क्या यूहन्ना 3:5 यह शिक्षा देता है कि उद्धार के लिए बपतिस्मा लेना आवश्यक है?


प्रश्न: क्या यूहन्ना 3:5 यह शिक्षा देता है कि उद्धार के लिए बपतिस्मा लेना आवश्यक है?

उत्तर:
जब बात किसी भी एक वचन या संदर्भ की आती है, तब हम इसके द्वारा दी जाने वाली शिक्षा को परिष्कृत रीति से उस समय समझ पाते हैं, जब हम यह जानते हैं, कि बाइबल इस विषय पर सबसे पहले अन्य स्थानों पर क्या शिक्षा देती है। बपतिस्मे और उद्धार के विषय में, बाइबल स्पष्ट करती है कि उद्धार अनुग्रह के द्वारा यीशु मसीह में विश्‍वास किए जाने से आता है, यह किसी तरह के कामों, जिसमें बपतिस्मा भी सम्मिलित है (इफिसियों 2:8-9) का प्रतिफल नहीं है। इसलिए, कोई भी व्याख्या जो इस निष्कर्ष तक पहुँचती है, कि बपतिस्मा, या कोई भी अन्य कार्य, उद्धार के लिए आवश्यक है, एक गलत व्याख्या है। अधिक जानकारी के लिए हमारी वैबसाईट के पृष्ठ "क्या उद्धार केवल विश्‍वास से मिलता है, या विश्‍वास के साथ कामों के द्वारा" को देखें?"

यूहन्ना 3:3-7, "यीशु ने उस को उत्तर दिया; 'मैं तुझ से सच सच कहता हूँ, यदि कोई नये सिरे से न जन्मे तो परमेश्‍वर का राज्य देख नहीं सकता।' नीकुदेमुस ने उस से कहा, 'मनुष्य जब बूढ़ा हो गया, तो कैसे जन्म ले सकता है? क्या वह अपनी माता के गर्भ में दूसरी बार प्रवेश करके जन्म ले सकता है?' यीशु ने उत्तर दिया, 'मैं तुझ से सच सच कहता हूँ; जब तक कोई मनुष्य जल और आत्मा से न जन्मे तो वह परमेश्‍वर के राज्य में प्रवेश नहीं कर सकता। क्योंकि जो शरीर से जन्मा है, वह शरीर है; और जो आत्मा से जन्मा है, वह आत्मा है। अचम्भा न कर, कि मैंने तुझ से कहा; कि तुझे नये सिरे से जन्म लेना अवश्य है।'"

जब इस संदर्भ पर विचार किया जाता है, तब सबसे प्रथम ध्यान देने वाली महत्वपूर्ण बात यह है कि इस संदर्भ में कहीं भी बपितस्मे का उल्लेख नहीं हुआ है। जबकि बपतिस्मा इस अध्याय (यूहन्ना 3:22-30) में बाद में उल्लेखित हुआ है, परन्तु यह पूर्ण रीति से भिन्न पृष्ठभूमि (यरूशेलम की अपेक्षा यहूदिया) और नीकुदेमुस के साथ होने वाले विचार विमर्श से बिल्कुल भिन्न समय में उल्लेखित हुआ है। परन्तु यह कहना ठीक नहीं है कि नीकुदेमुस बपतिस्मे से परिचित नहीं था, क्योंकि यह अन्यजाति लोगों के द्वारा यहूदी धर्म में धर्मान्तरित होने के लिए उपयोग में लाई जाने वाली एक प्रथा के रूप में प्रचलित था या फिर वह इसलिए परिचित था, क्योंकि यह यूहन्ना बपतिस्मा देने वाले की सेवकाई का एक भाग रहा था। तथापि, इन वचनों को इसके संदर्भ में सामान्य रूप से पठ्न करने पर एक व्यक्ति को यहाँ पर तब तक अनुमान लगाने के लिए कोई भी एक कारण नहीं मिलता है कि यीशु यहाँ पर बपतिस्मे के बारे में बात कर रहे थे, जब तक कि कोई इसका पठ्न बपतिस्मे के विचार या धर्मविज्ञान की पूर्वधारणा के साथ न पढ़े। इन वचनों में बपतिस्मे का स्वचलित पठ्न सरलता से इसलिए पाया जाता है, क्योंकि इसमें "पानी" का उल्लेख अनपेक्षित रीति से हुआ है।

