क्या साइबर-सेक्स/फोन सेक्स पाप है?


प्रश्न: क्या साइबर-सेक्स/फोन सेक्स पाप है?

उत्तर:
बाइबल कहीं भी साइबर-सेक्स (इन्टरनेट सेक्स) या फोन सेक्स का उल्लेख नहीं करती है, क्योंकि "साइबर- जैसा कुछ भी" और "फोन- जैसा कुछ भी" बाइबल के समयों में सम्भव नहीं था। इस प्रश्‍न का उत्तर कुछ सीमा तक इस बात के ऊपर निर्भर करता है कि क्या इसमें सम्मिलित लोग एक-दूसरे से विवाहित हैं। विवाह के भीतर, साइबर-सेक्स/फोन सेक्स 1 कुरिन्थियों 7:5 के "आपसी सहमति" सिद्धान्त के अधीन आ जाएगा। अधिक जानकारी के लिए, कृपया विवाह में यौन सम्बन्धों किस तरह की सहमति की अनुमति है, के बारे में हमारे लेख को देखें।

विवाह से बाहर, परमेश्‍वर का वचन हमें कुछ ऐसे सिद्धान्त देता है, जो निश्‍चित रूप से साइबर-सेक्स/फोन सेक्स के ऊपर लागू होते हैं। फिलिप्पियों 4:8 हमें बताता है, "इसलिये हे भाइयो, जो जो बातें सत्य हैं, और जो जो बातें आदरणीय हैं, और जो जो बातें उचित हैं, और जो जो बातें पवित्र हैं, और जो जो बातें सुहावनी हैं, और जो जो बातें मनभावनी हैं — अर्थात् जो भी सद्गुण और प्रशंसा की बातें हैं — उन पर ध्यान लगाया करो।" इसके अतिरिक्त, पवित्रशास्त्र के कई वचन ऐसे हैं, जो इंगित करते हैं कि विवाह के बाहर सेक्स या यौन सम्बन्ध रखना पाप है (प्रेरितों के काम 15:20; 1 कुरिन्थियों 5:1; 6:13,18; 7:2; 10:8; 2 कुरिन्थियों 12:21; गलातियों 5:1 9; इफिसियों 5:3; कुलुस्सियों 3:5; 1 थिस्सलुनीकियों 4:3; यहूदा 7)। यीशु ने स्वयं हमें शिक्षा दी है कि पाप से भरी हुई बातों की इच्छा रखना भी पाप है: "तुम सुन चुके हो कि कहा गया था, 'व्यभिचार न करना।' परन्तु मैं तुम से यह कहता हूँ, कि जो कोई किसी स्त्री पर कुदृष्‍टि डाले वह अपने मन में उस से व्यभिचार कर चुका" (मत्ती 5:27-28)। नीतिवचन 23:7 कहता है, "क्योंकि जैसा वह अपने मन में विचार करता है, वैसा वह आप है।"

संक्षेप में, साइबर-सेक्स और फोन सेक्स, कुछ ऐसी बातों की चाह हैं, जो पापी (अविवाहित यौन सम्पर्क या विवाहित यौन सम्पर्क अर्थात् व्यभिचार) है। साइबर-सेक्स और फोन सेक्स उन बातों के प्रति कल्पना करना है, जो अनैतिक और अशुद्ध हैं। किसी भी अर्थ में साइबर-सेक्स या फोन सेक्स को उच्च, सही, शुद्ध, प्यारा, प्रशंसनीय, उत्कृष्ट, या प्रशंसा के योग्य नहीं माना जा सकता है। साइबर-सेक्स और फोन सेक्स आभासी व्यभिचार हैं। ये एक व्यक्ति के बारे में कल्पना और किसी दूसरे व्यक्ति को अनैतिक वासना के प्रति प्रोत्साहित करना है। ये एक व्यक्ति को "निरन्तर बढ़ते हुई दुष्टता" के जाल की ओर ले जाते हैं (रोमियों 6:19)। एक पुरूष/स्त्री, जो अपने हृदय और इच्छाओं में अनैतिक है, वह अन्ततः अपने कार्यों में भी अनैतिक हो जाएगा/जाएगी। जी हाँ, विवाह से बाहर, साइबर-सेक्स और फोन सेक्स पाप हैं।

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क्या साइबर-सेक्स/फोन सेक्स पाप है?