मसीही मण्डनशास्त्र क्या है?



प्रश्न: मसीही मण्डनशास्त्र क्या है? प्रार्थना करने की क्या आवश्यकता है जब परमेश्वर भविष्य को जानता है और सब कुछ उसके नियन्त्रण में है। यदि हम परमेश्वर के मन को परिवर्तित नहीं कर सकते हैं, तो हमें प्रार्थना क्यों करनी चाहिए?

उत्तर:
हिन्दी शब्द "धर्ममण्डन" यूनानी भाषा के शब्द से आया है जहाँ पर मूल रूप से "उत्तर देने के लिए तैयार" रहने के अर्थ को प्रस्तुत किया गया है। इस कारण, मसीही मण्डनशास्त्र, एक ऐसा विज्ञान है जो मसीही विश्‍वास की रक्षा के लिए उत्तर देना है। ऐसे बहुत से सन्देहवादी हैं, जो परमेश्‍वर के अस्तित्व के ऊपर सन्देह करते हैं, और/या बाइबल में वर्णित परमेश्‍वर के ऊपर विश्‍वास करने पर आक्रमण करते हैं। ऐसे बहुत से आलोचक हैं, जो बाइबल के प्रेरणा प्रदत्त होने और इसके त्रुटिहीन होने के ऊपर आक्रमण करते हैं। ऐसे बहुत से झूठे शिक्षक हैं, जो झूठी शिक्षाओं को बढ़ावा देते हैं, और मसीही विश्‍वास के मुख्य सत्यों को इन्कार कर देते हैं। मसीही मण्डनशास्त्रियों का मिशन इन्हीं आन्दोलनों के विरूद्ध युद्ध छेड़ने का है, और इसकी अपेक्षा मसीहियों के परमेश्‍वर और मसीही सच्चाइयों को बढ़ावा देने का है।

कदाचित् मसीही मण्डनशास्त्र के लिए कुँजी वचन 1 पतरस 3:15 है, "पर मसीह को प्रभु जानकर अपने अपने मन में पवित्र समझो। जो कोई तुम से तुम्हारी आशा के विषय में कुछ पूछे, उसे उत्तर देने के लिए सर्वदा तैयार रहो, पर नम्रता और भय के साथ...।" किसी भी मसीही विश्‍वासी के लिए अपने विश्‍वास की रक्षा करने में पूर्ण रीति से अक्षम होने के लिए कोई बहाना नहीं है। प्रत्येक मसीही विश्‍वासी को मसीह में अपने विश्‍वास को न्यायसंगत रीति से प्रस्तुत करने के लिए योग्य होना चाहिए। प्रत्येक मसीही विश्‍वासी को मण्डनशास्त्र में एक विशेषज्ञ बनने की आवश्यकता नहीं है। यद्यपि, प्रत्येक मसीही विश्‍वासी, को यह अवश्य जानना चाहिए कि वह क्या विश्‍वास करता है, क्यों विश्‍वास करता है, और इसे कैसे दूसरों के साथ साझा कर सकता है, और कैसे इसके विरूद्ध आने वाले झूठों और आक्रमणों से इसका बचाव कर सकता है।

मसीही मण्डनशास्त्र का दूसरा पहलू जिसे अक्सर अन्देखा कर दिया जाता है, 1 पतरस 3:15 का दूसरा हिस्सा है, "परन्तु नम्रता और भय के साथ...।" मसीही विश्‍वास की मण्डनशास्त्र के द्वारा बचाव करने के लिए कभी भी असभ्यता, क्रोध, या अपमानजनक तरीके से इसमें सम्मिलित नहीं होना चाहिए। जब मसीही मण्डनशास्त्र का उपयोग किया जाए, तब हमें सदैव दृढ़ता के साथ स्वयं का बचाव करना चाहिए और ठीक उसी समय हमारे प्रस्तुतिकरण को मसीही-जैसा होना चाहिए। यदि हम एक संवाद के ऊपर जय पा लेते हैं, परन्तु इसके बदले में एक व्यक्ति हमारे व्यवहार के द्वारा हम से और भी अधिक दूर हो गया है, तब तो हमने मसीही मण्डनशास्त्र के सच्चे उद्देश्य को ही खो दिया है।

मसीही मण्डनशास्त्र के उपयोग के लिए दो मूल पद्धतियाँ पाई जाती हैं। प्रथम, शास्त्रीय मण्डनशास्त्र के सामान्य नाम से जानी जाती है, जिसमें मसीही सन्देश सत्य है या नहीं के लिए प्रमाणों और तथ्यों को सम्मिलित किया जाता है। दूसरा सामान्य उपयोग "पूर्वधारण" मण्डनशास्त्र के नाम से जाना जाता है, जिसमें पूर्वधारणाओं (पूर्वधारित विचार, पूर्वानुमान) के साथ मसीही-विरोधी धारणाओं के विरूद्ध सामना किया जाना सम्मिलित है। मसीही मण्डनशास्त्र की इन दो पद्धतियों के विचारक अक्सर एक दूसरे के साथ विवाद करते हैं, कि कौन सी पद्धति सबसे अधिक प्रभावशाली है। इन दोनों तरीकों का उपयोग व्यक्ति और स्थिति के आधार पर करने से अधिक उपयोगी सिद्ध होगा।

मसीही मण्डनशास्त्र असहमत होने वालों को तर्कसंगत और सत्य के साथ मसीही विश्‍वास की रक्षा करने की एक सरल सी पद्धति वाला प्रस्तुतिकरण है। मसीही मण्डनशास्त्र मसीही जीवन का एक आवश्यक पहलू है। हम सभों को सुसमाचार प्रचार करने और अपने विश्‍वास की रक्षा करने के लिए तैयार और सुसज्जित रहने के लिए आदेश दिया गया है (मत्ती 28:18-20; 1 पतरस 3:15)। यही मसीही मण्डनशास्त्र का सार है।



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