अभिषेक के तेल के बारे में बाइबल क्या कहती है?



प्रश्न: अभिषेक के तेल के बारे में बाइबल क्या कहती है?

उत्तर:
पवित्र शास्त्र में अभिषेक के बारे में 20 बार वर्णित किया गया है, इसका उपयोग पुराने नियम में महायाजक और उसके वंश के सिर के ऊपर अभिषेक करने के लिए डालने के लिए उपयोग किया जाता था और पवित्र स्थान के रूप में स्थान को चिह्नित करने के लिए मिलाप के तम्बू और उसके सामान के ऊपर छिड़कने और यहोवा परमेश्‍वर के लिए पृथक होने के लिए किया जाता था (निर्गमन 25:6); लैव्यवस्था 8:30; गिनती 4:16)। तीन बार इसे "पवित्र, अभिषेक का तेल" कह कर पुकारा गया है और यहूदियों को इसे व्यक्तिगत् उपयोग के लिए पुन: उत्पादन करने के लिए कठोरता से मना किया गया था (निर्गमन 30:32-33)। अभिषेक के तेल को बनाने के लिए विधि निर्गमन 30:23-24 में पाई जाती है और इसमें गन्धरस, दालचीनी और अन्य प्राकृतिक अवयवों को सम्मिलित किया जाता था। ऐसा कोई संकेत नहीं मिलता है कि तेल या सामग्री में कोई अलौकिक शक्ति थी। अपितु, तेल बनाने के लिए दिशानिर्देशों का पालन करना इस्राएलियों की आज्ञाकारिता के लिए जाँच थी और परमेश्‍वर की पूर्ण पवित्रता का प्रदर्शन करना था।

नए नियम के केवल चार ही वचन तेल के साथ अभिषेक किए जाने के अभ्यास का उल्लेख करते हैं और उनमें से कोई भी इसके उपयोग के लिए स्पष्टीकरण नहीं देता है। हम सन्दर्भ से अपने निष्कर्ष निकाल सकते हैं। मरकुस 6:13 में, शिष्यों ने बीमारों का अभिषेक किया और उन्हें चँगा कर दिया। लूका 7:46 में, मरियम के द्वारा यीशु के पैर को तेल से अभिषेक करने को आराधना के कार्य के साथ जोड़ दिया गया है। याकूब 5:14 में, कलीसिया के प्राचीन लोग बीमारों की चंगाई के लिए तेल मलने के लिए कहते हैं। इब्रानियों 1:8-9 में, परमेश्‍वर यीशु मसीह से कहता है कि वह स्वर्ग से एक विजेता के रूप में वापस लौट रहा है, "हे परमेश्‍वर, तेरा सिंहासन युगानुयुग रहेगा..." और परमेश्‍वर यीशु का अभिषेक "हर्षरूपी तेल करता है।"

क्या आज मसीही विश्‍वासियों को अभिषेक के तेल का उपयोग करना चाहिए? पवित्रशास्त्र में कुछ भी ऐसा नहीं है, जो यह आदेश देता है या जिससे यह पता चलता है कि हमें आज भी इसी तरह के तेल का उपयोग करना चाहिए, परन्तु इसके उपयोग में ऐसा कुछ भी नहीं है, जिससे इसे रोक देना चाहिए। बाइबल में अक्सर पवित्र आत्मा के प्रतीक के रूप में तेल का उपयोग किया गया है, जैसा कि बुद्धिमान और मूर्ख कुँवारी के दृष्टान्त में पाया जाता है (मत्ती 25:1-13)। वैसे भी, मसीहियों के आत्मा में ही आत्मा के तेल की उपस्थिति बनी ही रहती है, जो हमें सभी तरह के सत्य की ओर ले जाता है और हमें सदैव उसके अनुग्रह और शान्ति के साथ अभिषेक करता है। "परन्तु तुम्हारा तो उस पवित्र से अभिषेक हुआ है और तुम सब कुछ जानते हो" (1 यूहन्ना 2:20)।

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