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प्रश्न

मुझे कैसे पता चलेगा कि बाइबल केवल पौराणिक कथाएँ नहीं हैं?

उत्तर


बाइबल की उत्पत्ति परमेश्‍वर के मन में हुई है, यह न केवल सभी पुस्तकों में अद्वितीय है, अपितु यह पृथ्वी के सभी खजाने से भी अद्वितीय है। बाइबल पाप में गिरी हुई मानव जाति को छुड़ाने के लिए परमेश्‍वर की शाश्‍वतकालीन योजना का प्रकाशन करती है। यद्यपि पूरे संसार में बाइबल की अरबों प्रतियाँ वितरित की गई हैं, तौभी भी कई लोग इसकी सच्चाई पर प्रश्‍न उठाते रहते हैं। क्या बाइबल पौराणिक कथाओं की एक पुस्तक है, या यह परमेश्‍वर का सच्चा, प्रेरित वचन है? यह प्रश्‍न प्रत्येक व्यक्ति के लिए सबसे बड़े महत्व का है, चाहे वह इसे जानते हो या नहीं।

कई धार्मिक ग्रन्थों का दावा है कि वे एक ईश्‍वरीय सन्देश को व्यक्त करते हैं। यद्यपि, बाइबल उनमें अकेली ही खड़ी है जिसमें परमेश्‍वर ने सन्देह का कोई स्थान नहीं छोड़ा है कि यह उसका लिखित वचन है या नहीं। यदि कोई व्यक्ति तथ्यों की जाँच करने के लिए एक ईमानदारी से भरे हुए प्रयास को करता है, तो वह पूरी बाइबल में निश्‍चित रूप से परमेश्‍वर की अमिट छाप को प्राप्त करेगा। वही मुँह जिसने सृष्टि के सारे अस्तित्व को रचना के लिए शब्दों को बोला, उसने ही हमें बाइबल भी दी है।

पौराणिक कथाओं के विपरीत, बाइबल में ऐतिहासिक रूपरेखा पाई जाती है। इसके पात्र वास्तविक घटनाएँ हैं, जो ऐतिहासिक घटनाओं के समय में सत्यापित स्थानों में ही घटित हुईं हैं। बाइबल में नबूकदनेस्सर, सन्हेरीब, क्रूसू, हेरोदेस, फेलिक्स, पिलातुस और कई अन्य ऐतिहासिक पात्रों को बताया गया है। इसका इतिहास मिस्र, हित्ती, फारसी, बेबीलोन और रोमी साम्राज्यों समेत कई देशों के अनुरूप पाया जाता है। बाइबल की घटनाएँ कनान, सीरिया, मिस्र, मेसोपोटामिया और अन्य जैसे भौगोलिक क्षेत्रों में घटित हुई हैं। यह सब प्रमाणित विवरण इस विचार का खण्डन कर देते हैं कि बाइबल केवल पौराणिक कथाओं में से एक है।

पौराणिक कथाओं के विपरीत, बाइबल में जीवविज्ञान, भूविज्ञान, खगोल विज्ञान और पुरातत्व विज्ञान जैसे विज्ञानों के द्वारा की गई कई पुष्टियाँ पाई जाती हैं। बाइबल के पुरातत्व विज्ञान का क्षेत्र का अध्ययन पिछली शताब्दी में आरम्भ हुआ है, जिस में सैकड़ों हजारों कलाकृतियों की खोज की गई है। केवल एक उदाहरण: किसी समय में, सन्देहवादियों के द्वारा हित्ती सभ्यता के सम्बन्ध में बाइबल के सन्दर्भों के मिथक होने के "प्रमाण" के रूप में उपयोग किया गया था। आज के दिनों के विज्ञान के अनुसार "हित्तियों" जैसे कभी भी कोई भी लोग नहीं रहे थे। यद्यपि, 1876 में खोजों की एक श्रृंखला को बनाया गया और अब यह श्रृंखला प्राचीन हित्ती सभ्यता के अस्तित्व के वृतान्त को अच्छी तरह से लिपिबद्ध करती है। पुरातत्व विज्ञान निरन्तर बाइबल की ऐतिहासिकता को बढ़ावा देता है। जैसा कि डॉ. हेनरी एम मॉरिस ने टिप्पणी की है, "आज उपलब्ध पुरातत्व विज्ञान की निर्विवाद खोज बाइबल को किसी भी समय गलत प्रमाणित नहीं करती है।"

पौराणिक कथाओं के विपरीत, बाइबल को इतिहास के रूप में लिखा गया है। लूका ने अपने सुसमाचार को "उन बातों का जो हमारे बीच में बीती हैं, इतिहास लिखने में हाथ लगाया है. . . जैसा कि उन्होंने जो पहले ही से इन बातों के देखनेवाले थे।" लूका सावधानी से दावे करता है कि उसने "उन सब बातों का सम्पूर्ण हाल आरम्भ से ठीक-ठीक हैं, और इसलिए लिखा कि "उन्हें. . . तेरे लिये क्रमानुसार लिखूँ, ताकि तू यह जान ले कि वे बातें जिनकी तू ने शिक्षा पाई है, कैसी अटल हैं" "(लूका 1:1-4 देखें)। क्या लूका ने अपने वृतान्त में आश्‍चर्यकर्मों को सम्मिलित किया है? हाँ, उनमें से कई को किया है। परन्तु वे प्रत्यक्षदर्शियों के द्वारा पुष्टि किए हुए आश्‍चर्यकर्म थे। दो हजार वर्षों पश्‍चात्, एक सन्देहवादी लूका के वृतान्त को "मिथक" कह सकता है, परन्तु प्रमाणों का मात्रा सन्देहवादियों के विरूद्ध है। वृतान्त स्वयं सावधानी से जाँचा हुआ ऐतिहासिक दस्तावेज है।

