क्या आप मुझे बाइबल की मूलभूत समयरेखा दे सकते हैं?


प्रश्न: क्या आप मुझे बाइबल की मूलभूत समयरेखा दे सकते हैं?

उत्तर:
अपने सबसे अधिक मूलभूत अर्थ में, बाइबल की समयरेखा अन्तहीन और शाश्‍वतकालीन है, क्योंकि यह युग के अन्त तक की (उत्पत्ति 1:1-31 तिथि अज्ञात् है) सृष्टि का वर्णन करती है (मत्ती 28:20)। एक और व्यावहारिक दृष्टिकोण में, बाइबल की समयरेखा जिस पर अधिकांश विद्वान सहमत हैं, अब्राम की बुलाहट से आरम्भ होती है, जिसका नाम 2166 ईसा पूर्व में परमेश्‍वर (उत्पत्ति 17:4-6) के द्वारा "अब्राहम" रखा गया और प्रकाशितवाक्य की पुस्तक के लगभग 95 ईस्वी सन् में लिखे जाने के साथ समाप्त होता है।

अब्राहम के जन्म और प्रेरित यूहन्ना के द्वारा प्रकाशितवाक्य की पुस्तकों के लिखे जाने की अवधि के भीतर इतिहास पुराने और नए दोनों नियमों में सम्बोधित कई घटनाओं और लोगों के द्वारा आज भी हमें सहायता प्रदान करता है। उदाहरण के लिए, मूसा का जन्म 1526 ईसा पूर्व में हुआ और यहोशू लगभग 1406 ईसा पूर्व में प्रतिज्ञा की हुई भूमि में प्रवेश किया के अनुमान को देता है। राजा शाऊल के शासनकाल के आरम्भ में, इस्राएल के दस न्यायियों की अवधि लगभग 1052 ईसा पूर्व में समाप्त हो गई थी, जबकि अधिकांश विद्वान इस बात से सहमत हैं कि इनके लिए ठोस, ऐतिहासिक रूप से सत्यापित करने योग्य तिथि निर्धारिण सम्भव है।

राजा शाऊल, प्रसिद्ध राजा दाऊद — जिसके परिवार से यीशु मसीह का जन्म होगा- और दाऊद के पुत्र, बुद्धिमान राजा सुलैमान ने इस्राएल के एकजुट साम्राज्य की अध्यक्षता की। 931 ईसा पूर्व में, राजा सुलैमान के शासनकाल के बाद, इस्राएल को उत्तरी राज्य और दक्षिणी राज्य में विभाजित कर दिया गया था। 722 ईसा पूर्व उत्तरी राज्य के पतन और 586 ईसा पूर्व में यरूशलेम (दक्षिणी राज्य की राजधानी) के पतन तक विभिन्न राजाओं ने उत्तर (इस्राएल) और दक्षिण (यहूदा) के ऊपर शासन किया।

यहूदा का निर्वासन लगभग 538 ईसा पूर्व तक चलता रहा जब फारसी राजा कुस्रू ने एज्रा को इस्राएल लौटने और यरूशलेम (एज्रा 1) में परमेश्‍वर के लिए एक मन्दिर बनाने का निर्देश दिया। यहूदियों ने इस समय और लगभग 432 ईसा पूर्व के मध्य यरूशलेम को पुनः स्थापित किया, जब पुराने नियम की अन्तिम पुस्तक (मलाकी) को लिखा गया। इसके पश्‍चात् लगभग 430 वर्षों तक चलने वाले दोनों नियमों के मध्य का समय या शान्त समय की अवधि था।

लगभग 5 ईसा पूर्व में, इस्राएल का मसीहा अर्थात् यीशु मसीह का जन्म बेतलहेम में हुआ। 4 ईसा पूर्व में हेरोदेस महान की मृत्यु के पश्‍चात्, यीशु और उसके माता-पिता गलील में नासरत में लौट आए (मत्ती 2:19-23)। अगले दस वर्षों तक यीशु के जीवन में कुछ भी घटित होता हुआ लिपिबद्ध नहीं किया गया है, जब तक कि हम बारह-वर्षीय यीशु को मन्दिर में शिक्षकों को अपने ज्ञान से चौंकाते हुए नहीं देखते (लूका 2:40-52)। यीशु ने अपने बपतिस्मा को लेने से (मत्ती 3:13-17) आरम्भ होने के पश्‍चात् 27 ईस्वी सन् को अपनी सार्वजनिक सेवा आरम्भ की। यीशु की सेवा साढ़े तीन वर्षों तक चली।