वे जो उद्धार के लिए बपतिस्मे को लिया जाना आवश्यक मानते हैं, वे "पानी से जन्मे" वाक्यांश को प्रमाण के रूप में देते हैं। जैसा कि एक व्यक्ति ने ऐसा कहा है, "यीशु ने इसका विवरण दिया और वह उसे स्पष्ट रीति से कहता है कि कैसे — पानी और आत्मा से जन्म लेना आवश्यक है। यह बपतिस्मे का पूर्ण विवरण है! यीशु बपतिस्मे का इससे अधिक सटीक स्पष्टीकरण और अधिक वर्णन नहीं दे सकता था।" तथापि, क्या यीशु वास्तव में यहीं कहना चाहता था कि एक व्यक्ति को उद्धार पाने के लिए बपतिस्मा लेना आवश्यक है, तब तो वह सरल रूप से ऐसे कह सकता था, "मैं तुझ से सच सच कहता हूँ, जब तक कोई बपतिस्मा न ले और आत्मा से न जन्मे वह परमेश्‍वर के राज्य में प्रवेश नहीं कर सकता है।" इसके अतिरिक्त, यदि यीशु ने ऐसा कोई कथन कहा होता, तब वह बाइबल के कई अन्य असँख्य संदर्भों के विरोध में होता जो ऐसा स्पष्ट करते हैं कि विश्‍वास के द्वारा ही उद्धार होता है (यूहन्ना 3:16; 3:36; इफिसियों 2:8-9; तीतुस 3:5)।

हमें इस सच्चाई पर से अपने ध्यान को नहीं हटाना चाहिए कि जब यीशु नीकुदेमुस से वार्तालाप कर रहा था, तब मसीही बपतिस्मे का विधि अपने प्रभाव में संचालित नहीं हुई थी। पवित्रशास्त्र की व्याख्या में की जाने वाली अंसगति को देखा जा सकता है, जब एक व्यक्ति यह कहता है कि उद्धार के लिए बपतिस्मा लेने में विश्‍वास किया जाना चाहिए, तब क्यों नहीं क्रूस के ऊपर लटके हुए डाकू को उद्धार पाने के लिए बपतिस्मा लेने की आवश्यकता नहीं पड़ी। इस प्रश्‍न का एक सामान्य उत्तर यह मिलता है, "क्रूस के ऊपर लटका हुआ डाकू अभी भी पुरानी वाचा के अधीन था और इसलिए वह इस बपतिस्मे के अधीन नहीं है। वह ठीक उसी तरह से बचाया गया है, जैसे पुराने नियम के अधीन रहने वाला कोई भी विश्‍वास बचाया गया है।" इस तरह से, अपने निष्कर्ष में, यही लोग जो यह कहते हैं कि उस डाकू को बपतिस्मा इसलिए लेने की आवश्यकता नहीं थी, क्योंकि वह "पुरानी वाचा के अधीन" था यूहन्ना 3:5 का उपयोग एक "प्रमाण" के रूप में करते हैं, कि उद्धार के लिए बपतिस्मे की आवश्यकता है। वे दृढ़ता से कहते हैं कि यीशु नीकुदेमुस से कह रहा है कि उसे उद्धार पाने के लिए बपतिस्मा लेने की आवश्यकता है, यद्यपि, वह भी तो पुरानी वाचा के अधीन था। यदि क्रूस पर लटका हुआ डाकू बिना बपतिस्मा लिए हुए बचाया जा सकता है (क्योंकि वह पुरानी वाचा के अधीन था), तब क्यों यीशु नीकुदेमुस (वह भी पुरानी वाचा के अधीन था) से कहता है कि उसे बपतिस्मा लेने की आवश्यकता है?

