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प्रश्न

मृत सागर कुण्डल पत्र क्या हैं और वे क्यों महत्वपूर्ण हैं?

उत्तर


मृत सागर कुण्डल पत्रों की खोज सबसे पहले 1947 में कुमरान नामक स्थान में हुई, जो कि मृत सागर के उत्तर-पश्‍चिम तट पर यरूशलेम के पूर्व में लगभग 20 मील की दूरी पर स्थित एक गाँव था। बदाऊँ जाति का एक जवान चरवाहा, एक खोई हुई बकरी की खोज में भटकते हुए, समुद्र चट्टानों पर स्थित एक गुफा में एक चट्टान से जा टकराया और टकराने से उसने एक टूटती हुई आवाज को सुना: चट्टान चमड़े और पपीरस कुण्डल पत्रों य पटेरपत्रों वाले एक सिरेमिक मिट्टी के बने बर्तन से जा टकराई थी, जिसे बाद में लगभग बीस शताब्दियों पुराना होना निर्धारित किया गया। एक दशक और उसके बाद की कई खोजों में, मृत सागर के चारों ओर ग्यारह गुफाओं में तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व 68 ईस्वी सन् तिथि तक के और अनुमानित आठ सौ भिन्न कार्यों का प्रतिनिधित्व करते हुए हजारों कुण्डल पत्रों के टुकड़े पाए गए।

मृत सागर कुण्डल पत्र इब्रानी, अरामी और यूनानी भाषा में लिखे गए यहूदी दस्तावेजों का विशाल संग्रह है, और इसमें कई विषय और साहित्यिक शैलियाँ सम्मिलित हैं। इनमें एस्तेर की पुस्तक को छोड़कर इब्रानी बाइबल में पाई जाने वाली प्रत्येक पुस्तक की पाण्डुलिपियाँ या टुकड़े सम्मिलित हैं, उनमें से सभी को पहले से ही ज्ञात् बाइबल की पाण्डुलिपियों की तुलना में लगभग एक हजार वर्षों पहले बनाया गया था। कुण्डल पत्रों में सबसे पुरानी बाइबल आधारित टीका हबक्कूक की पुस्तक और कई अन्य लेखों के ऊपर लिखी हुईं टीकाएँ सम्मिलित हैं, जो उस समय के यहूदी सम्प्रदायों के धार्मिक गतिविधियों से सम्बन्धित हैं।

मृत सागर कुण्डल पत्रों में जो कुछ भी सम्मलित था, उसकी किंवदन्तियीण वास्तव में वास्तविकता से कहीं अधिक थीं। बाइबल या अन्य साहित्य की कोई भी खोई हुई पुस्तकें वहाँ नहीं मिली थीं, जिन कि पहले से ही अन्य प्रतियाँ अस्तित्व में न हो। मृत सागर कुण्डल पत्र का विशाल बहुमत 250-150 ईसा पूर्व के पुराने नियम की पुस्तकों की प्रतियाँ मात्र थे। अतिरिक्त बाइबल और अपोक्रिफा अर्थात् बाइबल की अप्रमाणिक पुस्तकें भी पाई गई हैं, परन्तु तौभी, कुण्डल पत्रों का विशाल बहुमत इब्रानी पुराने नियम की प्रतियाँ से ही सम्बन्धित था। मृत सागर कुण्डल पत्रों की अद्भुत खोज यह थी कि कुण्डल पत्र अपनी उत्कृष्ट अवस्था में थे और इतने लम्बे समय (2,000 वर्षों से अधिक) तक छिपे रहे थे। मृत सागर कुण्डल पत्र हमें पुराने नियम की पाण्डुलिपियों के प्रति और अधिक विश्‍वसनीयता प्रदान करते हैं, क्योंकि इसका उन पाण्डुलिपियों के साथ न्यूनतम मतभेद था, जो कि पहली खोजी गई थी और जो कुमरान में पाई गई थीं। स्पष्ट है कि यह एक प्रमाण है कि जिसे परमेश्‍वर ने अभी तक की शताब्दियों में अपने वचन को सुरक्षित रखने, इसे विलुप्त होने से बचाने और महत्वपूर्ण त्रुटि के विरूद्ध इसकी रक्षा करने के लिए उपयोग किया है।

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