सर्वशक्तिमान परमेश्‍वर की कलीसिया क्या है?


प्रश्न: राशिफल का उद्देश्य किसी व्यक्ति के चरित्र और भविष्य की भविष्यवाणी में?

उत्तर:
चर्च ऑफ ऑलमाईटी गॉड अर्थात् सर्वशक्तिमान परमेश्‍वर की कलीसिया (चीनी भाषा में कुआनेनेंग्शेन) एक गुप्त, धर्मसैद्धान्तिक रूप से पथ भ्रष्ट धार्मिक आन्दोलन है, जो 1991 में चीन में आरम्भ हुआ था। यद्यपि, चीनी की कम्यूनिस्ट पार्टी के द्वारा इसे सरकार विरोधी विचारधारा के कारण, प्रतिबन्धित कर दिया है, परन्तु, तौभी यह बढ़ता ही जा रहा है और यह एक प्रभावशाली प्रलय के दिन वाला सम्प्रदाय माना जाता है।

सर्वशक्तिमान परमेश्‍वर की कलीसिया को पूर्व की बिजली के नाम से भी जाना जाता है, जो मत्ती 24:27 के ऊपर आधारित एक नाम है: "क्योंकि जैसे बिजली पूर्व से निकलकर पश्चिम तक चमकती है, वैसे ही मनुष्य के पुत्र का भी आना होगा।" इस समूह की मान्यता है कि परमेश्‍वर ने एक बार फिर से देहधारण किया है, इस बार वह यांग जियांगबिन नाम की एक चीनी महिला के रूप में है, जो स्वयं को "लाइटनिंग डेंग" भी कहती है। यांग ईर्स्टन लाइटनिंग अर्थात् पूर्वी बिजली का नाममात्र प्रधान है, परन्तु इसका वास्तविक अगुवा कदाचित् उसका "महायाजक" और प्रेमी, ज़ाओ वेईशन है, यह वह व्यक्ति है जिसने पहली बार घोषणा की थी कि यांग को ईश्‍वरत्व प्राप्त थी।

2000 में, ज़ाओ वेईशन और यांग जियांगबिन संयुक्त राज्य अमेरिका चले गए, और वर्तमान में वे न्यूयॉर्क शहर के सर्वशक्तिमान परमेश्‍वर की कलीसिया के संचालन की देखरेख करते हैं। यांग जियांगबिन को उस मान्यता में "अन्तिम दिनों का मसीह" और "सर्वशक्तिमान परमेश्‍वर" कहा जाता है, जिस में कि यह माना जाता है कि वह परमेश्‍वर के कार्य को पूरा करने के लिए मसीह का दूसरा आगमन है। यांग उन कथनों को देती है जिन्हें अन्तिम दिनों के लिए दिए गए परमेश्‍वर के वचन के रूप में लिपिबद्ध किया जाता है। (यद्यपि यांग को परमेश्‍वर के देहधारण के रूप में देखा जाता है, तथापि उसे यीशु मसीह से भिन्न माना जाता है, जो परमेश्‍वर का एक भिन्न देहधारण था।) बाइबल को अतीत में हुए परमेश्‍वर के कार्य का एक अप्रचलित लिपिबद्ध वृतान्त माना जाता है। "यह परमेश्‍वर के कार्य के लिपिबद्ध ऐतिहासिक वृतान्त से अधिक कुछ नहीं है, और परमेश्‍वर के कार्य के पिछले दो चरणों के लिए एक प्रमाण पत्र है, और आपको परमेश्‍वर के कार्य के उद्देश्य की कोई समझ नहीं देती है" (ईर्स्टन लाइटनिंग अर्थात् पूर्वी बिजली की आधिकारिक वेबसाइट से)। इस प्रकार, बाइबल अपर्याप्त है और इसलिए सर्वशक्तिमान परमेश्‍वर या "अन्तिम दिनों के मसीह" के द्वारा उच्चारित कथनों के द्वारा पूरा किया जाना चाहिए।

