क्या ब्रह्माण्ड की सृष्टि के लिए परमेश्‍वर ने 'महाविस्फोट' का उपयोग किया है?


प्रश्न: क्या ब्रह्माण्ड की सृष्टि के लिए परमेश्‍वर ने 'महाविस्फोट' का उपयोग किया है?

उत्तर:
कुछ मसीही विश्‍वासी बिग बैंग अर्थात् महाविस्फोट के सिद्धान्त का पुरजोर विरोध करते हैं। वे इसे परमेश्‍वर के अतिरिक्त ब्रह्माण्ड की उत्पत्ति की व्याख्या करने के प्रयास के रूप में देखते हैं। अन्य मसीही विश्‍वासी महाविस्फोट के सिद्धान्त को स्वीकार करते हुए कहते हैं कि यह स्वयं परमेश्‍वर ही था, जो विस्फोट का कारक था। परमेश्‍वर, अपने असीम ज्ञान और सामर्थ्य में ब्रह्माण्ड को रचने के लिए एक महाविस्फोट वाली विधि का उपयोग करना चुन सकता था, परन्तु उसने ऐसा नहीं किया। इसके लिए दिए जाने वाले कारण से पूरी तरह से यह कहा जा सकता है कि बाइबल इस तरह की विधि के विरोध में तर्क देती है। यहाँ पर बाइबल और महाविस्फोट वाले सिद्धान्त के मध्य कुछ विरोधाभास दिए गए हैं:

उत्पत्ति 1 में, परमेश्‍वर ने सूरज और सितारों से पहले पृथ्वी को रचा। महाविस्फोट वाले सिद्धान्त में इसे विपरीत रीति से रचने के अन्य तरीकों की आवश्यकता है। उत्पत्ति 1 में, परमेश्‍वर ने पृथ्वी, सूरज, चन्द्रमा, तारे, वनस्पति का जीवन, पशुओं का जीवन, और मनुष्य को 24-घण्टों वाले छह दिनों की अवधि में सृजा है। इसके लिए महाविस्फोट वाले सिद्धान्त को अरबों वर्षों की आवश्यकता है। उत्पत्ति 1 में, परमेश्‍वर ने अपने वचन की सामर्थ्य के द्वारा सभी वस्तुओं की रचना की। महाविस्फोट वाले सिद्धान्त पदार्थ के अस्तित्व के साथ ही आरम्भ होता है और प्रारम्भिक स्रोत या पदार्थ के अस्तित्व के कारण की कमी की समझ प्रदान नहीं करता है।

उत्पत्ति 1 में परमेश्‍वर ने सिद्ध रीति से निर्मित आदम के शरीर में जीवन के श्‍वास को फूँका है। महाविस्फोट वाले सिद्धान्त को इसके लिए अरबों वर्षों और अरबों अवसरों वाली परिस्थितियों की आवश्यकता है, जिससे कि प्रथम मनुष्य को प्राप्त किया जा सके, और यह कभी नहीं समझा सकता कि कैसे प्रथम सूक्ष्म जीवन एक अ-जीवित परमाणु से "विकसित" होते हुए जीवन में आया। बाइबल में परमेश्‍वर शाश्‍वतकालीन है और पदार्थ और ब्रह्माण्ड शाश्‍वतकालीन नहीं हैं। महाविस्फोट वाले सिद्धान्त के विभिन्न संस्करण हैं, परन्तु उनमें से अधिकांश में ब्रह्माण्ड और/या पदार्थ शाश्‍वतकालीन है। उत्पत्ति 1 में परमेश्‍वर के अस्तित्व की परिकल्पना की गई है, "आदि में परमेश्‍वर..."। महाविस्फोट सिद्धान्त का सच्चा उद्देश्य उसके अस्तित्व को ही अस्वीकृत करना है।

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क्या ब्रह्माण्ड की सृष्टि के लिए परमेश्‍वर ने 'महाविस्फोट' का उपयोग किया है?