यदि "जल और आत्मा से जन्म लेना" बपतिस्मे को उद्धृत नहीं कर रहा है, तब इनका क्या अर्थ है? पारम्परिक रूप से, इस वाक्यांश के प्रति दो व्याख्याएँ पाई जाती हैं। पहली व्याख्या के अनुसार "जल से जन्म लेने" का उपयोग यीशु के द्वारा स्वाभाविक जन्म (गर्भ में बच्चे के चारों ओर रहने वाले उल्व अथवा भ्रूणावरण सम्बन्धी तरल पदार्थ के संकेत) से है, और आत्मा से जन्म लेने का संकेत आत्मिक जन्म से है। जबकि हो सकता है कि निश्चित रूप से "जल से जन्म" लेना की यह एक सम्भव व्याख्या हो और नीकुदेमुस के प्रश्‍न के उत्तर के संदर्भ के अनुरूप पाई जाती हो कि कैसे एक व्यक्ति "जब बूढ़ा हो जाता है" तो वह फिर से जन्म ले, तथापि, यह इस संदर्भ में दी हुई पृष्ठभूमि की सर्वोत्तम व्याख्या नहीं है। क्योंकि कुल मिलाकर, यीशु यहाँ पर स्वाभाविक रीति से जन्म लेना और आत्मिक रीति से जन्म लेने के मध्य में भिन्नता की बात नहीं कर रहा था। वह नीकुदेमुस को उसके द्वारा "ऊपर से जन्म लेने" या "नए सिरे से जन्म लेने" की वर्णन कर रहा था।

इस संदर्भ की दूसरी एक ऐसी और सामान्य व्याख्या जो इसके व्यापक संदर्भ के साथ सही रीति से इसके अनुरूप पाई जाती है, न केवल इस संदर्भ के अपितु पूरी बाइबल की भी है, वह यह है, जो यह देखती है कि यह वाक्यांश "जल और आत्मा से जन्म लेना" दोनों ही एक ही आत्मिक जन्म के अर्थ को देता है या इसका अर्थ यह है कि "नए सिरे से जन्म लेना" या "ऊपर से जन्म लेना के विभिन्न पहलूओं का विवरण है।" इस तरह, जब यीशु ने नीकुदेमुस से यह कहा कि उसे "जल और आत्मा से जन्म लेना आवश्यक" है, तब वह शाब्दिक रूप से जल को उद्धृत नहीं कर रहा था (उदाहरण के लिए, बपतिस्मा या गर्भ में रहने वाला उल्व अथवा भ्रूणावरण तरल पदार्थ), अपितु वह आत्मिक शुद्धि या नवीनीकरण की आवश्यकता को उद्धृत कर रहा था। पूरे के पूरे पुराने नियम (भजन संहिता 51:2,7; यहेजकेल 36:25) और नए नियम (यूहन्ना 13:10; 15:3; 1 कुरिन्थियों 6:11; इब्रानियों 10:22) में पानी को अक्सर आत्मिक शुद्धि या पवित्र आत्मा के द्वारा परमेश्‍वर के वचन के माध्यम से उद्धार को दिए जाने वाले क्षण में नवीनीकरण के रूप में चित्रित किया गया है (इफिसियों 5:26; तीतुस 3:5)।

बार्कले की दैनिक अध्ययन बाइबल इस विचारधारा को इस तरह से उद्धृत करती है: "यहाँ पर दो विचार पाए जाते हैं। पानी शुद्धिकरण का चिन्ह है। जब यीशु हमारे जीवन को अपने नियन्त्रण में ले लेता है, जब हम उसको हमारे पूरे मन से प्रेम करते हैं, तब अतीत के हमारे पाप क्षमा कर दिए जाते और भूला दिए जाते हैं। आत्मा सामर्थ्य का चिन्ह है। जब यीशु हमारे जीवनों को अपने नियन्त्रण में ले लेता है, तब न केवल अतीत को क्षमा किया और भूला दिया जाता है; यदि यह इतना ही होता, हम एक बार फिर से जीवन को उसी तरह की गड़बड़ी में डाल सकते हैं, अपितु इस जीवन में एक नई सामर्थ्य प्रवेश करती है, जो हमें इतना अधिक सशक्त करती है, जिसे हम स्वयं से कभी भी प्राप्त नहीं कर सकते हैं और इसे स्वयं के द्वारा करने पर भी यह कभी भी इस तरह के सशक्त रूप में नहीं आ सकता है। जल और आत्मा शुद्धिकरण और मसीह की सामर्थ्य प्रदान करने वाली शक्ति के लिए हैं, जो हमारे अतीत को मिटा देती है और भविष्य के लिए विजय को प्रदान करती है।"