यह समूह शिक्षा देता है कि पुराने नियम में परमेश्‍वर को यहोवा के नाम से जाना जाता था। नए नियम के युग में, परमेश्‍वर को यीशु मसीह के रूप में जाना जाता था। अब, अन्तिम दिनों में, वह सर्वशक्तिमान परमेश्‍वर के रूप में जाना जाता है। महिला मसीह के माध्यम से उसका कार्य, प्रेरितों के द्वारा किए हुए कार्यों की तुलना में गुणात्मक रूप में भिन्न है। यद्यपि परमेश्‍वर ने प्रेरितों का उपयोग किया, परन्तु वे केवल वही कर सकते थे, जिन्हें परमेश्‍वर के द्वारा चुने हुए लोगों के द्वारा किया जा सकता था। सर्वशक्तिमान परमेश्‍वर की कलीसिया स्वयं परमेश्‍वर का कार्य है। उनकी आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, यह समूह "पूरी तरह से सर्वशक्तिमान परमेश्‍वर के द्वारा स्थापित किया गया था, और व्यक्तिगत् रूप से उसके द्वारा मार्गदर्शित और देखरेख किया जाता है, और यह किसी भी तरीके से एक व्यक्ति के द्वारा स्थापित नहीं किया गया है।" वर्तमान में, राज्य के युग में, परमेश्‍वर उसके श्‍वेत सिंहासन के न्याय को पूरा कर रहा है। सभी मसीही सम्प्रदायों और पंथों ने पवित्र आत्मा को खो दिया है, और उनकी सामर्थ्य अब सर्वशक्तिमान परमेश्‍वर की कलीसिया के ऊपर केन्द्रित है।

सर्वशक्तिमान परमेश्‍वर की कलीसिया त्रिएकत्व या त्रित्व के होने का खण्डन करती है, जो कि पर्यायवाद के एक रूप की शिक्षा है। पिता, पुत्र और पवित्र आत्मा को एक ही ईश्‍वर के तीन भिन्न प्रगटीकरणों में देखा जाता है, न कि तीन भिन्न व्यक्तियों में। "इस ब्रह्माण्ड में त्रिएकत्व कहीं पर भी विद्यमान नहीं है। परमेश्‍वर का कोई पिता नहीं है और कोई पुत्र नहीं है, पिता और पुत्र : का पवित्र आत्मा को संयुक्त रूप से उपयोग किए जाने वाले साधन की धारणा भी बहुत कम है। यह सब सबसे बड़ी झूठी शिक्षा है और यह इस संसार में यह विद्यमान नहीं है! "(उपरोक्त उद्धत कथन के साथ)।

सर्वशक्तिमान परमेश्‍वर की कलीसिया की शिक्षा के अनुसार, यीशु ने अनुग्रह के युग में मानव जाति के पाप को क्षमा किया, परन्तु उसका उद्धार पूरा नहीं हुआ, क्योंकि पाप का स्वभाव मानव जाति में बना रहा। अब, राज्य के युग में, अन्तिम दिनों के मसीह की शिक्षा के माध्यम से, अन्ततः मानव जाति को पाप से बचाया जा सकता है और पूरी तरह से शुद्ध किया जा सकता है। यही सच्चा उद्धार है, जो उन लोगों के लिए उपलब्ध है, जो अन्तिम दिनों में प्रकट हुए सर्वशक्तिमान परमेश्‍वर की शिक्षा का पालन करेंगे। समूह की आधिकारिक वेबसाइट से, वास्तव में स्पष्ट व्याख्या करना कठिन है कि एक व्यक्ति को वास्तविक उद्धार के अन्तिम स्तर को प्राप्त करने के लिए क्या करना होगा। ऐसा प्रतीत होता है कि सबसे महत्वपूर्ण बात केवल सर्वशक्तिमान परमेश्‍वर की कलीसिया की शिक्षाओं पर विश्‍वास करना है।

