बातचीत के न होने के साथ वीडियो में पीछे चलने वाली आवाज के सदृश होता है) (2) उन मानवीय आत्माओं के द्वारा पीछा किया जाना, जिनका स्वभाव भले और अशुभ (परन्तु बुरे नहीं) का संयोजन है। ऐसी आत्माएँ केवल एक व्यक्ति के ध्यान को अपनी ओर आकर्षित करना चाहती होंगी, जबकि अन्य शरारती तो हो सकती हैं, परन्तु, दोनों ही प्रकारों में, ये वास्तव में लोगों को नुकसान नहीं पहुँचाती हैं। (3) गैर-मानवीय आत्माओं या दुष्टामाओं के साथ वार्तालाप किया जाना । ये तत्व मानवीय आत्माओं के रूप में सामने आ सकते हैं, परन्तु ये हानिकारक और खतरनाक होते हैं।

जब बाइबल रहित स्रोतों से भूतों और भूतों के द्वारा पीछा किए जाने के बारे में अध्ययन किया जाता है, तो यह स्मरण रखना चाहिए कि क्योंकि एक लेखक बाइबल या बाइबल के पात्रों (जैसे प्रधान स्वर्गदूत मिकाईल) को उद्धृत कर रहा है, इसलिए इसका अर्थ यह नहीं है, वह अपने विषय का अध्ययन बाइबल आधारित दृष्टिकोण से कर रहा है। जब एक लेखक के द्वारा किसी सूचना को बिना किसी प्रमाण के दिया जाता है, तो पाठक को स्वयं से ही पूछना चाहिए, "वह कैसे जानता/जानती है कि यह ऐसे ही होता है? उसके लेख का शास्त्रीय प्रमाण कहाँ है?" उदाहरण के लिए, लेखक कैसे जानता है कि दुष्टात्माएँ मानवीय आत्माओं का स्वरूप धारण करती हैं? अन्त में, बाइबल आधारित शास्त्रीय स्रोतों के बिना इस तरह के विषयों को सम्बोधित करने वाले लेखक अवश्य ही अपने विचारों को अपनी समझ, दूसरों की समझ और/या अतीत के अनुभवों के ऊपर आधारित करते हैं। तथापि, अपने स्वयं की स्वीकृति पर आधारित हो यह कहना कि दुष्टात्माएँ धोखा दे रही हैं और परोपकारी मानव आत्माओं की नकल की जा सकती हैं, अनुभवों को धोखा दे सकता है! यदि एक व्यक्ति इस विषय के ऊपर सही समझ प्राप्त करना चाहता है, तो उसे ऐसे स्रोत के पास चले जाना चाहिए जो स्वयं को अभी तक के समय में 100 प्रतिशत सटीक दिखाया है — जो परमेश्‍वर का वचन अर्थात् बाइबल है। आइए देखें कि बाइबल इन बातों के बारे में क्या कहती है।

1. बाइबल कहीं पर भी भूतों के द्वारा पीछा किए जाने के बारे नहीं बोलती है। इसकी अपेक्षा, यह शिक्षा देती है कि जब एक व्यक्ति मर जाता है, तो उसका आत्मा दो स्थानों में से एक में चला जाता है। यदि एक व्यक्ति ने यीशु मसीह में विश्‍वास किया है, तो उसके आत्मा को स्वर्ग में प्रभु की उपस्थिति में होने का आश्‍वासन दिया गया है (फिलिप्पियों 1:21-23; 2 कुरिन्थियों 5:8)। बाद में, पुनरुत्थान के समय यह उसके शरीर के साथ जा मिलेगा (1 थिस्सलुनीकियों 4:13-18)। यदि एक व्यक्ति मसीह में विश्‍वासी नहीं है, तो उसका आत्मा ऐसे पीड़ादायी स्थान में चला जाएगा जिसे नरक कह कर पुकारा जाता है (लूका 16:23-24)।

