क्रिसलाम क्या है?



प्रश्न: क्रिसलाम क्या है?

उत्तर:
क्रिसलाम इस्लाम के साथ मसीही विश्‍वास को मिश्रण करने का एक प्रयास है। यह 1980 के दशक में नाइजीरिया में आरम्भ हुआ था, और क्रिसलाम के विचार पूरे विश्‍व में फैल गए हैं। क्रिसलाम की अनिवार्य अवधारणा यह है कि मसीही विश्‍वास और इस्लाम एक दूसरे के पूरक हैं, यह कि एक ही समय में एक व्यक्ति एक मसीही विश्‍वासी और एक मुस्लिम दोनों ही हो सकता है। क्रिसिलाम स्वयं में एक वास्तविक धर्म नहीं है, अपितु यह मसीही विश्‍वास और इस्लाम के मध्य में भिन्नताओं और विशेषताओं को धुँधला कर देना है।

क्रिसलाम की वकालत करने वाले इन तथ्यों की ओर इंगित करते हैं, जैसे मसीह को कुरान में 25 बार उल्लेखित किया गया है, या मसीही विश्‍वास और इस्लाम में नैतिकता और शिष्टाचार के ऊपर एक जैसी ही शिक्षाएँ पाई जाती हैं, या नास्तिकता और वैकल्पिक आध्यात्मिकता के उदय होने के विरूद्ध लड़ने के लिए एकजुट होने के लिए दो सबसे बड़े एकेश्‍वरवादी धर्मों को एक होने आवश्यकता है। क्रिसलाम को कुछ लोगों के द्वारा पश्चिमी संसार, जो कि मुख्य रूप से मसीही विश्‍वासी बहुल और मध्य पूर्व, जो मुख्य रूप से मुस्लिम बहुल है, के मध्य चल रहे संघर्ष के समाधान के रूप में देखा जाता है ।

यद्यपि, इस बात से इन्कार नहीं जा सकता है कि मसीही विश्‍वास और इस्लाम (और यहूदी धर्म) के मध्य में कई समानताएँ पाई जाती हैं, क्रिसलाम अन्ततः विफल हो जाता है, क्योंकि मसीही विश्‍वास और इस्लाम दोनों ही सबसे महत्वपूर्ण विषयों में एक — यीशु मसीह की पहचान के ऊपर एक दूसरे के पुरजोर विरोध हैं। सच्ची मसीहियत ने यीशु को मानवीय रूप में देहधारी होने की घोषणा की है। मसीही विश्‍वासियों के लिए मसीह का ईश्‍वरत्व समझौता-हीन विषय है, क्योंकि उसके ईश्‍वरत्व के बिना क्रूस पर यीशु की मृत्यु पूरे संसार के पापों के प्रायश्चित्त के लिए दिए जाने वाले बलिदान के लिए पर्याप्त नहीं होगी(1 यूहन्ना 2: 2)।

इस्लाम दृढ़तापूर्वक मसीह के ईश्‍वरत्व का खण्डन कर देता है। कुरान घोषित करती है कि यीशु परमेश्‍वर है, का विचार ही ईशनिन्दा है (5:17)। मसीह के ईश्‍वरत्व में विश्‍वास मुसलमानों की ओर से शिर्क "गंदी सोच" कहा जाता है। इसके अतिरिक्त, इस्लाम क्रूस पर हुई मसीह की मृत्यु का इनकार करता है (4:157-158)। मसीही विश्‍वास के सबसे महत्वपूर्ण धर्मसिद्धान्त को इस्लाम में खण्डन कर दिया गया है। परिणामस्वरूप, दोनों धर्म पूरी तरह से एक दूसरे के पूरक नहीं हैं, क्रिसलाम एक अवधारणा के रूप में दोनों मसीही विश्‍वासियों और मुसलमानों के द्वारा अस्वीकृत किया जाना चाहिए।

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