सर्वशक्तिमान परमेश्‍वर की कलीसिया हांगकांग, न्यूयॉर्क और सैन फ्रांसिस्को, के साथ ही इसकी मुख्य भूमि चीन में विद्यमान है। यौन उत्पीड़न, अपहरण, रिश्‍वत, जोर डालते हुए मन परिवर्तन करना और समूह में बने रहने के लिए नए सदस्यों को धमकी देना और और समूह के द्वारा परेशान किए जाने की रिपोर्टें प्राप्त हुई हैं। समूह विशेष रूप से चीन में गृहिणियों, निर्धनों और घरेलू कलीसियाओं के सदस्यों के ऊपर लक्ष्य स्थापित करता है, यह पहले विश्‍वासियों से मित्रतापूर्ण व्यवहार बनाता है और फिर धीरे-धीरे उन्हें निश्चय दिलाने का प्रयास करता है कि यांग जियांगबिन देहधारी परमेश्‍वर है। 2002 में, पूर्वी बिजली पंथ के सदस्यों ने कथित रूप से एक भूमिगत् मसीही नेटवर्क, चीन गॉस्पेल फैलोशिप के चौबीस अगुवों का अपहरण कर लिया, और उन्हें दो महीने तक बन्दी बना कर रखा था। अगस्त 2014 में, सर्वशक्तिमान परमेश्‍वर की कलीसिया के पाँच सदस्यों के ऊपर एक रेस्तरां में 37 वर्षीय महिला की हत्या करने के कारण यांताई, शॉनडोंग में मुकदमा चलाया गया - इस महिला को उनके समूह में सम्मिलित होने से इन्कार कर दिया था। फरवरी 2015 में, पाँच में से दो को इस अपराध के कारण फाँसी दे दी गई।

संक्षेप में, सर्वशक्तिमान परमेश्‍वर की कलीसिया एक खतरनाक समूह है, जो पवित्रशास्त्र की पर्याप्तता का खण्डन करता है और इसे अतिरिक्त, इसमें कथित प्रेरणाप्रदत्त शिक्षाओं को जोड़ते हुए इसे पूरा करता है। यह नई शिक्षाएँ एक ऐसी महिला से आती है, जिसे परमेश्‍वर के दूसरे देहधारण के रूप में देखा जाता है और जो वास्तव में स्वयं को सर्वशक्तिमान परमेश्‍वर कहती है। त्रिएकत्व का खण्डन किया जाता है। यीशु का बलिदान कलंकित किया जाता है, और क्रूस पर उसके किए हुए कार्य को पूरी तरह से बचाने के लिए शक्तिहीन माना जाता है। जबकि समूह मसीह के बलिदान को मात्र मुँह से ही स्वीकार करता है, तथापि सत्य और अन्तिम उद्धार केवल नई शिक्षा के पालन के माध्यम से ही उपलब्ध है। सर्वशक्तिमान परमेश्‍वर की कलीसिया गुप्तता से घिरी हुई है, और इसके सदस्य शक्तिशाली-हथियारों वाली रणनीति का उपयोग करते हैं और अपने समूह के नाम पर दुष्टता से भरे हुए अपराध करते हैं। सर्वशक्तिमान परमेश्‍वर की कलीसिया में एक झूठी शिक्षा वाले पंथ के सभी लक्षण पाए जाते हैं, और इसलिए मसीही विश्‍वासी पवित्रशास्त्र की चेतावनी के ऊपर ठीक ही ध्यान देना चाहेंगे: "क्योंकि कितने ऐसे मनुष्य चुपके से हम में आ मिले हैं... ये भक्तिहीन हैं, और हमारे परमेश्‍वर के अनुग्रह को लुचपन में बदल डालते है, और हमारे एकमात्र स्वामी और प्रभु यीशु मसीह का इन्कार करते हैं...ये तो वे हैं, जो फूट डालते हैं; ये शारीरिक लोग हैं, जिनमें आत्मा नहीं "(यहूदा 1:4, 19)।

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