बाइबल क्या किसी व्यक्ति को स्वर्ग जाने के लिए चर्च में जाना पड़ता है?


प्रश्न: बाइबल क्या किसी व्यक्ति को स्वर्ग जाने के लिए चर्च में जाना पड़ता है?

उत्तर:
उद्धार मसीह में मिलता है। "क्योंकि परमेश्‍वर ने जगत से ऐसा प्रेम रखा कि उसने अपना एकलौता पुत्र दे दिया, ताकि जो कोई उस पर विश्‍वास करे वह नष्‍ट न हो, परन्तु अनन्त जीवन पाए" (यूहन्ना 3:16)। परमेश्‍वर ने अपने पुत्र को दिया ताकि हम अनन्त जीवन को प्राप्त कर सकें, इस प्रकार स्वर्ग में जाने के लिए चर्च अर्थात् गिरजाघर या कलीसिया में जाने सहित अच्छे कामों को करने की हमारी आवश्यकताओं को नष्ट कर सकते हैं। केवल मसीह में ही विश्‍वास करने से अनन्त जीवन प्राप्त होता है। "जिसके पास पुत्र है, उसके पास जीवन है; और जिसके पास परमेश्‍वर का पुत्र नहीं, उसके पास जीवन भी नहीं है"(1 यूहन्ना 5:12)। जो लोग मसीह में विश्‍वास करते हैं, जिन्होंने अपने पापों के दण्ड की अदायगी के रूप में उनके बलिदान को स्वीकार किया है, वे स्वर्ग में अनन्त कालीन जीवन को व्यतीत करेंगे। जो लोग उसे अस्वीकार करेंगे वे नहीं करेंगे।

कलीसिया में उपस्थिति की कोई भी मात्रा स्वर्ग में अनन्त काल को नहीं कमा सकती है। कलीसिया में उपस्थिति की कमी के कारण उद्धार की कमी के परिणाम को नहीं लाएगी। यद्यपि, कलीसिया में उपस्थिति महत्वपूर्ण है। विश्‍वव्यापी कलीसिया, उन सभों से जो मसीह में परमेश्‍वर पिता की महिमा के लिए विश्‍वास करते हैं, मिलकर बनी है, मसीह की देह (कुलुस्सियों 1:18) के साथ-साथ उसकी दुल्हन भी है (प्रकाशितवाक्य 21:2)। कलीसिया मसीही संगति का एक स्थान है। इसके अतिरिक्त, मसीह की देह के सदस्यों के रूप में, हमें आत्मा के निश्‍चित वरदान भी दिए गए हैं और हम उन वरदानों का प्रयोग परमेश्‍वर की महिमा और शेष शरीर की उन्नति के लिए करते हैं। क्योंकि एक कलीसियाई देह को सही रीति से काम करने के लिए आवश्यक है कि "देह के सभी अंगों" को उपस्थित होने की आवश्यकता है (1 कुरिन्थियों 12:14-20)।

मसीही विश्‍वासियों को मसीह में "नई सृष्टि" बनाया गया है (2 कुरिन्थियों 5:17) और कलीसिया में जाने की इच्छा इसलिए होती है, क्योंकि नई सृष्टि मानती है कि ऐसा करना उसके आत्मिक विकास और परिपक्वता के लिए महत्वपूर्ण है। कलीसिया में उपस्थिति की ओर अनिच्छा होने से आत्मिक विकास में कमी का आना या "संगठित धर्म" के साथ भ्रम के होने का संकेत हो सकता है। आज वास्तव में झूठी चर्च अर्थात् कलीसिया पाई जाती हैं और कोई चर्च सिद्ध नहीं है, परन्तु अधिकांश समुदायों में विश्‍वासियों के स्थानीय देह होती हैं। सच्ची, विश्‍वव्यापी कलीसिया मण्डलियों में बँटी हुई होती है, जिनके सिद्धान्त-पवित्रशास्त्र आधारित होते हैं, जो सभी बातों में मसीह का आदर करती है, जो एक साथ परमेश्‍वर की आराधना करती है और जो एक-दूसरे की सेवा करती है। यद्यपि, कलीसिया की उपस्थिति अनन्तकालीन जीवन की गारन्टी नहीं देगी, तौभी एक अच्छी स्थानीय कलीसिया को खोजना मसीही विश्‍वासियों के लिए महत्वपूर्ण है।

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