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प्रश्न

चिट्ठी डालने का अभ्यास क्या था?

उत्तर


चिट्ठी डालने के अभ्यास का पुराने नियम में सत्तर बार और नए नियम में सात बार उल्लेख किया गया है। पुराने नियम में चिट्ठी डालने के कई सन्दर्भों के होने के पश्‍चात् भी वास्तविकता में चिट्ठी डालने के बारे में कुछ भी ज्ञात नहीं है। वे विभिन्न लम्बाई की लकड़ियाँ, सिक्के जैसे सपाट पत्थर या किसी प्रकार का पासा हो सकती थीं; परन्तु उनका सटीक स्वभाव अज्ञात है। चिट्ठी डालने के लिए निकटतम आधुनिक अभ्यास एक सिक्के को ऊपर फेंकने की सम्भावना से हो सकता है।

यहोशू (यहोशू अध्याय 14-21) में भूमि के विभाजन के सम्बन्ध में बहुत बार चिट्ठी डालने की प्रथा का उपयोग मिलता है, यह एक ऐसी प्रक्रिया थी, जिसे परमेश्‍वर ने कई बार गिनती की पुस्तक में इस्राएलियों को निर्देश के रूप में दी थी (गिनती 26:55; 33:54; 34:13; 36:2)। परमेश्‍वर ने इस्राएलियों को एक निर्धारित अवस्था की प्राप्ति के लिए उसकी इच्छा का निर्धारण करने के लिए चिट्ठी को डालने की अनुमति दी थी (यहोशू 18:6-10; 1 इतिहास 24:5, 31)। मन्दिर में विभिन्न पदों और कार्य को भी चिट्ठी डाले जाने से ही निर्धारित किया जाता था (1 इतिहास 24:5, 31; 25:8-9; 26:13-14)। योना के जहाज पर नाविकों ने यह निर्धारित करने के लिए चिट्ठी डाली थी कि उनके जहाज के ऊपर कौन परमेश्‍वर के क्रोध को ले आया था (योना 1:7)। ग्यारह प्रेरितों ने यह निर्धारित करने के लिए चिट्ठी डाली कि यहूदा इस्करियोती के स्थान को कौन लेगा (प्रेरितों के काम 1:26)। चिट्ठी डालना अन्त में लोगों द्वारा खेले जाने वाला खेल बन गया और लोग इस पर दांव लगाने लगे। इसे रोमी सैनिकों में यीशु के कपड़ों के लिए चिट्ठी डालने में देखा जा सकता है (मत्ती 27:35)।

नया नियम मसीहियों को निर्णय-लेने में सहायता देने के लिए चिट्ठी डालने के लिए समान विधि का उपयोग करने का निर्देश देता है। अब जबकि हमारे पास परमेश्‍वर का पूरा वचन है, साथ ही साथ हमें मार्गदर्शन देने के लिए भीतर वास करता हुआ पवित्र आत्मा भी उपलब्ध है, निर्णय लेने के लिए संयोग वाले खेलों का उपयोग करने का कोई कारण नहीं पाया जाता है। वचन, पवित्र आत्मा और प्रार्थना, आज समझदारी से परमेश्‍वर की इच्छा पाने के लिए पर्याप्त हैं – न कि चिट्ठी डालना, पासा चलाना, या सिक्का उछालना।

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