बाइबल ज्योतिष विज्ञान या राशिचक्र के बारे में क्या कहती है?


प्रश्न: बाइबल ज्योतिष विज्ञान या राशिचक्र के बारे में क्या कहती है?

उत्तर:
बाइबल में तारों के बारे में बहुत कुछ कहा गया है। तारों के प्रति हमारी सबसे अधिक मूल समझ यह है कि परमेश्‍वर ने ही इन्हें रचा है। वे उसकी सामर्थ्य और महिमा को दिखाते हैं। स्वर्ग परमेश्‍वर की "हस्तकला" है (भजन 8:3; 19:1)। उसने सभी तारों की गिनती की हुई है और उन्हें नाम दिया है (भजन 147:4)।

बाइबल साथ ही यह शिक्षा भी देती है कि परमेश्‍वर ने तारों को पहचानने योग्य समूहों में व्यवस्थित किया है, जिन्हें हम तारामण्डल या नक्षत्र-मण्डल या राशिचक्र कहते हैं। बाइबल में इन में से तीनों का उल्लेख करती है: अय्यूब 9: 9; 26:13; 38: 31-32; और आमोस 5:8 में वर्णित मृगशिरा, भालू (सप्तर्षि), और "धूर्त सर्प" (सम्भवत: कचपचिया)। यही सन्दर्भ तारों के सप्तर्षि के समूह (सात तारे) को भी सन्दर्भित करते हैं। परमेश्‍वर ही है, जो इन नक्षत्रों या राशियों के "को समूह में बाँध" देता है; वही है जो उनमें से प्रत्येक को "उसके समय के अनुसार" उत्पन्न करता है। अय्यूब 38:32 में, परमेश्‍वर ने "मज़्ज़ारोत" को जिसे सामान्य रूप से "तारामण्डल" या राशिचक्र के रूप में अनुवाद किया जाता है, कहा है। कई लोगों के द्वारा राशिचक्र के बारह राशियों या तारामण्डलों का सन्दर्भित होना सोचा गया है।

राशियों या तारामण्डलों के पथ का पता लगाया गया है और शताब्दियों से इनका अध्ययन किया जा रहा है। मिस्र और यूनानियों को राशिचक्र के बारे में पता था और इसे मसीह के आगमन से पहले की शताब्दियों वाले वसन्तों के आरम्भ की गणना करने के लिए उपयोग किया था। राशिचक्र के तारामण्डलों के अर्थ के बारे में बहुत कुछ लिखा गया है, जिसमें कई सिद्धान्त भी सम्मिलित हैं कि ये परमेश्‍वर की मुक्ति योजना को अपने में सम्मिलित करते हुए एक प्राचीन प्रदर्शन हैं। उदाहरण के लिए, राशि सिंह को यहूदा के गोत्र के सिंह के ईश्‍वरीय चित्रण के रूप में देखा जाता है (प्रकाशितवाक्य 5:5), और राशि कन्या उस कुँवारी का स्मरण कराती है, जो मसीह को जन्म देती है। यद्यपि, बाइबल इन या अन्य राशियों के लिए किसी भी तरह के "छिपे हुए अर्थ" का संकेत नहीं देती है।

बाइबल कहती है कि सूर्य और चन्द्रमा के साथ तारों को "चिन्ह" और "मौसम" की जानकारी के लिए दिया गया है (उत्पत्ति 1:14); अर्थात्, उनका कार्य हमारे लिए समय को बतलाना है। वे हमारे लिए दिशा सूचक "संकेतक" के अर्थ में "चिन्ह" भी हैं, और अभी तक के इतिहास में ग्रहों के पथ की जानकारी को प्राप्त करने के लिए उपयोग किए जाते हैं।

परमेश्‍वर ने तारों के द्वारा अब्राहम की सन्तान को अँसख्य होने की प्रतिज्ञा देने के लिए दृष्टान्त के रूप में उपयोग किया था (उत्पत्ति 15:5)। इस कारण, जब भी अब्राहम ने रात के आकाश में देखा, तो उसने परमेश्‍वर की सच्चाई और भलाई का स्मरण किया था। इस पृथ्वी के प्रति परमेश्‍वर का अन्तिम निर्णय तारों से सम्बन्धित खगोलीय घटनाओं के साथ आएगा (यशायाह 13:9-10; योएल 3:15; मत्ती 26:29)।

ज्योतिष विज्ञान मानवीय गंतव्य के ऊपर तारों (और ग्रहों) के द्वारा प्रभावित किए जाने वाले प्रभाव की "व्याख्या" है। यह एक गलत धारणा है। बेबीलोन के राजकीय ज्योतिषियों को परमेश्‍वर के भविष्यद्वक्ता दानिय्येल (दानिय्येल 1:20) के द्वारा शर्मिन्दा किया गया था और वे राजा के स्वप्न (दानिय्येल 2:27) की व्याख्या करने में असफल हुए थे। परमेश्‍वर ज्योतिषियों को उन लोगों के रूप में बताता है, जिन्हें परमेश्‍वर के दण्डस्वरूप भूसी के तरह जलाया जाएगा (यशायाह 47:13-14)। ज्योतिष विज्ञान को पवित्रशास्त्र के रूप में उपयोग करने के लिए स्पष्ट रूप से मना किया गया है (व्यवस्थाविवरण 18:10-14)। परमेश्‍वर ने इस्राएल की सन्तान को "स्वर्गीय गणों" की आराधना या सेवा करने के लिए मना किया था (व्यवस्थाविवरण 4:19)। तथापि, उनके इतिहास में कई बार, इस्राएल इसी पाप में गिरे (2 राजा 17:16 इसका एक उदाहरण है)। तारे के लिए की गई उनकी पूजा प्रत्येक समय उन्हें परमेश्‍वर के दण्ड के अधीन ले आई।

तारों को परमेश्‍वर की सामर्थ्य, बुद्धि और अनन्तता के ऊपर आश्चर्य से देखा चाहिए। हमें समय और स्थान की जानकारी रखने के लिए तारों का उपयोग करना चाहिए और हमें परमेश्‍वर की विश्‍वासयोग्यता, वाचा-पर बने रहने वाले परमेश्‍वर के स्वभाव को स्मरण दिलाना चाहिए। प्रत्येक समय, हम स्वर्ग के सृष्टिकर्ता को स्वीकार करते हैं। हमारा ज्ञान परमेश्‍वर की ओर से आता है, तारे नहीं (याकूब 1:5)। परमेश्‍वर का वचन, बाइबल, जीवन के माध्यम से हमारा मार्गदर्शन है (भजन 119:105)।

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