बाइबल आधारित पृथकता क्या है?



प्रश्न: बाइबल आधारित पृथकता क्या है?

उत्तर:
बाइबल आधारित पृथकता इस बात की पहचान है कि परमेश्‍वर ने इस संसार से विश्‍वासियों को बाहर और पापपूर्ण संस्कृतियों के मध्य में रहते हुए एक व्यक्तिगत् और सामूहिक पवित्रता के लिए बुलाया है। बाइबल आधारित पृथकता को अक्सर दो क्षेत्रों : व्यक्तिगत् और कलीसियाई में विचारार्थ किया जाता है।

व्यक्तिगत् पृथकता में एक व्यक्ति के व्यवहार के ईश्‍वरीय स्तर का व्यक्तिगत् समर्पण सम्मिलित होता है। दानिय्येल ने व्यक्तिगत् पृथकतावाद को तब जीवन में लागू किया जब "उसने मन में ठान लिया कि वह राजा का भोजन खाकर, और उसके पीने का दाखमधु पीकर अपवित्र न होए" (दानिय्येल 1:8)। उसकी पृथकता बाइबल आधारित थी क्योंकि उसके स्तर परमेश्‍वर के प्रकाशन मूसा की व्यवस्था के ऊपर आधारित थे।

व्यक्तिगत् पृथकता का आधुनिक उदाहरण ऐसे समारोहों में जाने के निर्णय से बचना है जहाँ पर शराब का सेवन किया जाता है। ऐसे निर्णय परिस्थिति जनक परीक्षा को ला सकते हैं (रोमियों 13:14), "सब प्रकार की बुराई" से बचना (1 थिस्सलुनीकियों 5:22), या फिर एक व्यक्तिगत निश्चय के ऊपर टिके रहना (रोमियों 14:5)।

बाइबल स्पष्टता के साथ शिक्षा देती है कि परमेश्‍वर की सन्तान को संसार से पृथक होना है। "अविश्‍वासियों के साथ असमान जुए में न जुतो, क्योंकि धार्मिकता और अधर्म का क्या मेल-जोल? या ज्योति और अन्धकार की क्या संगति? और मसीह का बलियाल के साथ क्या लगाव? या विश्‍वासियों के साथ अविश्‍वासियों का क्या नाता? और मूर्तियों के साथ परमेश्‍वर के मन्दिर का क्या सम्बन्ध? क्योंकि हम तो जीवते परमेश्‍वर के मन्दिर हैं; जैसा परमेश्‍वर ने कहा है: 'मैं उनमें बसूँगा और उनमें चला फिरा करूँगा; और मैं उनका परमेश्‍वर हूँगा, और वे मेरे लोग होंगे।' इसलिए प्रभु कहता है, उनके बीच में से निकलो और अलग रहो" (2 कुरिन्थियों 6:14-17; इसे भी देखें 1 पतरस 1:14-16)।

कलीसियाई पृथकता में एक कलीसिया का उनके धर्मविज्ञान या प्रथाओं के ऊपर, अन्य संगठनों के साथ उनके सम्बन्धों के निर्णय सम्मिलित होते हैं। पृथकतावाद के अर्थ शब्द "कलीसिया" में ही निहित हैं, जो यूनानी शब्द इक्कलीसिया से आता है जिसका अर्थ "बुलाए हुए लोगों के एक समूह" से है। पिरगमुन की कलीसिया को लिखे हुए यीशु के पत्र में, उसने उन लोगों को चेतावनी दी जो झूठे धर्मसिद्धान्तों की शिक्षा को सहन कर रहे थे (प्रकाशितवाक्य 2:14-15)। कलीसिया को झूठी शिक्षा से सम्बन्ध तोड़ना, इससे अलग होना था। कलीसियाई पृथकता का एक आधुनिक उदाहरण एक मसीही सम्प्रदाय का सार्वभौमिक कलीसियाई एकता अभियान के गठबंधनों के विरूद्ध हो सकता है जो कलीसिया को धर्मत्यागियों के साथ एकता में ले आएगा।

बाइबल आधारित पृथकता मसीही विश्‍वासियों से यह मांग नहीं करती है कि वे अविश्‍वासियों से कोई सम्बन्ध न रखें। यीशु की तरह, हमें पाप में भागीदार हुए बिना पापियों के साथ मित्रता को बनाए रखना चाहिए (लूका 7:34)। पौलुस पृथकतावाद के ऊपर एक सन्तुलित दृष्टिकोण को प्रदान करता है: "मैं ने अपनी पत्री में तुम्हें लिखा है कि व्यभिचारियों की संगति न करना - यह नहीं कि तुम बिल्कुल इस जगत के व्यभिचारियों, यह लोभियों, या अन्धेर करनेवालों, या मूर्तिपूजकों की संगति न करो; क्योंकि इस दशा में तो तुम्हें जगत में से निकल जाना ही पड़ता" (1 कुरिन्थियों 5:9-10)। दूसरे शब्दों में, हम संसार में तो हैं, परन्तु हम संसार के नहीं है।

हमें स्वयं की ज्योति को इस संसार के द्वारा मद्धम न करते हुए इस संसार की ज्योति के रूप में होना है। "तुम जगत की ज्योति हो। जो नगर पहाड़ पर बसा हुआ है वह छिप नहीं सकता। और लोग दीया जलाकर पैमाने पर नहीं परन्तु दीवट पर रखते हैं, तब उस से घर के सब लोगों को प्रकाश पहुँचता है। उसी प्रकार तुम्हारा उजियाला मनुष्यों के सामने चमके कि वह तुम्हारे भले कामों को देखकर तुम्हारे पिता की, जो स्वर्ग में है, बड़ाई करें (मत्ती 5:14-16)।



हिन्दी के मुख्य पृष्ठ पर वापस जाइए



बाइबल आधारित पृथकता क्या है?