हम नकली आश्‍चर्यकर्मों को कैसे समझ सकते हैं?


प्रश्न: हम नकली आश्‍चर्यकर्मों को कैसे समझ सकते हैं?

उत्तर:
मत्ती 24:24 में, यीशु ने चेतावनी दी है कि, "क्योंकि झूठे मसीह और झूठे भविष्यद्वक्‍ता उठ खड़े होंगे, और बड़े चिह्न, और अद्भुत काम दिखाएँगे - कि यदि हो सके तो चुने हुओं को भी भरमा दें।" इसी तरह, 2 थिस्सलुनीकियों 2:9 में कहा गया है कि: "उस अधर्मी का आना शैतान के कार्य के अनुसार सब प्रकार की झूठी सामर्थ्य, और चिह्न, और अद्भुत काम के साथ।”

जब परमेश्‍वर ने मूसा को मिस्र की गुलामी से इस्राएल को छुटकारा देने के लिए भेजा, तो उसने मूसा के माध्यम से यह प्रमाणित करने के लिए आश्‍चर्यजनक चिन्ह दिए कि मूसा वास्तव में एक सन्देशवाहक था। यद्यपि, निर्गमन 7:22 कहता है कि, “तब मिस्र के जादूगरों ने भी अपने तंत्र-मंत्रों से वैसा ही किया; तौभी फ़िरौन का मन हठीला हो गया, और यहोवा के कहने के अनुसार उसने मूसा और हारून की न मानी… ”(निर्गमन 7:11 और 8:7 को भी देखें)। बाद में परमेश्‍वर ने जादूगरों, या अधिक सटीकता के साथ कहना दुष्टात्माओं के ऊपर आश्‍चर्यकर्मों करके अपनी श्रेष्ठता का प्रदर्शन किया, जो जादूगरों को सशक्त कर रही थीं, जिसे वे दोहराने में सक्षम नहीं थे (निर्गमन 8:18; 9:11)। परन्तु सच्चाई तो यह है कि फिरौन के जादूगर आश्‍चर्यकर्मों को करने में सक्षम थे। इसलिए, यदि आश्‍चर्यकर्म परमेश्‍वर या दुष्टात्मा संसार की ओर हो सकते हैं, तो हम अन्तर को कैसे समझेंगे?

नकली आश्‍चर्यकर्मों को पहचानने के बारे में बाइबल कोई विशेष निर्देश नहीं देती है। यद्यपि, बाइबल यह बताती है कि नकली सन्देशवाहकों को कैसे पहचाना जाए, और इसके विषय में विशेष निर्देश दिए गए हैं। "उनके फलों से तुम उन्हें पहचान लोगे" (मत्ती 7:16, 20)। पहला यूहन्ना 4:2-6 इस पर विस्तृत विचार प्रस्तुत करता है, “यह परमेश्‍वर का आत्मा तुम इस रीति से पहचान सकते हो : जो आत्मा मान लेती है कि यीशु मसीह शरीर में होकर आया है वह परमेश्‍वर की ओर से है, और जो आत्मा यीशु को नहीं मानती, वह परमेश्‍वर की ओर से नहीं; और वही तो मसीह के विरोधी की आत्मा है... वे संसार के हैं, इस कारण वे संसार की बातें बोलते हैं, और संसार उनकी सुनता है। हम परमेश्‍वर के हैं। जो परमेश्‍वर को जानता है, वह हमारी सुनता है; जो परमेश्‍वर को नहीं जानता वह हमारी नहीं सुनता। इस प्रकार हम सत्य की आत्मा और भ्रम की आत्मा को पहचान लेते हैं।”

ये दो सन्दर्भ एक झूठे शिक्षक को पहचानने के लिए दो तरीके प्रस्तुत करते हैं। सबसे पहले, उसके फल की जाँच करें। क्या वह मसीह जैसे चरित्र को प्रदर्शित करता/करती है, जो परमेश्‍वर के एक सन्देशवाहक की योग्यता होती है (1 तीमुथियुस 3:1-13)? दूसरा, उसकी शिक्षा की जाँच करें। वह परमेश्‍वर के वचन के साथ किन बातों में सहमत है (2 तीमुथियुस 2:15; 3:16-17; 4:2; इब्रानियों 4:12)। यदि शिक्षक इन जाँचों में विफल रहता/रहती है, तो वह परमेश्‍वर की ओर से नहीं है। यह बात कोई अर्थ नहीं रखती है कि उसने कितने अधिक आश्‍चर्यकर्मों को प्रस्तुत किया है। यदि कोई व्यक्ति सत्य पर नहीं चलता है या सत्य नहीं सिखाता है, तो हम उसके द्वारा प्रगट किए गए किसी भी आश्‍चर्यकर्म को मूल्यहीन समझ सकते हैं। एक झूठे शिक्षक के द्वारा किए गए आश्‍चर्यकर्म परमेश्‍वर की ओर से नहीं होते हैं।

नए नियम में, प्रेरितों और उनके निकट सहयोगियों द्वारा आश्‍चर्यकर्मों को विशेष रूप से प्रगट किया गया था। प्रेरितों के द्वारा दिए गए सुसमाचार के सन्देश और प्रेरितों की सेवकाई को वैध ठहराने के इन्हें प्रगट किया जाता था (प्रेरितों 2:43; 5:12; 2 कुरिन्थियों 12:12; इब्रानियों 2:4)। जबकि हमें कभी भी आश्‍चर्यकर्मों करने की परमेश्‍वर की क्षमता पर सन्देह नहीं करना चाहिए, आश्‍चर्यकर्मों को करने के लिए बाइबल के उद्देश्य से हमें तुलना करते हुए आधुनिक-समय में होने वाले आश्‍चर्यकर्मों की रिपोर्ट के बारे में सन्देह करना चाहिए। यद्यपि ऐसा कहना बाइबल आधारित नहीं है कि परमेश्‍वर कभी आश्‍चर्यकर्मों नहीं करता है, बाइबल स्पष्ट है कि हम सत्य की खोज में हैं, आश्‍चर्यकर्मों की नहीं (मत्ती 12:39)।

यह एक रूचिपूर्ण पहेली है कि बाइबल में आश्‍चर्यकर्मों ने सन्देशवाहकों को वैध ठहराया, और तौभी आज, आश्‍चर्यकर्म आवश्यक रूप से परमेश्‍वर के सच्चे सन्देशवाहक के लिए एक संकेतक नहीं हैं। अन्तर परमेश्‍वर का वचन है। आज हमारे पास पवित्रशास्त्र की पूरी प्रमाणित पुस्तकें हैं, और यह एक अचूक मार्गदर्शक है। हमारे पास निश्‍चित वचन है (2 पतरस 1:19) हम इस बात को समझने के लिए उपयोग कर सकते हैं कि क्या कोई सन्देशवाहक और कोई सन्देश परमेश्‍वर की ओर से है या नहीं। आश्‍चर्यकर्म नकली भी हो सकते हैं। इसलिए परमेश्‍वर हमें अपने वचन की ओर इंगित करता है। चिन्ह और आश्‍चर्यकर्म हमें भटका सकते हैं। परमेश्‍वर का वचन सदैव हमें सही पथ पर ले चलेगा (भजन संहिता 119:105)।

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