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प्रश्न

मसीही धर्मविज्ञान क्या है?

उत्तर


शब्द "धर्मविज्ञान" यूनानी के दो शब्दों से निकल कर आया है, जिसका अर्थ "परमेश्‍वर" और "वचन" है। संयुक्त, शब्द "धर्मविज्ञान" का अर्थ है कि "परमेश्‍वर का अध्ययन" करना। मसीही धर्मविज्ञान बाइबल क्या शिक्षा देती है और मसीही विश्‍वासी क्या मानते हैं, का अध्ययन करना है। कई मसीही विश्‍वासियों ने मसीही धर्मविज्ञान के साथ कुछ ऐसा व्यवहार किया है, कि मानो यह ऐसा कुछ है, जो विभाजित कर रहा है, यह कुछ ऐसा है, जिस से बचा जाना चाहिए। वास्तविकता में, मसीही धर्मविज्ञान को एकता में लाना चाहिए था! परमेश्‍वर का वचन सत्य की शिक्षा देता है और हमें उस सत्य के पीछे एक हो जाना चाहिए। हाँ, मसीही धर्मविज्ञान में असहमतियाँ और विवाद पाए जाते हैं। हाँ, मसीही धर्मविज्ञान की अनावश्यक-बातों के ऊपर असहमति होने की स्वतन्त्रता है। ठीक उसी समय, ऐसा बहुत कुछ इसमें है, जिसके कारण मसीही विश्‍वासियों को एक हो जाना चाहिए। एक बाइबल आधारित मसीही धर्मविज्ञान हमें इस संसार में परमेश्‍वर, उद्धार और स्वयं के मिशन को उत्तर रीति से समझने में सक्षम बनाएगा।

कुछ लोगों के लिए, शब्द "धर्मवैज्ञानिक" प्राचीन ग्रन्थों के ऊपर से हटाई गई धूल के पश्‍चात् कम प्रकाश वाले कमरे में प्राचीन ग्रन्थों के ऊपर आँखें गड़ाए हुए अध्ययन करते हुए झुर्रीदार बुजुर्ग पुरुषों की छवियों को बनाता है, जो पुस्तकों को ऐसे पढ़ रहे हैं, जिन्हें पूरी तरह से वास्तविक जीवन से हटा दिया गया है। सच्चाई से कुछ दूर नहीं जा सकता है। दूसरा तीमुथियुस 3:16-17 हमें बताता है कि पूरा पवित्रशास्त्र परमेश्‍वर से प्रेरित है, और यह हमारे लिए अनिवार्य है, क्योंकि यह हमें पूरा करता है, इसमें कुछ भी कमी नहीं है। एक धर्मवैज्ञानिक होने का अर्थ ऐसा व्यक्ति होना है, जो ब्रह्माण्ड के सृष्टिकर्ता और उसके पुत्र, यीशु मसीह का सामना करने के लिए परमेश्‍वर के मुख की खोज करता है, और उसे अपने जीवन में प्रभु के रूप में अपना लेता है, ताकि वह उसकी इच्छाओं, प्रेम, और ज्ञान का केन्द्र बिन्दु बन जाए। यह घनिष्ठता हमारे जीवन के सभी पहलुओं में विस्तारित होती है — हमें अपनी आशीषों से रोमांचित करती है, हमें नुकसान के समय में सांत्वना देती है, हमें अपनी कमजोरियों में दृढ़ता प्रदान करती है, और हमें अपने जीवन के अन्त तक स्थिर रखती है, जब हम उसे आमने-सामने देखेंगे। पवित्रशास्त्र परमेश्‍वर की कहानी है, और जितना अधिक हम उसके वचन का अध्ययन करेंगे, उतना ही अधिक उत्तम रीति से हम उसे जानेंगे।

नीचे मसीही धर्मविज्ञान की विभिन्न श्रेणियाँ दी गई हैं। मसीही धर्मविज्ञान के विभिन्न क्षेत्रों के बारे में बाइबल क्या कहती है, उसे समझना मसीही जीवन में आत्मिक विकास और प्रभावशाली होने की कुँजी है।
उचित धर्मविज्ञान/पितृत्वविज्ञान — परमेश्‍वर पिता का अध्ययन।
ख्रिस्तीय धर्मविज्ञान — यीशु मसीह के व्यक्तित्व और कार्य का अध्ययन।
पवित्र आत्मा सम्बन्धी धर्मविज्ञान — पवित्र आत्मा के व्यक्तित्व और कार्य का अध्ययन।
बाइबल सम्बन्धी धर्मविज्ञान — परमेश्‍वर के वचन का अध्ययन।
उद्धार सम्बन्धी धर्मविज्ञान — यीशु मसीह के माध्यम से उद्धार का अध्ययन।
मसीही मानवीय विज्ञान — मनुष्य के स्वभाव का अध्ययन।
पाप सम्बन्धी धर्मविज्ञान — पाप के स्वभाव और प्रभाव का अध्ययन।
स्वर्गदूत सम्बन्धी धर्मविज्ञान — स्वर्गदूतों का अध्ययन।
दुष्टात्मा सम्बन्धी मसीही धर्मविज्ञान — दुष्टात्माओं का अध्ययन।
कलीसिया सम्बन्धी धर्मविज्ञान — कलीसिया के स्वभाव और उसके मिशन का अध्ययन।
युगान्तविज्ञान — अन्तिम दिनों/अन्त के समय का अध्ययन।

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