पौराणिक कथाओं के विपरीत, बाइबल में पूरी हो चुकी भविष्यद्वाणियों की एक चौंकाने वाली सँख्या पाई जाती है। मिथक भविष्यद्वाणी का परवाह नहीं करती हैं, परन्तु बाइबल का एक तिहाई भाग भविष्यद्वाणी है। 8,300 वचनों में 700 से अधिक भिन्न-भिन्न विषयों से सम्बन्धित बाइबल में 1,800 से अधिक भविष्यद्वाणियाँ पाई जाती हैं। अकेले पुराने नियम में ही यीशु मसीह से सम्बन्धित 300 से अधिक भविष्यद्वाणियाँ पाई जाती हैं, जिनमें से कई अद्भुत विशिष्टता के साथ हैं। कई भविष्यद्वाणियाँ पहले से ही पूरी हो चुकी हैं, और वे जैसा कहा गया था, वैसे ही सटीकता के साथ पूरी हुई हैं। भविष्यद्वाणियों की इस सँख्या को बताने वाले किसी भी व्यक्ति की गणितीय बाधाएँ और उनमें से प्रत्येक का पूरा होना मानवीय संभावना के क्षेत्र से परे प्रकाश-वर्षों की दूरी को बनाते हैं। इन आश्‍चर्यजनक भविष्यद्वाणियों को केवल उनके अलौकिक मार्गदर्शन के साथ ही पूरा किया जा सकता है, जो आरम्भ से अन्त तक दिखाई देता है (यशायाह 46:9-10)।

पौराणिक कथाओं के विपरीत, बाइबल ने अँसख्य जीवनों को परिवर्तित किया है। तौभी भी बहुत से लोग दूसरों के विचारों का उपयोग — अपनी सोच को प्रमाणित करने के लिए स्वीकार किए जाने की अनुमति देते हैं, जिन्होंने कभी भी बाइबल का अध्ययन ही नहीं किया है। हम में से प्रत्येक को स्वयं के लिए अध्ययन करने की आवश्यकता है। अध्ययन को अपनी जाँच बनाएँ। इस अद्भुत पुस्तक की गतिशीलता और परिवर्तनशीलता की सामर्थ्य के द्वारा बाइबल के नियमों और अनुभव से जीवन यापन करें। क्षमा पर दी हुई इसकी शिक्षाओं को लागू करें और देखें कि यह कैसे एक टूटे हुए सम्बन्ध को सुधार सकती है। इसके भण्डारीपन के सिद्धान्तों को लागू करें और अपनी वित्तीय स्थिति में सुधार को देखें। विश्‍वास करते हुए इसकी शिक्षा लागू करें और आपके जीवन में चाहे आप एक कठिन परीक्षा में से ही क्यों न जा रहे हों इसके अध्ययन से अपने मन में परमेश्‍वर की एक शान्त उपस्थिति को अनुभव करें। बाइबल काम करती है। इसका एक कारण यह है कि क्यों पूरे संसार के विभिन्न देशों में मसीही विश्‍वासी अपने प्रतिदिन के जीवन को खतरे में डाल देते हैं, ताकि दूसरों को इस असाधारण पुस्तक के द्वारा जीवन में दिए जाने वाले-सत्य को उजागर किया जा सके।

सबसे अन्त में, जो लोग परमेश्‍वर और उसके प्रकाशित वचन को अस्वीकृत करते हैं, वे घमण्ड के कारण ऐसा करते हैं। वे अपनी व्यक्तिगत् मान्यताओं में इतना अधिक निवेश कर रहे हैं कि वे ईमानदारी से मिलने वाले प्रमाणों की मात्रा को स्वीकार करने से इन्कार कर देते हैं। बाइबल को सत्य के रूप में स्वीकार करने के लिए उन्हें परमेश्‍वर और परमेश्‍वर के प्रति उनके दायित्व के बारे में गम्भीरता से सोचने की आवश्यकता है। बाइबल को सत्य के रूप में स्वीकार करने के लिए जीवन शैली में परिवर्तन की आवश्यकता हो सकती है। जैसा कि पास्टर इरविन लुटज़र ने कहा, "सच्चाई तो यह है कि कुछ लोगों के पास उदार मन है, विशेषकर धर्म के विषयों के बारे में. . .। इस कारण, विकृत धर्मसिद्धान्त और पूर्वाग्रह आसानी से एक पीढ़ी से दूसरे पीढ़ी तक चलते चले जाते हैं।"

लाखों लोग प्रति वर्ष अपनी अनन्तकालीन आत्माओं के ऊपर यह आशा करते हुए दाव लगा लेते हैं कि बाइबल सत्य नहीं है और यह पौराणिक कथाओं की पुस्तक के अतिरिक्त कुछ भी नहीं है, और परमेश्‍वर अस्तित्व में नहीं है। यह एक जोखिम से भरा जुआ है, और इस पर लगाया हुआ दाव बहुत ही बड़ा हैं। हम सभी को उदार मन से बाइबल पढ़ने के लिए आग्रह करते हैं; इसे अपने लिए बोलने दो, और आप पाएंगे कि परमेश्‍वर का वचन सत्य है (यूहन्ना 17:17)।

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