कलीसिया स्थापना या रोपण क्या है?



प्रश्न: कलीसिया स्थापना या रोपण क्या है?

उत्तर:
कलीसिया स्थापना एक नए स्थान पर विश्‍वासियों के एक संगठित देह की स्थापना करना है। कलीसिया की स्थापना की प्रक्रिया में सुसमाचार प्रचार, नए विश्‍वासियों को शिष्यता शिक्षण, कलीसिया के अगुवों को प्रशिक्षण, और नए नियम के नमूने के अनुसार कलीसिया संगठन की रचना इत्यादि करना सम्मिलित है। अक्सर, इस प्रक्रिया में कलीसिया के घोषणा पत्र और/या धर्मसिद्धान्तिक कथनों का लिखा जाना और सभा चलाने के लिए भूमि को खरीदने के लिए खोज करना और नए भवन के निर्माण इत्यादि को करना सम्मिलित होता है।

"मिशन" के विस्तृत कार्य के भीतर कलीसिया स्थापना विशेष केन्द्र में होती है। कलीसिया की स्थापना करने वाले मिशनरी होते हैं, जो परमेश्‍वर के वचन के प्रचार और शिक्षण के अपने प्रयासों के ऊपर ध्यान केन्द्रित करते हैं। अन्य मिशनरी जो निश्चित कौशल में विशेषज्ञ होते हैं, को अधिकारिक रूप से "कलीसिया के संस्थापक" नहीं माना जा सकता है, परन्तु वे उन लोगों के लिए मूल्यवान सेवा प्रदान करते हैं, जो मिशनरी होते हैं। इस तरह के सहायक मिश्नरियों में रेडियो से प्रचार करने वाले, विमानवाहक सहायक, पुस्तक छपाई करने वाले, बाइबल के अनुवादक, और चिकित्सा कर्मचारी सम्मिलित हैं।

अधिकांश कलीसिया संस्थापकों का अन्तिम लक्ष्य एक समुदाय में प्रभु की महिमा एक स्व-शासित, स्वयं से-प्रचार करने वाली विश्‍वासियों की देह की स्थापना करना होता है। एक बार जब इस लक्ष्य की प्राप्ति हो जाती है और कलीसिया स्वयं के पैरों के ऊपर खड़ी होने के योग्य हो जाती है, कलीसिया स्थापना करने वाला अक्सर दूसरे समाज की ओर चला जाता है और पुन: प्रक्रिया को आरम्भ करता है।

कलीसिया-की-स्थापना बाइबल आधारित है। जैसे प्रेरित पौलुस किसी एक क्षेत्र से भ्रमण करता हुआ जाता था, वैसे ही वह अपने अधिकाधिक समय को विश्‍वासियों की स्थानीय देह की स्थापना और अगुवों को प्रशिक्षण देने में व्यतीत करता था (प्रेरितों के काम 14:21-23)। तत्पश्चात्, वह उन कलीसियाओं को विश्‍वास में दृढ़ करने और उत्साहित करने के लिए पुन: मुलाकात करने के लिए आने का प्रयास करता था (प्रेरितों के काम 15:41; 1 थिस्सलुनीकियों 3:2)। जिन कलीसियाओं की उसने स्थापना की, तब स्वयं से मिशनरियों को भेजा करती थी, और इस तरह से कलीसिया की स्थापना अर्थात् रोपण का कार्य निरन्तर आगे बढ़ता रहता था (1 थिस्सलुनीकियों 1:8)।

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