क्यों परमेश्‍वर स्वर्गदूतों को पश्चाताप करने का अवसर नहीं देता है?



प्रश्न: क्यों परमेश्‍वर स्वर्गदूतों को पश्चाताप करने का अवसर नहीं देता है?

उत्तर:
बाइबल विशेष रूप से गिरे हुए स्वर्गदूतों को पश्चाताप करने के लिए अवसर को दिए जाने के विषय को सम्बोधित नहीं करती है, परन्तु हम जो कुछ बाइबल कहती है, उससे कुछ अंतर्दृष्टि प्राप्त कर सकते हैं। सबसे पहले, शैतान (लूसीफर) उच्च पद पर स्थापित स्वर्गदूतों में से एक था, कदातिच् सबसे उच्च पद पर (यहेजकेल 28:14)। लूसीफर — और अन्य सभी स्वर्गदूत — निरन्तर परमेश्‍वर की उपस्थिति में रहा करते थे और उन्हें परमेश्‍वर की महिमा का ज्ञान था। इसलिए, उनके पास परमेश्‍वर के विरूद्ध और परमेश्‍वर से फिर जाने का कोई बहाना नहीं था। वे परीक्षा में नहीं पड़े थे। परमेश्‍वर के विरूद्ध विद्रोह करने वाले लूसीफर और अन्य सभी स्वर्गदूतों ने वही किया जिसे वह बुराई के उच्चत्तम रूप में जानते थे।

दूसरा, परमेश्‍वर ने मनुष्य की तरह स्वर्गदूतों के छुटाकारे के लिए किसी तरह की कोई योजना का प्रबन्ध नहीं किया। मानव जाति के पाप में गिरने ने पाप के लिए एक प्रयाश्चित वाले बलिदान की अनिवार्यता को उत्पन्न कर दिया और परमेश्‍वर ने इस बलिदान का प्रबन्ध यीशु मसीह में किया। अपने अनुग्रह में, परमेश्‍वर ने मानव जाति को छुटकारा दिया और वह स्वयं के निमित्त महिमा को ले आया।

इस तरह के किसी भी बलिदान स्वर्गदूतों की योजना स्वर्गदूतों के लिए नहीं बनाई गई। इसके अतिरिक्त, परमेश्‍वर ने उन स्वर्गूतों को जो उसके प्रति विश्‍वासयोग्य बने रहने अपने "चुने हुए स्वर्गदूत" कह कर उद्धृत किया (2 तीमुथियुस 5:21)। हम चुने जाने के बाइबल आधारित धर्मसिद्धान्त से जानते हैं कि जिन्हें परमेश्‍वर ने उद्धार के लिए चुन लिया है, उन्हें वह बचाएगा, और कोई भी उन्हें परमेश्‍वर के प्रेम से अलग नहीं कर सकता है (रोमियों 8:38-39)। स्पष्ट है कि जिन स्वर्गदूतों ने विद्रोह किया वे परमेश्‍वर के "चुने हुए स्वर्गदूत" नहीं हैं।

अन्त में, बाइबल हमें यह विश्‍वास करने के लिए कोई भी कारण नहीं देती है कि स्वर्गदूत पश्चाताप करेंगे चाहे परमेश्‍वर उन्हें ऐसा करने के लिए अवसर ही क्यों न प्रदान कर दे (1 पतरस 5:8)। गिरे हुए स्वर्गदूत पूर्ण रीति से परमेश्‍वर का विरोध करने और परमेश्‍वर के लोगों के ऊपर आक्रमण करने के लिए समर्पित प्रतीत होते हैं। बाइबल कहती है कि परमेश्‍वर के दण्ड की गंभीरता एक व्यक्ति के ज्ञान के अनुसार भिन्न है (लूका 12:48)। गिरे हुए स्वर्गदूत, अपने बड़े ज्ञान के कारण, परमेश्‍वर के अत्याधिक क्रोध को प्राप्त करने के योग्य हैं।

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क्यों परमेश्‍वर स्वर्गदूतों को पश्चाताप करने का अवसर नहीं देता है?