इसलिए, इस वचन में "जल" का उल्लेख इस शाब्दिक रीति से भौतिक जल के लिए उपयोग नहीं किया गया है, अपितु यह "जीवित जल" के लिए किया गया है, जिसकी प्रतिज्ञा यीशु ने यूहन्ना 4:10 में कुएँ पर आई हुई स्त्री और यूहन्ना 7:37-39 यरूशलेम में रहने वाले लोगों से की थी। यह पवित्र आत्मा के द्वारा उत्पन्न होने वाला आन्तरिक शुद्धिकरण और नवीनीकरण है, जो एक मृत पापी में आत्मिक जीवन का संचार करता है (यहेजकेल 36:25-27; तीतुस 3:5)। यीशु इसी सत्य को यूहन्ना 3:7 में दुहराता है, जब वह यह कहता है कि एक व्यक्ति को नए सिरे से जन्म लेना आवश्यक है और यह कि यह जीवन का यह नवीनीकरण केवल पवित्र आत्मा के द्वारा ही उत्पन्न किया जा सकता है (यूहन्ना 3:8)।

ऐसे कई कारण हैं कि क्यों "जल और आत्मा से जन्म" वाक्यांश के सम्बन्ध में यही सही व्याख्या है। सबसे पहले, हमें ध्यान देना चाहिए कि "फिर से" के लिए अनुवादित यूनानी शब्द की दो संभव अर्थ पाए जाते हैं। प्रथम अर्थ "फिर से" है और दूसरा अर्थ "ऊपर से" है। नीकुदेमुस ने स्पष्ट रीति से इसके प्रथम अर्थ "फिर से" को ही समझा था और पाया कि यह विचार उसकी समझ से परे का है। यह वह कारण था कि क्यों वह यह नहीं समझ सका कि कैसे एक बड़ा व्यक्ति फिर से कैसे अपनी माता के गर्भ में प्रवेश कर सकता है और कैसे फिर से भौतिक रूप से जन्म ले सकता है। इसलिए, यीशु पुन: वही बात को दुहराता है, जिसे उसने अभी अभी नीकुदेमुस से कहा परन्तु दूसरे शब्दों में ताकि यह स्पष्ट हो जाए कि वह "ऊपर से जन्म" लेने को उद्धृत कर रहा था। दूसरे शब्दों में "ऊपर से जन्म लेना" और "जल और आत्मा से जन्म लेना" दोनों ही एक ही बात को दो तरीकों से कहता है।

दूसरा, इस बात पर ध्यान देना महत्वपूर्ण है कि इस वचन में प्रयुक्त हुई यूनानी व्याकरण ऐसा संकेत देती हुई आभासित होती है कि "जल से जन्म लेना" और "आत्मा से जन्म लेना" दो नहीं अपितु एक ही बात का विचार है। इसलिए, यह दो पृथक जन्मों के बारे में बोलना नहीं है, जैसा कि निकुदेमुस ने अनुचित रीति से सोचा था, अपितु यह एक जन्म है, जो कि "ऊपर से जन्म लेना" या ऐसा आत्मिक जन्म है, जिसे प्रत्येक व्यक्ति को "परमेश्‍वर के राज्य को देखने" के लिए लेना आवश्यक है। एक व्यक्ति के लिए "नए सिरे से जन्म लेना" या आत्मिक जन्म के अनुभव की आवश्यकता अति महत्वपूर्ण है, जिसे यीशु ने निकुदेमुस से कहा था, क्योंकि इसका वर्णन पवित्र शास्त्र के संदर्भों में तीन विभिन्न समयों में आवश्यकतानुसार किया गया है (यूहन्ना 3:3, 5, 7)।