29-30 ईस्वी सन् की अवधि में, यीशु ने अपना अधिकांश समय यहूदिया में प्रचार करने, उपदेश देने, शिक्षा देने, आश्‍चर्यकर्मों को प्रगट करने में व्यतीत किया — जिसमें मृतकों में से लाजर को जिलाना और शिष्यों को उसकी मृत्यु के पश्‍चात् अपने कार्य को आगे बढ़ने के सुसज्जित करने का कार्य सम्मिलित है। 30 वर्ष के आरम्भ में, उसने यरूशलेम की ओर बढ़ना आरम्भ किया। अपने जीवन के अन्तिम सप्ताह में, यीशु ने अपने मित्रों के साथ फसह मनाया, जहाँ उसने प्रभु भोज (लूका 22:14-20) की स्थापना की और अपने अन्तिम उपदेश को दिया। अन्त में, उसे धोखा दिया गया, गिरफ्तार किया गया, झूठी जाँच की गई, क्रूस पर चढ़ा गया और उसका पुनरुत्थान हो गया (मत्ती 26:36-28:8)। जी उठे हुए मसीह ने 40-दिनों की सेवकाई को पूरा किया, जो स्वर्ग में ऊपर जाने के साथ समाप्त हुई (प्रेरितों के काम 1:3-11; 1 कुरिन्थियों 15:6-7)।

यीशु को क्रूस पर चढ़ाए जाने और पुनरुत्थान के कुछ ही समय के पश्‍चात् ही, उसके प्रेरितों और अनुयायियों ने नए नियम को लिखा। नए नियम की पहली पुस्तक (या तो गलतियों या याकूब) को सबसे 49 ईस्वी सन् में या यीशु की मृत्यु और पुनरुत्थान के दो दशकों के भीतर लिखा गया था। इसका अर्थ यह हुआ कि मूल ग्रन्थों को प्रत्यक्षदर्शियों के द्वारा लिखा गया था, जो घटित हुए ताजे वृतान्त को प्रदान करते हैं। नए नियम की अन्तिम पुस्तक, प्रकाशितवाक्य को लगभग 95 ईस्वी सन् में यूहन्ना ने लिखा था।

नीचे बाइबल की प्रत्येक घटना की तिथि के साथ इसकी समयरेखा दी गई है। ध्यान दें: सभी तिथियाँ अनुमानित हैं। इसके अतिरिक्त, आरम्भिक मानवीय इतिहास (अब्राहम से पहले का) की तिथि पृथ्वी के युवा सृष्टिवाद के दृष्टिकोण को दर्शाती है।
4000 ईसा पूर्व (?) — संसार की सृष्टि
2344 ईसा पूर्व (?) — नूह और उसका जहाज
2166 ईसा पूर्व— अब्राम का बुलाया जाना
2141 ईसा पूर्व— इसहाक का जन्म
1526 ईसा पूर्व— मूसा का जन्म
1446 ईसा पूर्व— मिस्र से इस्राएल का निर्गमन
1406 ईसा पूर्व— प्रतिज्ञा की हुई भूमि में इस्राएल का प्रवेश करना
1420 ईसा पूर्व— यहोशू की मृत्यु
1052 ईसा पूर्व— राजा शाऊल का राज्याभिषेक
1011–971 ईसा पूर्व— राजा दाऊद का शासन
959 ईसा पूर्व — सुलैमान के मन्दिर का पूर्ण होना
931 ईसा पूर्व — राज्य का विभाजन होना
875–797 ईसा पूर्व — इस्राएल में एलिय्याह और एलीशा की सेवकाइयाँ
739–686 ईसा पूर्व — यहूदा में यशायाह की सेवकाई
722 ईसा पूर्व — अश्शूर के द्वारा उत्तरी राज्य को नाश कर दिया जाना
586 ईसा पूर्व — बेबीलोन के द्वारा दक्षिणी राज्य को नाश कर दिया जाना
538–445 ईसा पूर्व — बन्धुवाई से यहूदियों का यरूशलेम की ओर वापस लौटना
515 ईसा पूर्व — दूसरे मन्दिर का पूरा किया जाना
5 ईसा पूर्व — यीशु मसीह का जन्म
ईस्वी सन् 26–30 — मसीह की सेवकाई, उसकी मृत्यु के साथ और उसका जी उठना
ईस्वी सन् 34 — तरसुस के शाऊल का मन परिवर्तन
ईस्वी सन् 44–47 — पौलुस की पहली मिशनरी यात्रा
ईस्वी सन् 49 — यरूशलेम की परिषद्
ईस्वी सन् 60 — रोम में पौलुस को कारावास
ईस्वी सन् 95 — यूहन्ना को पतमुस में दर्शन होना और प्रकाशितवाक्य की पुस्तक का लिखा जाना

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