बाइबल के विभिन्न नाम और पदवियाँ कौन सी हैं?



प्रश्न: बाइबल के विभिन्न नाम और पदवियाँ कौन सी हैं?

उत्तर:
दोनों ही नए और पुराने नियम में बाइबल के दर्जनों से भी अधिक नाम और पदवियाँ पाई जाती हैं। निम्नलिखित सबसे प्रसिद्ध कुछ की एक सूची है:

व्यवस्था की पुस्तक (व्यवस्थाविवरण 31:26) – "-व्यवस्था की इस पुस्तक को लेकर अपने परमेश्‍वर यहोवा की वाचा के सन्दूक के पास रख दो, कि यह वहाँ तुझ पर साक्षी देती रहे।" बाइबल स्वयं को व्यवस्था की पुस्तक के रूप में वर्णित करती है, यह ऐसी व्यवस्था है जो हमें दास नहीं बनाती या परमेश्‍वर के साथ हमारे सम्बन्ध को बिगाड़ती नहीं है, परन्तु यह ऐसी व्यवस्था जो मसीह की ओर संकेत करती और परमेश्‍वर की धार्मिकता के प्रति हमारे ज्ञान को बढ़ाने में सहायता करती है।

सुसमाचार (रोमियों 1:16) – "क्योंकि मैं सुसमाचार से नहीं लजाता, इसलिये कि वह हर एक विश्‍वास करने वाले के लिए पहले तो यहूदी फिर यूनानी के लिए, उद्धार के निमित्त परमेश्‍वर की सामर्थ्य है...।" बाइबल हम पर सुसमाचार को प्रकाशित करती है, जो कि प्रभु यीशु मसीह के बारे में शुभ सन्देश है। परमेश्‍वर के पुत्र के द्वारा हमारे पाप क्षमा किए गए और हमें उद्धार प्रदान किया गया है।

पवित्र धर्मशास्त्र (रोमियों 1:2) – "जिसकी उसने पहले ही से अपने भविष्यद्वक्ताओं के द्वारा पवित्रशास्त्र में प्रतिज्ञा की थी।" बाइबल ऐसे शुद्ध लेखों को एक संग्रह है जो कि पवित्र और अधिकारिक हैं, क्योंकि वे परमेश्‍वर की प्रेरणा से रचे गए हैं।

यहोवा की व्यवस्था (भजन संहिता 19:7) – "यहोवा की व्यवस्था खरी है, वह प्राण को बहाल कर देती है, यहोवा के नियम विश्‍वासयोग्य हैं, साधारण लोगों को बुद्धिमान बना देते हैं।" बाइबल की व्यवस्था को किसी भी अन्य लेख के साथ भ्रमित नहीं होना चाहिए; वे प्रभु की आज्ञाएँ और केवल प्रभु ही की आज्ञाएँ हैं, न कि वे किसी मनुष्य के बड़बड़ वाली बातें हैं।

जीवित वचन (प्रेरितों के काम 7:38) – "यह वही है जिसने जंगल में कलीसिया के बीच उस स्वर्गदूत के साथ सीनै पहाड़ पर उससे बातें की और हमारे बापदादों के साथ था, उसी को जीवित वचन मिले कि हम तक पहुँचाए।" बाइबल एक जीवित पुस्तक है; इसकी प्रत्येक पुस्तक, अध्याय और वचन स्वयं के परमेश्‍वर के ज्ञान और बुद्धि के साथ जीवित है।

मसीह का सन्देश (कुलुस्सियों 3:16) – "मसीह के वचन को अपने हृदय में अधिकाई से बसने दो, और सिद्ध ज्ञान सहित एक दूसरे को सिखाओ और चिताओ और अपने अपने मन में अनुग्रह के साथ परमेश्‍वर के लिये भजन और स्तुतिगान और आत्मिक गीत गाओ।" मसीह का सन्देश पाप से छुटकारे का सन्देश है, केवल यही उद्धार के कार्य को पूरा कर सकता है।

