हम कैसे भरोसा कर सकते हैं कि बाइबल की भविष्यद्वाणी वास्तव में भविष्य के लिए भविष्यद्वाणी कर सकती हैं?


प्रश्न: हम कैसे भरोसा कर सकते हैं कि बाइबल की भविष्यद्वाणी वास्तव में भविष्य के लिए भविष्यद्वाणी कर सकती हैं?

उत्तर:
बाइबल की भविष्यद्वाणी पर भरोसा करने का मुख्य कारण यह है कि यह पवित्रशास्त्र की तरह, ब्रह्माण्ड के निर्माता के द्वारा हमें दी गई थीं। यह ईश्‍वरीय प्रेरित, त्रुटिहीन, सिद्ध और सत्य है। परमेश्‍वर झूठ नहीं बोल सकता (तीतुस 1:2), और बाइबल की भविष्यद्वाणी की विश्‍वसनीयता परमेश्‍वर के चरित्र और ज्ञान में निहित है: "मैं तो अन्त की बात आदि से और प्राचीनकाल से उस बात को बताता आया हूँ जो अब तक नहीं हुई। मैं कहता हूँ, 'मेरी युक्‍ति स्थिर रहेगी और मैं अपनी इच्छा को पूरी करूँगा।" (यशायाह 46:10)।

बाइबल की भविष्यद्वाणी भविष्य के लिए भविष्यद्वाणी करती है और यह बताती है कि भविष्य की घटनाओं के सकारात्मक या नकारात्मक क्या परिणाम होंगे। भविष्यद्वाणी ऐसी घटनाओं की घोषणा कर सकती है, जो आनन्द और हर्ष या भय और भविष्य की विपदाओं को पहिले से जान लेने के पूर्वाभास को लाती हैं। जब परमेश्‍वर की भविष्यद्वाणियों को अनदेखा कर दिया जाता है, तो ऐसा सामान्य पर इसलिए होता है, क्योंकि श्रोतागण एक कारण या किसी अन्य कारण से जो कुछ सुना जाता है, उसे पसन्द नहीं करते हैं। बाइबल की भविष्यद्वाणी सामान्य रूप से बहुत अधिक विशेष होती है कि यह किसी व्यक्ति को या किसी घटना को कैसे प्रभावित करेगी। और यह सदैव हमारे भरोसे और हमारे विश्‍वास के लिये पूर्ण रीति से निर्भर होने के योग्य है। हम भविष्यद्वाणी के द्वारा अपने जीवन को आकार देने में सहायता प्राप्त कर सकते हैं, जिससे हमें अपने परमेश्‍वर की सेवा करने में दिशा मिलती है। भविष्यद्वाणी हमारे लिए सामर्थ्य और निर्देश का स्रोत होनी चाहिए। जो कुछ हम आज सुनते हैं, उसके विपरीत जिसे आज "भविष्यद्वाणी" कहा जाता है, दोनों कलीसिया और कलीसिया के बाहर, बाइबल की सच्ची भविष्यद्वाणी सदैव सटीक और यथार्थ में पूरी होती है। जो कुछ परमेश्‍वर ने भविष्यद्वाणी की है, वह सदैव प्रगट होता है (यशायाह 14:24)।

