कलीसिया के एक परिवार के जैसे होने का क्या महत्व है?


प्रश्न: कलीसिया के एक परिवार के जैसे होने का क्या महत्व है?

उत्तर:
अन्य विश्‍वासियों के लिए परिवार के जैसे बनने के लिए मूल्य क्या है? प्रेरितों के काम 2:42 को कलीसियाई सर्वोत्कृष्ट गतिविधि के लिए मूल कथन माना जा सकता है: "और वे प्रेरितों से शिक्षा पाने, और संगति रखने, और रोटी तोड़ने, और प्रार्थना करने में लौलीन रहे।" इन कारणों से बाइबल कलीसियाई पारिवारिक इकाई पर महत्व को प्रस्तुत करती है:

हम ए क साथ मिलकर परमेश्‍वर के वचन का अध्ययन क रते हैं — कलीसियाई परिवार निरन्तर बाइबल की शिक्षा प्रदान करता है। यह अक्सर छोटे समूहों, बाइबल अध्ययन, पास्टर से शिक्षा प्राप्त करना, सन्डे स्कूल से शिक्षा प्राप्त करना और इसी जैसे अन्य बातों से आती है। कलीसियाई परिवार को आत्मिक रूप से एक साथ बढ़ने के लिए बुलाया जाता है, एक दूसरे के साथ आगे बढ़ने के लिए बुलाया जाता है। दूसरा तीमुथियुस 3:16 कहता है कि, "सम्पूर्ण पवित्रशास्त्र परमेश्‍वर की प्रेरणा से रचा गया है और उपदेश और समझाने और सुधारने और धार्मिकता की शिक्षा के लिए लाभदायक है।"

हम एक साथ मिलकर परमेश्‍वर की आराधना करते हैं — यह एक ऐसी एकता में ले आने वाला तथ्य है कि जब विश्‍वासी परमेश्‍वर की आराधना इकट्ठे मिलकर करते हैं, चाहे यह संगीत के द्वारा हो या फिर प्रचार करने या सेवा करने के द्वारा ही क्यों न हो। भजन संहिता 34:3 सामूहिक आराधना को किए जाने की बुलाहट देता है: "मेरे साथ यहोवा की बड़ाई करो और आओ हम मिलकर उसके नाम की स्तुति करें।"

हमें जवाबदेही मिलती है — कलीसिया उत्तरदायित्व के लिए एक व्यावहारिक रूपरेखा को प्रदान करती है। एक बार सम्बन्ध बढ़ने और मित्र बनने के पश्‍चात्, आपको प्रोत्साहित करने के लिए कोई न कोई होना चाहिए, कि जब आवश्यक हो तो आपको ताड़ना दे और आवश्यक हो तो आपके साथ आनन्द मनाएँ । नीतिवचन 27:17 कहता है कि, "जैसे लोहा लोहे को चमका देता है, वैसे ही मनुष्य का मुख अपने मित्र की संगति से चमकदार हो जाता है।" पाप से निपटने के लिए लड़ाई में जवाबदेही अत्यन्त महत्वपूर्ण है और कलीसियाई परिवार किसी के साथ प्रार्थना करने, बात करने और विश्‍वास करने के लिए एक सबसे उत्तम स्थान है।

हमें परीक्षा में समर्थन मिलता है — जब परीक्षाएँ आती हैं, तो एक समर्थन प्रद्धति अत्यन्त महत्वपूर्ण हो जाती है। जब आवश्यकता पड़े, तो आप चाहते हैं कि मसीह में आपके भाइयों और बहनों के द्वारा आपको प्रार्थना में उठाए रखा जाए और भोजन, सफाई और शिशु को दी जाने वाली देखभाल जैसी व्यावहारिक आवश्यकताओं में सहायता करे। गलतियों 6:2 हमें "एक दूसरे का भार उठाओ और इस प्रकार मसीह की व्यवस्था को पूरी करो।"

हमें सेवा करने के अवसर मिलते हैं — हमें न केवल कलीसिया में समर्थन प्राप्त होता है; हम उसे समर्थन वापस भी देते हैं। कलीसिया में आपकी बुलाहट केवल प्राप्त करने के लिए ही नहीं है, अपितु उसे योगदान देने की भी है। जब हम अन्य विश्‍वासियों के साथ घनिष्ठ संगति में होते हैं, तो हम जानते हैं कि उन्हें कब समर्थन और प्रार्थना की आवश्यकता होती है। हम व्यावहारिक तरीकों से कदम उठा सकते हैं और सहायता कर सकते हैं। इफिसियों 6:7 कहता है, "और उस सेवा को मनुष्यों की नहीं परन्तु प्रभु की जानकर सच्‍चे हृदय से करो।"

हम शिष्य बनाते हैं — ऐसा समय आता है जब हम बस केवल स्वयं खाते रहने के स्थान पर भोजन खिलाने के लिए सीखने की आवश्यकता को पाते है, (इब्रानियों 5:12)। हम अपने कलीसियाई परिवार को सुसमाचार देने, शिक्षा देने, उत्साहित करने और उन्हें "शिष्य" बना सकते हैं। यीशु ने उनके पास आकर कहा, "स्वर्ग और पृथ्वी का सारा अधिकार मुझे दिया गया है। इसलिये तुम जाओ, सब जातियों के लोगों को चेला बनाओ; और उन्हें पिता, और पुत्र, और पवित्र आत्मा के नाम से बपतिस्मा दो, और उन्हें सब बातें जो मैं ने तुम्हें आज्ञा दी है, मानना सिखाओ : और देखो, मैं जगत के अन्त तक सदा तुम्हारे संग हूँ" (मत्ती 28:18–20)।

ऐसे समय में जब संस्कृति तेजी से धर्मनिरपेक्ष हो रही है, तब समान-विचारधारा वाले विश्‍वासियों के परिवार में होना लाभदायी है। ये भाई और बहन आपको अपनी विश्‍वास की यात्रा में प्रोत्साहित कर सकते हैं, आत्मिक विषयों के बारे में अपने प्रश्नों के उत्तर दे सकते हैं और कठिनाई के समय में समर्थन कर सकते हैं। कलीसियाई परिवार आपको दूसरों की सेवा करने और शिष्य बनाने का अवसर भी दे सकता है। "और एक दूसरे के साथ इकट्ठा होना न छोड़ें, जैसे कि कितनों की रीति है, पर एक दूसरे को समझाते रहें; और ज्यों ज्यों उस दिन को निकट आते देखो त्यों-त्यों और भी अधिक यह किया करो" (इब्रानियों 10:25)।

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