इसका क्या अर्थ है कि बाइबल अचूक है? बाइबल की अचूकता क्या है?


प्रश्न: इसका क्या अर्थ है कि बाइबल अचूक है? बाइबल की अचूकता क्या है?

उत्तर:
अचूक शब्द का अर्थ "त्रुटि में असमर्थ" होने से है। यदि कोई बात अचूक है, तो यह कभी गलत नहीं होता है और इस प्रकार पूरी तरह भरोसेमन्द होती है। शब्द त्रुटिहीनता को भी पवित्रशास्त्र पर भी लागू किया जाता है, जिसका अर्थ "त्रुटि से मुक्त" होने से है। सरल शब्दों में कहें तो, बाइबल कभी विफल नहीं होती है।

बाइबल 2 पतरस 1:19 में अचूक होने का दावा करती है, "हमारे पास जो भविष्यद्वक्‍ताओं का वचन है, वह इस घटना से दृढ़ ठहरा।" पतरस इस विवरण के साथ आगे बोलता है कि पवित्रशास्त्र कैसे प्राप्त हुआ: "पर पहले यह जान लो कि पवित्रशास्त्र की कोई भी भविष्यद्वाणी किसी के अपने ही विचारधारा के आधार पर पूर्ण नहीं होती" (2 पतरस 1:20–21)।

इसके अतिरिक्त, हम 2 तीमुथियुस 3: 16-17 में निहित अचूकता को भी देखते हैं, "सम्पूर्ण पवित्रशास्त्र परमेश्वर-की-प्रेरणा से रचा गया है" और परमेश्वर के सेवकों को प्रशिक्षित करने के लिए प्रभावशाली है जो "हर एक भले काम के लिये तत्पर" होते हैं। सच्चाई तो यह है कि परमेश्वर ने पवित्रशास्त्र की "प्रेरणा" को सुनिश्‍चित करता है कि बाइबल अचूक है, क्योंकि परमेश्वर गलती नहीं कर सकता है। सच्चाई तो यह है कि बाइबल सेवकाई के लिए "पूरी तरह से" परमेश्वर के सेवकों को सुसज्जित करती है, जो यह दिखाता है कि यह हमें सत्य की ओर मार्गदर्शन देती है, त्रुटि की ओर नहीं।

यदि परमेश्वर अचूक है, तो उसका वचन भी अचूक ही होगा। पवित्रशास्त्र की अचूकता का धर्मसिद्धान्त परमेश्वर के चरित्र की पूर्णता की इसी समझ के ऊपर आधारित है। परमेश्वर का वचन "खरा है, यह प्राण को बहाल कर देता" है (भजन संहिता 19:7) क्योंकि परमेश्वर स्वयं सिद्ध है। धर्मवैज्ञानिक रूप से कहना, परमेश्वर अपने वचन के साथ बड़ी घनिष्ठता के साथ जुड़ा हुआ है; प्रभु यीशु को "वचन" कहा जाता है (यूहन्ना 1:14)।

यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि अचूकता का धर्मसिद्धान्त केवल मूल दस्तावेजों से ही सम्बन्धित हैं। गलत अनुवाद, मुद्रण की त्रुटियाँ, और लेखन की त्रुटियाँ स्पष्ट रूप से मानवीय गलतियाँ हैं और अधिकांश समयों में आसानी से देखी जा सकती हैं। यद्यपि, बाइबल के लेखकों ने मूल रूप से इसे लिखा था, कि यह पूरी तरह से त्रुटि या चूक से मुक्त रहे, क्योंकि आत्मा ने उनके कार्य के ऊपर निरीक्षण किया था। परमेश्वर सच्चा और पूरी तरह विश्वासयोग्य है (यूहन्ना 14:6; 17:3), और ऐसे ही उसका वचन भी है (यूहन्ना 17:17)।

बाइबल भजन संहिता 12:6, भजन संहिता 19:7, नीतिवचन 30:5, और कई अन्य स्थानों में स्वयं के पूर्ण रूप से सिद्ध (आंशिक के विरूद्ध) होने के दावों को करती है। यह स्वयं में पूरी तरह से सत्य है और, वास्तव में, हमारा न्याय करती है (इस वाक्यांश के विपरीत क्रम में होने की अपेक्षा), "क्योंकि परमेश्‍वर का वचन जीवित, और प्रबल, और हर एक दोधारी तलवार से भी बहुत चोखा है; और प्राण और आत्मा को, और गाँठ-गाँठ और गूदे-गूदे को अलग करके आर-पार छेदता है और मन की भावनाओं और विचारों को जाँचता है" (इब्रानियों 4:12)।

बाइबल ही अपनी पूर्णता में परमेश्वर के एकमात्र उद्देश्य स्रोत है, जो हमें स्वयं और मानवता के लिए उसकी योजना के बारे में बताती है। परमेश्वर के अचूक वचन के रूप में, बाइबल हमारी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए अतुलनीय, आधिकारिक, विश्वासयोग्य और पर्याप्त है।

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