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प्रश्न

बाइबल का प्रतीकशास्त्र है?

उत्तर


प्रतीकशास्त्र एक विशेष प्रकार की प्रतीकात्मकता है। (एक प्रतीक ऐसा कुछ होता है, जो किसी और का प्रतिनिधित्व करता है।) हम एक प्रतीक को "भविष्यद्वाणी आधारित चिन्ह" के रूप में परिभाषित कर सकते हैं, क्योंकि सभी प्रतीक आने वाले भविष्य की बात का प्रतिनिधित्व करते हैं। अधिक विशेष रूप से कहना, पवित्रशास्त्र में पाए जाने वाला एक प्रतीक पुराने नियम का कोई एक ऐसा व्यक्ति या वस्तु होती है, जो नए नियम में किसी व्यक्ति या वस्तु को पूर्ववत प्रतिछाया होती है। उदाहरण के लिए, 1 पतरस 3:20-21 में नूह के दिन की जल प्रलय (उत्पत्ति 6-7) का उपयोग बपतिस्मा के प्रतीक के रूप में किया गया है। पतरस के द्वारा उपयोग किए गए प्रतीक के लिए शब्द कोई वस्तु अर्थात् जल प्रलय है।

जब हम कहते हैं कि कोई मसीह का प्रतीक है, तो हम कह रहे हैं कि पुराने नियम में एक व्यक्ति ऐसे ही तरीके से व्यवहार करता है, जो नए नियम में यीशु के चरित्र या कार्यों के अनुरूप है। जब हम कहते हैं कि कोई बात मसीह का "प्रतीक" है, तो हम कह रहे हैं कि पुराने नियम की कोई एक वस्तु या घटना यीशु की कुछ गुणवत्ता के प्रतिनिधि के रूप में देखी जा सकती है।

पवित्रशास्त्र बाइबल स्वयं पुराने नियमों की कई ऐसी घटनाओं जैसे कि मसीह का छुटकारा, मिलाप वाला तम्बू, बलिदान पद्धति और फसह इत्यादि की पहचान प्रतीक के रूप में करता है। पुराने नियम के तम्बू को इब्रानियों 9:8-9 में एक प्रतीक के रूप में पहचाना जाता है: "पहला तम्बू . . . वर्तमान समय के लिये एक दृष्‍टान्त है।" वर्ष में एक बार महायाजक पवित्र स्थान में प्रवेश करके मसीह, हमारे महायाजक की मध्यस्थता को पूर्वनिर्धारित करता था। बाद में, मिलाप के तम्बू के पर्दे को मसीह का एक प्रतीक कहा जाता है (इब्रानियों 10:19 -20) जिसमें उसकी देह तोड़ गई थी, (ठीक जैसे ही जैसे पर्दे के साथ जब मसीह को क्रूस पर चढ़ाया गया था) ताकि उन लोगों के लिए परमेश्‍वर की उपस्थिति में एक मार्ग का प्रबन्ध कर सके जो उसके बलिदान से ढके हुए हैं।

पूरी बलिदान पद्धति को इब्रानियों 9:19 -26 में एक प्रतीक के रूप में देखा जाता है। "पुराने नियम" के लेख बलिदान के लहू से समर्पित थे; इन लेखों को "स्वर्ग में की वस्तुओं के प्रतिरूप" और "सच्‍चे पवित्रस्थान का नमूना" कहा जाता है (वचन 23-24)। यह सन्दर्भ सिखाता है कि पुराने नियम के बलिदान संसार के पापों के लिए मसीह के अन्तिम बलिदान के प्रतीक को दर्शाते हैं। 1 कुरिन्थियों 5:7 के अनुसार फसह भी मसीह का एक प्रतीक है, "क्योंकि हमारा भी फसह, जो मसीह है, बलिदान हुआ है।" मसीह के बारे में हमें फसह की घटनाएँ जो शिक्षा देती हैं, उन्हें अक्षरश: वैसे ही घटित हुआ पाना एक समृद्ध और प्रतिफल देने वाला अध्ययन है।

हमें एक दृष्टान्त या उदाहरण और एक प्रतीक के मध्य पाए जाने वाले अन्तर को इंगित करना चाहिए। नए नियम में सदैव एक प्रतीक की पहचान की गई है। पुराने नियम की एक कहानी और मसीह के जीवन के बीच सम्बन्ध ढूंढने वाला बाइबल का एक विद्यार्थी बस दृष्टान्तों या उदाहरणों को ढूँढ रहा होता है, न कि प्रतीकों को। दूसरे शब्दों में, प्रतीकशास्त्र को पवित्रशास्त्र के द्वारा निर्धारित किया जाता है। पवित्र आत्मा ने प्रतीकों के उपयोग को करने के लिए प्रेरित किया; दृष्टान्त और रूपक मनुष्य के अध्ययन का परिणाम हैं। उदाहरण के लिए, कई लोग यूसुफ (उत्पत्ति 37-45) और यीशु के बीच समानता को देखते हैं। यूसुफ के अपमान और बाद की महिमा मसीह की मृत्यु और पुनरुत्थान के अनुरूप प्रतीत होती है। यद्यपि, नया नियम कभी भी यूसुफ का उपयोग मसीह के आदर्श के रूप में नहीं करता है; इसलिए, यूसुफ की कहानी को एक उदाहरण कहा जाता है, परन्तु मसीह का एक प्रतीक नहीं।

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