तीसरा, जल को अकसर चिन्हात्मक रूप से बाइबल में पवित्र आत्मा के द्वारा एक विश्‍वास को पवित्रकरण करने के कार्य के लिए उपयोग किया गया है, जिसके द्वारा परमेश्‍वर एक विश्‍वासी के मन और प्राण को शुद्ध और पवित्र करता है। दोनों ही अर्थात् पुराने और नए नियम के बहुत से स्थानों में, पवित्र आत्मा के कार्य की तुलना जल के द्वारा की गई है (यशायाह 44:3; यूहन्ना 7:38-39)।

यीशु नीकुदेमुस को यूहन्ना 3:10 यह कहते हुए ताड़ना देते हैं, "क्या तू इस्राएलियों का गुरू होकर भी इन बातों को नहीं समझता है?" इसके निहितार्थ यह हैं कि यीशु ने नीकुदेमुस को अभी-अभी कुछ ऐसा कहा था, जिसे उसे अवश्य ही पता होना चाहिए और पुराने नियम से समझा हुआ होना चाहिए था। ऐसा क्या था कि नीकुदेमुस को, पुराने नियम का शिक्षक होते होते हुए पता और समझा हुआ होना चाहिए था? यह वह बात थी, जिसकी प्रतिज्ञा परमेश्‍वर ने पुराने नियम में की थी कि एक ऐसा समय आने वाला था जब परमेश्‍वर "तुम पर शुद्ध जल छिड़कूँगा, और तुम शुद्ध हो जाओगे, और मैं तुम को तुम्हारी सारी अशुद्धता और मूरतों से शुद्ध करूँगा। मैं तुम को नया मन दूँगा, और तुम्हारे भीतर नई आत्मा उत्पन्न करूँगा, और तुम्हारी देह में से पत्थर का हृदय निकालकर तुम को मांस का हृदय दूँगा। मैं अपना आत्मा तुम्हारे भीतर देकर ऐसा करूँगा कि तुम मेरी विधियों पर चलोगे और मेरे नियमों को मानकर उनके अनुसार करोगे" (यहेजकेल 36:25-27)। यीशु ने नीकुदेमुस को इसलिए ताड़ना दी क्योंकि वह पुराने नियम के नई वाचा सम्बन्धी एक कुँजी वचन को स्मरण करने और समझने में असफल हो गया था (यिर्मयाह 31:33)। निकेदुमस इसकी प्रतिज्ञा कर रहा होगा। यीशु को नीकुदेमुस को बपतिस्मा को न समझने के प्रति ताड़ना इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए देनी पड़ी कि बपतिस्मे का उल्लेख पुराने नियम में कहीं भी नहीं किया गया है?

जबकि यह वचन उद्धार के लिए बपतिस्मे को लिए जाने की शिक्षा नहीं देता है, हमें तथापि, बपतिस्मे की महत्वपूर्णता को अनदेखा नहीं करने में सावधान रहना चाहिए। बपतिस्मा एक व्यक्ति के द्वारा नए सिरे से जन्म लेने के समय जो कुछ घटित होता है, उसका एक चिन्ह या प्रतीक है। बपतिस्मे की महत्वपूर्णता को कम नहीं आँका जाना चाहिए या इसे निम्न स्तर पर होना नहीं सोचा जाना चाहिए। परन्तु फिर भी, बपतिस्मा हमें नहीं बचाता है। जो हमें बचाता है वह पवित्र आत्मा के द्वारा उस समय शुद्धीकरण को किए जाने वाला कार्य है, जब हमारा नए सिरे से जन्म होता है और जब हम उसके द्वारा नवीकृत किए जाते हैं (तीतुस 3:5)।

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