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प्रश्न

कॉल्विनवाद क्या है और क्या यह बाइबल सम्मत है? कॉल्विनवाद की पाँच सूत्र क्या हैं?

उत्तर


कॉल्विनवाद की पाँच मुख्य बातों या सूत्रों को ट्यूलिप अर्थात् इसका ट — पूर्ण भ्रष्टता, यू — शर्तरहित चुने जाना, एल — सीमित प्रायश्चित, ई — अनुग्रह के प्रबल होने, और प — सन्तों को संभाले रखने के रूप में संक्षिप्त अक्षरों में लिखा जा सकता है। यहाँ पर अपनी मान्यता को सही ठहराने के लिए कॉल्विनवादियों के द्वारा उपयोग किए जाने वाली परिभाषाएँ और पवित्र शास्त्र के सन्दर्भ दिए गए हैं:

पूर्ण भ्रष्टता — आदम के पतन के परिणामस्वरूप, पूरी मानजाति प्रभावित हो गई; पूरी मानवजाति अपराध और पाप में मृत है। मनुष्य स्वयं को बचाने के लिए सक्षम नहीं है (उत्पत्ति 6:5; यिर्मयाह 17:9; रोमियों 3:10-18)।

शर्तरहित चुनाव — क्योंकि मनुष्य पाप में मृत है, वह परमेश्‍वर के प्रति प्रतिउत्तर देने में योग्य नहीं है; परन्तु, अतीत के अनन्तकाल में परमेश्‍वर ने उद्धार के लिए निश्चित लोगों को पहले से ही चुन लिया है। चुनाव और पूर्वनियुक्तवाद शर्तरहित हैं; वे मनुष्य के प्रतिउत्तर के ऊपर आधारित नहीं हैं (रोमियों 8:29-30;9:11; इफिसियों 1:4-6, 11-12) क्योंकि मनुष्य प्रतिउत्तर देने में असमर्थ है, न ही वह इसे देना चाहता है।

सीमित प्रायश्चित — क्योंकि परमेश्‍वर ने निर्धारित कर लिया है कि निश्चित लोगों को ही परमेश्‍वर के शर्तरहित चुनाव के परिणाम स्वरूप बचाया जाएगा, इसलिए उसने निर्धारित किया कि मसीह को चुने हुओं के लिए ही मरना चाहिए। उन सभों को जिन्हें परमेश्‍वर ने चुना है और जिनके लिए मसीह मरा है, बचाए जाएँगे (मत्ती 1:21; यूहन्ना 10:11; 17:9; प्रेरितों के काम 20:28; रोमियों 8:32; इफिसियों 5:25)।

अनुग्रह की प्रबलता — जिन्हें परमेश्‍वर ने चुना है, उन तक वह अपने प्रबल अनुग्रह के द्वारा आता है। परमेश्‍वर मनुष्य को उसके पास आने की इच्छा को उत्पन्न करता है। जब परमेश्‍वर बुलाता है, तब मनुष्य प्रतिउत्तर देता है (यूहन्ना 6:37, 44; 10:16)।

सन्तों को संभाले रखना — जिन्हें परमेश्‍वर ने चुना है और जिन्हें वह अपने निमित्त पवित्र आत्मा के द्वारा विश्‍वास में संभाले रखेगा। परमेश्‍वर के चुने हुओं में कोई भी नहीं खोएगा; वे अनन्तकाल के लिए सुरक्षित हैं (यूहन्ना 10:27-29; रोमियों 8:29-30; इफिसियों 1:3-14)।

जबकि इन सभी धर्मसिद्धान्तों के बाइबल आधारित आधार हैं, तथापि बहुत से लोग इन सभों या इनमें से कुछ को ही अस्वीकृत कर देते हैं। तथाकथित, "चार-सूत्रों-वाले-कॉल्विनवादी" पूर्ण नैतिक भ्रष्टता, शर्तहीन चुनाव, अनुग्रह की प्रबलता, और सन्तों को संभाले रखने को बाइबल आधारित धर्मसिद्धान्त के रूप में स्वीकार करते हैं। मनुष्य निश्चित रूप से पापी है और स्वयं से परमेश्‍वर में विश्‍वास करने के लिए योग्य नहीं है। परमेश्‍वर लोगों को केवल अपनी ही इच्छा के द्वारा चुनता है — चुनाव एक चुने हुए व्यक्ति के किसी भी गुण के ऊपर आधारित नहीं है। परमेश्‍वर द्वारा चुने हुए सभी उसमें विश्‍वास करेंगे। वास्तव में नया-जन्म पाए हुए सभों को वह उनके विश्‍वास में बनाए रखेगा। जहाँ तक सीमित प्रायश्चित के सूत्र की बात आती है, चार-सूत्रों में विश्‍वास करने वाले कॉल्विनवादी विश्‍वास करते हैं कि प्रायश्चित असीमित है, इसके लिए वह यह तर्क देते हैं कि यीशु पूरे संसार के पापों के लिए मरा था, न कि केवल चुने हुओं के पापों के लिए। "और वही हमारे पापों का प्रायश्चित है, और केवल हमारे ही नही वरन् सारे जगत के पापों के लिए भी" (1 यूहन्ना 2:2)। सीमित प्रायश्चित के विरोध में अन्य सन्दर्भ यूहन्ना 1:29; 3:16; 1 तीमुथियुस 2:6; और 2 पतरस 2:1 इत्यादि पाए जाते हैं।

तथापि, पाँच-सूत्रों को मानने वाले कॉल्विनवादी, चार-सूत्रों वाले कॉल्विनवाद में समस्याओं को देखते हैं। प्रथम, वे तर्क देते हैं कि यदि पूर्ण नैतिक भ्रष्टता सत्य है, तब असीमित प्रायश्चित के सत्य होने की सम्भावना नहीं है, क्योंकि यदि यीशु प्रत्येक व्यक्ति के पापों के लिए मर गया है, फिर चाहे उनकी मृत्यु एक व्यक्ति पर लागू होती है या नहीं, यह इस बात पर निर्भर करता है कि वह व्यक्ति "मसीह को स्वीकार करता है" या नहीं। परन्तु, जैसा कि हमने पूर्ण नैतिक भ्रष्टता के ऊपर दिए हुए विवरण के साथ देखा था, मनुष्य के पास अपनी स्वाभाविक अवस्था में किसी तरह की कोई योग्यता नहीं है कि वह किसी रीति से परमेश्‍वर को चुन ले, न ही वह उसे चुनना चाहता है। इसके अतिरिक्त, यदि असीमित प्रायश्चित सत्य है, तब नरक उन लोगों से भरा हुआ होगा, जिनके लिए मसीह मरा था। उसने अपने लहू को व्यर्थ में उनके लिए बहा दिया है। पाँच-सूत्रों को मानने वाले कॉल्विनवादियों के लिए यह सोच से परे की बात है। कृपया ध्यान दें : यह लेख कॉल्विनवाद की पाँच सूत्रों के ऊपर मात्र एक संक्षिप्त सार ही है। इस विषय पर गहन अध्ययन के लिए, कृपया इन पृष्ठों को देखें : पूर्ण भ्रष्टता, शर्तहीन चुनाव, सीमित प्रायश्चित, अनुग्रह की प्रबलता, और सन्तों को संभाले रखना।

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