चाहे एक व्यक्ति विश्‍वासी है या एक अविश्‍वासी, उसका इस संसार में लोगों के साथ वार्तालाप या मुलाकात करने के लिए बिल्कुल भी वापसी नहीं है, यहाँ तक कि आने वाले न्याय से बचने के लिए लोगों को चेतावनी देने के लिए भी (लूका 16:27-31)। बाइबल में लिपिबद्ध ऐसी दो घटनाएँ पाई जाती हैं, जिनमें मृतक व्यक्ति ने जीवितों के साथ वार्तालाप किया। पहली घटना में इस्राएल के राजा शाऊल ने मरे हुए भविष्यद्वक्ता शमूएल के साथ एक भूतिसिद्धि करने वाली के द्वारा सम्पर्क स्थापित किया था। परमेश्‍वर ने ऐसा होने दिया कि शमूएल शाऊल के द्वारा होने वाली निरन्तर अनाज्ञाकारिता के कारण उसके ऊपर दण्ड की घोषणा करते हुए उसे पर्याप्त मात्र में परेशान रहने दे (1 शमूएल 28:6-19)। दूसरी घटना तब की है, जब मूसा और एलिय्याह ने यीशु से तब वार्तालाप किया जब मत्ती 17:1-8 में उसका रूपान्तरण हुआ था। तथापि, मूसा और एलिय्याह के प्रगटीकरण का "भूतिया" होने जैसी कोई बात नहीं थी।

2. पवित्र शास्त्र निरन्तर स्वर्गदूतों को अदृश्य में कार्य करने के लिए चलते हुए बोलता है (दानिय्येल 10:1-21)। कई बार, इन स्वर्गदूतों ने जीवित लोगों के साथ वार्तालाप किया है। बुरी आत्माएँ, या दुष्टात्माएँ, वास्तव में लोगों को ग्रसित करती हैं, उनके भीतर वास करती हैं और उन्हें अपने नियन्त्रण में रखती हैं (उदाहरण के लिए, मरकुस 5:1-20 को देखें)। चारों सुसमाचार और प्रेरितों के काम की पुस्तक दुष्टात्माओं से ग्रसित हुए लोगों और अच्छे स्वर्गदूतों के द्वारा लोगों की सहायता करने और उनके सामने प्रगट होने की कई घटनाओं को लिपिबद्ध करते हैं। स्वर्गदूत, दोनो ही बुरे और अच्छे, अलौकिक घटनाओं के प्रगट होने के कारण बन सकते हैं (अय्यूब 1–2; प्रकाशितवाक्य 7:1; 8:5; 15:1;16)।

3. पवित्र शास्त्र यह दिखाता है कि दुष्टात्माएँ ऐसी बातों को जानते हैं, जिनसे लोग अनजान हैं (प्रेरितों के काम 16:16-18; लूका 4:41)। क्योंकि ये बुरे स्वर्गदूत एक लम्बे समय से चारों और विद्यमान हैं, इसलिए वे स्वाभाविक रूप से उनकी अपेक्षा अधिक जानते हैं, जिनका जीवन सीमित अवधि का है। क्योंकि शैतान को वर्तमान में परमेश्‍वर की उपस्थिति में जाने का अवसर प्राप्त है (अय्यूब 1–2), इसलिए हो सकता है कि दुष्टात्माओं को भविष्य के बारे में कुछ विशेष बातों को जानने की अनुमति हो, परन्तु यह केवल अनुमान मात्र ही है।

4. पवित्र शास्त्र कहता है कि शैतान झूठ का पिता और धोखे देने वाला है (यूहन्ना 8:44; 2 थिस्सलुनीकियों 2:9) और वह "ज्योति के स्वर्गदूत" के रूप को स्वयं के ऊपर धारण कर लेता है। मानव या कोई भी क्यों न हो, उसका अनुसरण करने वाले, इसी धोखे का पालन करते हैं (2 कुरिन्थियों 11:13-15)।

5. शैतान और दुष्टात्माओं के पास (मनुष्य की तुलना) बहुत अधिक सामर्थ्य होती है। यहाँ तक प्रधान स्वर्गदूत मीकाईल उस समय परमेश्‍वर की सामर्थ्य के ऊपर भरोसा करता है, जब उसे शैतान के साथ निपटना होता है (यहूदा 1:9)। परन्तु शैतान की सामर्थ्य परमेश्‍वर की सामर्थ्य की तुलना में कुछ भी नहीं है (प्रेरितों के काम 19:11-12; मरकुस 5:1-20), और परमेश्‍वर शैतान के बुरे मनोरथों को अपने स्वयं के अच्छे उद्देश्यों को पूर्ण करने के लिए उपयोग करने में सक्षम है (1 कुरिन्थियों 5:5; 2 कुरिन्थियों 12:7)।

