बाँधने और खोलने के द्वारा बाइबल का क्या अर्थ है?



प्रश्न: बाँधने और खोलने के द्वारा बाइबल का क्या अर्थ है?

उत्तर:
"बाँधना और खोलने" की अवधारणा की शिक्षा बाइबल में मत्ती 16:19 में दी गई है: "मैं तुझे स्वर्ग के राज्य की कुँजियाँ दूँगा; और जो कुछ तू पृथ्वी पर बाँधेगा, वह स्वर्ग में बंधेगा; और जो कुछ तू पृथ्वी पर खोलेगा, वह स्वर्ग में खुलेगा।" इस वचन में, यीशु परोक्ष में प्रेरित पतरस और अपरोक्ष में अन्य प्रेरितों से वार्तालाप कर रहा है। यीशु के शब्दों का अर्थ यह है, कि स्वयं पतरस के पास स्वर्ग में प्रवेश करने का अधिकार होगा, यह कि उसके पास सामान्य अधिकार होगा जिसका संकेत उसके पास कुँजियों के होने से दिया गया है, और यह कि सुसमाचार के प्रचार का अर्थ सभी विश्‍वासियों के लिए स्वर्ग के राज्य के खुलने और अविश्‍वासियों के लिए इसे बन्द होने के रूप में दिया गया है। प्रेरितों के काम की पुस्तक हमें इस कार्यों की प्रक्रिया को दिखलाती है। पिन्तेकुस्त के दिन अपने सन्देश के द्वारा (प्रेरितों के काम 2:14-40), पतरस ने पहली बार स्वर्ग के राज्य के दरवाजे को खोल दिया था। यहूदी कानूनी व्यवस्थाविज्ञान में "बाँधना" और "खोलना" सामान्य अभिव्यक्तियों के रूप में किसी बात की मनाही या अनुमति की घोषणा के अर्थ में उपयोग की जाती थी।

पतरस और अन्य शिष्यों को इस पृथ्वी पर सुसमाचार के प्रचार के मसीह के कार्य को और मनुष्यों में परमेश्‍वर की इच्छा की घोषणा के कार्य को करते रहना था, और वे उसी अधिकार के साथ सुसज्जित थे, जो स्वयं यीशु के पास था। मत्ती 18:18 में, कलीसिया के अनुशासन के संदर्भ में भी बाँधने और खोलने के एक निश्चित वचन के रूप में दिया गया है। प्रेरितों को व्यक्तिगत् विश्‍वासियों और उनके शाश्‍वतकालीन गंतव्य के ऊपर मसीह के प्रभुत्व और अधिकार को हड़पना नहीं था, अपितु उन्हें अनुशासन के लिए अधिकार का उपयोग करना और यदि कोई कलीसियाई सदस्य अनाज्ञाकारी हो जाता था, तो उसे बहिष्कृत करना था।

जो कुछ उसके नाम में और पृथ्वी पर उसके वचन की आज्ञा पालन करते हुए किया गया है, उसकी अभिपुष्टि स्वर्ग में विराजमान मसीह करता है। दोनों ही अर्थात् मत्ती 16:19 और 18:18, यूनानी मूलपाठ की वाक्य रचना इसके अर्थ को स्पष्ट कर देता है। जो कुछ आप इस पृथ्वी पर बाँधते हैं, वह पहले से ही स्वर्ग में बँध चुका है। जो कुछ आप इस पृथ्वी पर खोलते हैं, वह पहले से ही स्वर्ग में खुल चुका है। दूसरे शब्दों में, स्वर्ग में विराजमान यीशु उसके वचन के अधिकार को खोल देता है, जब यह उस पृथ्वी पर उसके उद्देश्य को पूरा करने के लिए आता है।



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