बाइबल उभयलैंगिकता/सर्वलैंगिकता के बारे में क्या कहती है? क्या एक उभयलिंगी होना पाप है?


प्रश्न: बाइबल उभयलैंगिकता/सर्वलैंगिकता के बारे में क्या कहती है? क्या एक उभयलिंगी होना पाप है?

उत्तर:
बाइबल कहीं भी सीधे रूप से समलैंगिकता अर्थात् एक ही व्यक्ति में स्त्री और पुरुष दोनों लिंगों के गुणों के होने का उल्लेख नहीं करती है। यद्यपि, समलैंगिकता के प्रति बाइबल की निन्दा से स्पष्ट है कि समलैंगिकता को भी पाप माना जाता है। लैव्यव्यवस्था 18:22 एक ही लिंग के साथ यौन सम्बन्ध रखने की घोषणा करती है। रोमियों 1:26-27 एक ही जैसे लिंग के साथ यौन रखने के लिए स्वाभाविक लैंगिकता को त्यागने की निन्दा करता है। पहला कुरिन्थियों 6:9 में कहा गया है कि समलैंगिक अपराधी परमेश्‍वर के राज्य के वारिस नहीं होंगे। ये सत्य उभयलिंगी और समलैंगिकों के ऊपर समान रूप से लागू होते हैं।

बाइबल हमें बताती है कि पाप के कारण एक व्यक्ति उभयलिंगी या समलैंगिक हो जाता है (रोमियों 1:24-27)। इसका अनिवार्य रूप से यह अर्थ नहीं है कि यह उस व्यक्ति के द्वारा किए गए पाप हैं। इसकी अपेक्षा, यह स्वयं पाप को ही सन्दर्भित करता है। पाप अशुद्ध करता, विकृत करता, और सृष्टि में पाए जाने वाले सब कुछ को भ्रष्ट कर देता है। उभयलैंगिकता और समलैंगिकता आत्मिक, मानसिक, भावनात्मक और शारीरिक रूप से "हानि" करने वाले पाप के कारण होती है। पाप एक महामारी है, और उभयलैंगिकता तो इसके लक्षणों में से केवल एक है।

कई मसीही विश्‍वासी गलती से उभयलैंगिकता और समलैंगिकता के ऊपर विशेष रूप से बुरे पापों के रूप में ध्यान केन्द्रित करते हैं। बाइबल कहीं भी समलैंगिकता का वर्णन किसी अन्य पाप से कम क्षमा योग्य होने के रूप में नहीं करती है। एक उभयलिंगी उद्धार से उतने ही कदम दूर है, जितने कदम दूर "नैतिक" रूप से एक — विधिपरायण व्यक्ति है। परमेश्‍वर किसी को भी और प्रत्येक उस को क्षमा प्रदान करता है, जो उद्धार के लिए यीशु मसीह पर भरोसा करेगा। इसमें वे लोग भी पाए जाते हैं, जो समलैंगिकता में सम्मिलित है। एक बार मसीह के माध्यम से उद्धार के प्राप्त हो जाने पर, परमेश्‍वर शरीर के कामों को नष्ट (गलातियों 5:19-21) और आत्मा के फल को विकसित करने की प्रक्रिया को आरम्भ करता है (गलातियों 5:22-23)। अक्सर परमेश्‍वर किसी विशेष पाप के प्रति हमारी इच्छा को हटा देता है और अन्य समयों में वह हमें परीक्षा का विरोध करने की सामर्थ्य देता है। परिवर्तन की प्रक्रिया जीवन भर चलती रहती है। जब हम असफल होते हैं, तो परमेश्‍वर क्षमा और शुद्ध करने के लिए विश्‍वासयोग्य रहता है (1 यूहन्ना 1:9)। वह उसके काम को पूरा करने के प्रति भी विश्‍वासयोग्य है (फिलिप्पियों 1:6)। "नई सृष्टि" की प्रतिज्ञा किसी भी उस व्यक्ति के लिए उपलब्ध है, जो मसीह पर भरोसा करेगा (2 कुरिन्थियों 5:17)।

English


हिन्दी के मुख्य पृष्ठ पर वापस जाइए
बाइबल उभयलैंगिकता/सर्वलैंगिकता के बारे में क्या कहती है? क्या एक उभयलिंगी होना पाप है?