पवित्रशास्त्र (2 तीमुथियुस 3:16) – "सम्पूर्ण पवित्रशास्त्र परमेश्‍वर की प्रेरणा से रचा गया है और उपदेश, और समझाने, और सुधारने, और धर्म की शिक्षा के लिये लाभदायक है।" परमेश्‍वर की प्रेरणा से रचे हुए होने के कारण, बाइबल किसी भी अन्य तरह की पुस्तकों के विपरीत लेखों का संग्रह है। यही केवल एक ऐसी पुस्तक है, जिसे मनुष्यों के द्वारा चलायमान होने या परमेश्‍वर के आत्मा के द्वारा "उभारे जाने" पर लिखा गया है (2 पतरस 1:21)।

पुस्तक (भजन संहिता 40:7) – "तब मैं ने कहा, देख मैं आया हूँ — क्योंकि पुस्तक में मेरे विषय में ऐसा ही लिखा हुआ है।" यीशु की भविष्यद्वाणी में, बाइबल स्वयं को एक पुस्तक के रूप में उद्धृत करती है, यह अनमोल ज्ञान के चर्मपत्र का एक ऐसा दस्तावेजीकरण है, जिसे एक पीढ़ी से दूसरी तक साझा किया जाना चाहिए।

आत्मा की तलवार (इफिसियों 6:17) – "आत्मा की तलवार को ले...जो परमेश्‍वर का वचन है।" एक तलवार की तरह ही, बाइबल किसी भी आक्रमण का सामना कर सकती है और परमेश्‍वर के सत्य के साथ वार पार छेद सकती है। इब्रानियों का लेखक यह है कि बाइबल किसी भी "दोधारी तलवार" से चोखी है क्योंकि यह "प्राण और आत्मा को, और गाँठ-गाँठ और गूदे-गूदे को अलग करके आर-पार छेदता है और मन की भावनाओं और विचारों को जाँचता है" (इब्रानियों 4:12)।

सत्य (यूहन्ना 17:17) – "सत्य के द्वारा उन्हें पवित्र कर; तेरा वचन सत्य है।" क्योंकि परमेश्‍वर का वचन बाइबल है, यह सत्य है। इसका प्रत्येक शब्द परमेश्‍वर के मन से आया है। क्योंकि वह सत्य है, इसलिए उसके वचन को भी सत्य होना चाहिए।

परमेश्‍वर का वचन (लूका 11:28) – "धन्य वे हैं जो परमेश्‍वर का वचन सुनते और मानते हैं।" बाइबल परमेश्‍वर के मुँह के शब्द हैं, क्योंकि वह बिल्कुल सीधे ही हम से इसकी प्रत्येक पुस्तक से बात करता है।

जीवन का वचन (फिलिप्पियों 2:16) – "…जीवन के वचन को दृढ़ता से थामे रहो।" बाइबल हम पर जीवन और मृत्यु के मध्य में अन्तर को प्रकाशित करती है — शाश्‍वतकालीन जीवन उनके सामने रखा गया है, जो यीशु मसीह को अपना उद्धारकर्ता करके ग्रहण करते हैं और शाश्‍वतकालीन मृत्यु उनके सामने रखी गई है जो उसने ग्रहण नहीं करते हैं।

परमेश्‍वर का वचन (भजन संहिता 12:6) – "परमेश्‍वर का वचन पवित्र है, उस चाँदी के समान जो भट्टी में मिट्टी पर ताई गई, और सात बार निर्मल की गई है।" बाइबल के वचन सिद्ध और बिना किसी त्रुटि के हैं क्योंकि ये वचन प्रभु यहोवा परमेश्‍वर की ओर से हैं, भविष्यद्वक्ताओं और प्रेरितों के द्वारा परमेश्‍वर के प्रेम और महिमा को प्रकाशित करने के लिए बोले गए हैं।

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