6. परमेश्‍वर हमें आदेश देता है कि हमारा भूतसिद्धिवाद या जादू — टोना, शैतान की आराधना, या अशुद्ध आत्माओं से किसी भी तरह का कोई लेन-देन नहीं होना चाहिए। इसमें ओझों से पूछना, प्रेतों का आह्वान् देना, प्रश्‍न फलक, जन्म कुण्डली या जन्म पत्री बनवाना, आत्माओं का आदान प्रदान इत्यादि का उपयोग सम्मिलित है। परमेश्‍वर इस तरह की बातों के अभ्यास को घृणित मानता है (व्यवस्थाविवरण 18:9-12; यशायाह 8:19-20; गलातियों 5:20; प्रकाशितवाक्य 21:8), और जो लोग स्वयं को इन बातों में सम्मिलित करते हैं, वे अपने लिए विपत्ति को निमन्त्रण देते हैं (प्रेरितों के काम 19:13-16)।

7. इफिसियों के विश्‍वासियों ने भूत सिद्धि अर्थात् जादू-टोने सम्बन्धित वस्तुओं (पुस्तकें, गीत, आभूषण, खेल इत्यादि) का निपटारा करने में एक आदर्श को प्रस्तुत किया है। उन्होंने इस तरह की बातों में सम्मिलित होने को पाप के रूप में अंगीकार किया और इन वस्तुओं को जनता में जला दिया (प्रेरितों के काम 19:17-19)।

8. शैतान की सामर्थ्य से छुटकारा परमेश्‍वर के उद्धार के द्वारा ही प्राप्त किया जाता है। उद्धार यीशु मसीह के सुसमाचार में विश्‍वास करने के द्वारा आता है (प्रेरितों के काम 19:18; 26:16-18)। मोक्ष के बिना शैतानिक भागीदारी से स्वयं को पृतक करने के प्रयास व्यर्थ हैं। यीशु ने पवित्र आत्मा की उपस्थिति से वंचित एक हृदय को यह चेतावनी दी है: ऐसा मन केवल एक खाली निवास स्थान है, यहाँ तक कि यह और भी अधिक बुरी दुष्टात्माओं का निवास स्थान बनने के लिए तैयार है (लूका 11:24-26)। परन्तु जब एक व्यक्ति पाप से क्षमा प्राप्ति के लिए मसीह के पास आता है, उस समय पवित्र आत्मा उसके भीतर आकर छुटकारे के दिन तक के लिए उसमें वास करता है (इफिसियों 4:30)।

धोखे से भरे हुए कार्य को कुछ परालौकिक गतिविधि कहा जा सकता है। दुष्टात्माओं के कार्यों को भूतों और भूतों के द्वारा पीछा किए जाने की अन्य उल्लिखित बातों के रूप समझना सर्वोत्तम होगा। कई बार ये दुष्टात्माएँ अपने स्वभाव को छिपाने का कोई प्रयास न करें, और अन्य समयों में हो सकता है कि वे धोखे को उपयोग करते हुए, विखण्डित मानवीय आत्माओं के रूप में प्रगट हो। ऐसे धोखे और अधिक झूठों और उलझनों की ओर ले जाते हैं।

परमेश्‍वर कहता है कि जीवितों की ओर से मृतकों के साथ परामर्श लेना मूर्खता है। इसकी अपेक्षा वह कहता है, "व्यवस्था और चितौनी ही की चर्चा किया करो!" (यशायाह 8:19-20)। परमेश्‍वर का वचन हमारी बुद्धि का स्रोत है। यीशु मसीह के विश्‍वासियों को जादू टोने में सम्मिलित नहीं होना चाहिए। आत्मिक संसार वास्तविक है, परन्तु मसीही विश्‍वासियों को इससे डरने की कोई आवश्यकता नहीं है (1 यूहन्ना 4:4)।

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