क्यों मसीही विश्‍वासियों में समलैंगिकों के प्रति भय होता है?



प्रश्न: क्यों मसीही विश्‍वासियों में समलैंगिकों के प्रति भय होता है?

उत्तर:
अपनी परिभाषा के अनुसार ही, होमोफोबिया समलैंगिकों के प्रति भय का होना, परन्तु इसके व्यापक अर्थों में समलैंगिकों के प्रति घृणा इसमें सम्मिलित है। इसी के साथ, समलैंगिकों के प्रति भयात्तुर होना ऐसी भावनाओं के आधार पर एक बाह्य प्रदर्शन या व्यवहार के माध्यम से प्रकट होता है। यह, बदले में, कभी-कभी हिंसा के कार्यों या शत्रुता की अभिव्यक्ति की ओर ले जाता है। सच्चाई यह है कि समलैंगिकता के प्रति भय केवल समाज के किसी एक हिस्से तक ही सीमित नहीं है। यह जीवन के सभी क्षेत्रों के लोगों में पाया जा सकता है। इस तरह के घृणा करने वाले समूहों ने समलैंगिकों पर भयानक तरीके से आक्रमण किया है और समलैंगिकों को सताया और भयभीत करने के लिए विशेष रूप से हिंसक भाषा का उपयोग किया है।

बहुत बार, मसीही विश्‍वासियों को समलैंगिकों के प्रति भयात्तुर या उनसे घृणा करने वाले के रूप में माना जाता है, क्योंकि वे समलैंगिक व्यवहार को पाप के रूप में निन्दा करते हैं। परन्तु तथ्य यह है कि समलैंगिकता के प्रति भय या घृणा वाक्यांश केवल एक ऐसा शब्द है, जो समलैंगिक कार्यकर्ताओं और समर्थकों द्वारा एक अनैतिक और अस्वास्थ्यकर अभ्यास की एक वास्तविक आलोचना को हटाने के उनके प्रयासों में प्रयोग किया जाता है। बिना किसी प्रश्‍न किए ऐसे लोग और संगठन पाए जाते हैं, जिन्होंने समलैंगिकों के प्रति एक अतार्किक घृणा विकसित किया है और जो समलैंगिकों को पीड़ित होने के लिए हिंसक कार्यों का उपयोग करने के लिए तैयार रहते हैं। यद्यपि, समस्या यह है कि समलिंगी-अधिकारों के कार्यकर्ताओं ने ऐसे किसी भी व्यक्ति पर आरोप लगाया है, जो उस जैसी ही घृणा को रोकने के लिए समलैंगिकता का विरोध करता है। इसलिए, मसीही विश्‍वासी, जो उचित रूप से यह मानते हैं कि समलैंगिकता एक अप्राकृतिक पाप है, को हिंसक पागल के तुल्य माना जाता है, जो घृणा करने वाले के कारण घृणा करते हैं।

यद्यपि, बाइबल ने समलैंगिकता की निन्दा की है, तथापि, यह कभी ऐसा नहीं बताता कि समलैंगिकों के साथ घृणा करनी चाहिए। मसीही विश्‍वासी होने के नाते, हमें समलैंगिक गतिविधियों की विकृति के विरूद्ध बोलना है। बाइबल में इसकी निन्दा स्पष्ट रूप से की गई है, साथ ही साथ ऐसे व्यवहार करने वालों के प्रति परमेश्‍वर का क्रोध बना रहता है। मसीही विश्‍वासी होने के नाते, हमें जो कुछ पाप है, उसे स्पष्ट और प्रेम के साथ पाप ही बुलाना चाहिए। समलैंगिकता का विरोध करने वाले किसी भी व्यक्ति का उल्लेख करने के लिए वाक्यांश समलैंगिकता के प्रति भय या घृणा का उपयोग करना एक विचलन है, न कि यह उसका वैध तर्क है या न ही उसका सटीकता से प्रतिनिधित्व करता है। एक मसीही विश्‍वासी को समलैंगिकों के बारे में केवल एक ही डर होना चाहिए, यह डर कि वे सदैव ही उद्धार के एकमात्र साधन — प्रभु यीशु मसीह, जो पतित और नष्ट होने वाली जीवनशैली से बचाव की एकमात्र आशा की प्रस्तावना देता है — को अस्वीकार करने के अपने निर्णय के कारण दण्ड को प्राप्त करेंगे।

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क्यों मसीही विश्‍वासियों में समलैंगिकों के प्रति भय होता है?