उत्पत्ति 6 में जल प्रलय की भविष्यद्वाणी एक उदाहरण है। परमेश्‍वर जल प्रलय के कारणों को बताता है, नूह के जीवन को बचाने के लिए जहाज बनाने के लिए विशेष निर्देश देता है और फिर इस विश्‍वव्यापी विपत्ति को लाता है। उत्पत्ति 37:5-10 में यूसुफ के स्वप्नों में भविष्यद्वाणियाँ सम्मिलित हैं, जो बाद में उनके जीवन में पूरी होती हैं। व्यवस्थाविवरण 18:18 कहता है, "मैं उनके लिये उनके भाइयों के बीच में से तेरे समान एक नबी [मूसा] को उत्पन्न करूँगा; और अपना वचन उसके मुँह में डालूँगा; और जिस जिस बात की मैं उसे आज्ञा दूँगा वही वह उनको कह सुनाएगा।" यह भविष्यद्वाणी प्रतिज्ञा किए हुए यहूदी मसीह, हमारे प्रभु यीशु की ओर संकेत करती है और प्रेरितों 3:22 में इसे उद्धृत किया गया है। यशायाह अध्याय 53 में यीशु मसीह के लिए एक मजबूर कर देने वाली भविष्यद्वाणी दी हुई है: उसकी युवावस्था, उसकी सेवकाई, उसका पाप-को उठा लेना और दु:ख, और उसके द्वारा स्वयं को भेंट स्वरूप दे देना इत्यादि। भजन संहिता 22 हमें राजा दाऊद के वर्णन में हमारे प्रभु के दुखों की एक और भविष्यद्वाणी मिलती है।

हमारे प्रभु के द्वारा की हुई भविष्यद्वाणियों में, जैसे मत्ती 24 में, उसने युद्ध, अकाल, भूकम्प, सताव, धर्मत्याग और विश्‍वासघात, और अन्त में अपनी वापसी के बारे में बातें की हैं। ये और अन्त-के-समय की अन्य भविष्यद्वाणियाँ पर उतना ही निर्भर हुआ जा सकता है जितना की जल प्रलय के लिए परमेश्‍वर के द्वारा दी हुई चेतावनी से भरी हुई भविष्यद्वाणी में भरोसा किया जाता हैं। अभी भी विनाशकारी घटनाओं का घटित होना शेष है, जो भविष्यद्वाणियों के रूप में 2 पतरस 3 और प्रकाशितवाक्य 6-16 में मिलते हैं। और 1 थिस्सलुनीकियों 4:13-18 में, मसीहियों को संकट के उस दिन से बचाए जाने की प्रतिज्ञा मिलती है। बाइबल की भविष्यद्वाणी हमें भविष्य के लिए एक यात्री मानचित्र को प्रदान करती है। मेघारोहण अर्थात् बादलों पर हवा में उठा लिए जाने की भविष्यद्वाणी को समझने में विफलता परमेश्‍वर के द्वारा दिए हुए सबसे महान उपहारों में से एक को खो देना होगा।

हम भरोसा कर सकते हैं कि परमेश्‍वर हम से प्रेम करता है और हमें अपने पुत्र को देता है (यूहन्ना 3:16)। निश्चित रूप से हम उसके ऊपर बाइबल की भविष्यद्वाणी के लेखक होने के रूप में भरोसा कर सकते हैं। हमारे प्रभु ने कहा, "मेरे पिता के घर में बहुत से रहने के स्थान हैं, यदि न होते तो मैं तुम से कह देता; क्योंकि मैं तुम्हारे लिये जगह तैयार करने जाता हूँ" (यूहन्ना 14:2)। फिर उसने हमें यह आश्‍वासन भी दिया है कि, "और यदि मैं जाकर तुम्हारे लिये जगह तैयार करूँ, तो फिर आकर तुम्हें अपने यहाँ ले जाऊँगा कि जहाँ मैं रहूँ वहाँ तुम भी रहो" (वचन 3)। यह सभी मसीही विश्‍वासियों के लिए एक प्रोत्साहन होना चाहिए।

अपने विश्‍वास को परमेश्‍वर की भविष्यद्वाणियों में रखें, ठीक वैसे ही जैसे आप अपने पुत्र में अपने विश्‍वास को रखते हैं। "क्योंकि परमेश्‍वर की जितनी प्रतिज्ञाएँ हैं, वे सब उसी में 'हाँ' के साथ हैं। इसलिये उसके द्वारा आमीन भी हुई कि हमारे द्वारा परमेश्‍वर की महिमा हो" (2 कुरिन्थियों 1:20)।

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