क्या आज भी स्वर्गदूत लोगों के ऊपर प्रगट होते हैं?


प्रश्न: क्या आज भी स्वर्गदूत लोगों के ऊपर प्रगट होते हैं?

उत्तर:
बाइबल में स्वर्गदूत लोगों के ऊपर अप्रत्याशित और विभिन्न तरीकों से प्रकट हुए है। पवित्र शास्र के सामान्य पठन् से, एक व्यक्ति को यह विचार मिल सकता है कि स्वर्गदूतों का प्रगट होना सामान्य जैसा ही था, परन्तु ऐसी बात नहीं है। आज के समय स्वर्गदूतों के विषय में बढ़ती हुई रूचि पाई जाती है, और स्वर्गदूतों के प्रगट होने के कई वृतान्तों को लिपिबद्ध किया गया है। स्वर्गदूत लगभग हर एक धर्म का अंश हैं और सामान्यत: उनकी भूमिका को एक सन्देशवाहक के रूप में देखा जाता है। इस बात को निर्धारित करने के लिए क्या आज भी स्वर्गदूतों का प्रगटीकरण होता है, हमें सबसे पहले उनके प्राचीन समय में हुए प्रगटीकरणों के बाइबल आधारित दृष्टिकोणों को देखना चाहिए।

बाइबल में स्वर्गदूतों का सबसे पहला प्रगटीकरण उत्पत्ति 3:24 में मिलता है, जब आदम और हव्वा को अदन की वाटिका में निकाल दिया गया था। परमेश्‍वर ने बाटिका के चारों ओर करूबों को घूमनेवाली ज्वालामय तलवार के साथ इसके प्रवेश द्वार को बन्द रखने के लिए नियुक्त कर दिया था। इसके पश्चात् अगला प्रगटीकरण उत्पत्ति 16:7 में, लगभग 1,900 वर्षों के पश्चात् मिलता है। हाजिरा, अब्राहम की मिस्री सेविका ने उसके लिए इश्माएल को जन्म दिया था, को एक स्वर्गदूत की ओर से उसकी स्वामी सारै के पास वापस लौट जाने और उसके अधीन रहने के लिए निर्देश दिया गया था। अब्राहम के पास परमेश्‍वर और उसके दो स्वर्गदूत उत्पत्ति 18:2 में, मुलाकात करने के लिए तब आए थे, जब परमेश्‍वर ने उसे सदोम और अमोरा पर आने वाले विनाश की सूचना दी थी। इन्हीं दो स्वर्गदूतों ने लूत से भी मुलाकात की थी और उसे उस शहर से अपने परिवार सहित उसके नाश होने से पहले ही बचने के लिए भाग जाने का निर्देश दिया था (उत्पत्ति 19:1-11)। इन घटनाओं में स्वर्गदूत ने उन दुष्ट लोगों को अँधा करते हुए अलौकिक सामर्थ्य को भी प्रगट किया था, जो लूत को धमका रहे थे।

जब याकूब ने स्वर्गदूतों की भीड़ को देखा (उत्पत्ति 32:1), तो उसने उसे परमेश्‍वर की सेना के रूप में तुरन्त पहचान लिया था। गिनती 22:22 में, एक स्वर्गदूत ने अनाज्ञाकारी भविष्यद्वक्ता बिलाम का सामना किया था, परन्तु बिलाम ने सबसे पहले स्वर्गदूत को नहीं देखा था, यद्यपि उसके गदहे ने देख लिया था। मरियम के पास एक स्वर्गदूत यह बताने के लिए आया था कि वह मसीह की माता बनेगी, और यूसुफ को एक स्वर्गदूत के द्वारा मरियम को अपना लेने की चेतावनी दी गई और यीशु को मिस्र में ले जाते हुए उसे हेरोदेस की राजाज्ञा से सुरक्षित रखने के लिए निर्देश दिया गया था (मत्ती 2:13)। जब एक स्वर्गदूत प्रगट होता है, तो उसे देखने वाले अक्सर डर से भयभीत हो जाते हैं (न्यायियों 6:22; 1 इतिहास 21:30; मत्ती 28:5)। स्वर्गदूत परमेश्‍वर की ओर से उसके सन्देश को देते और उसके प्रयोजन को पूरा करते हैं, कई बार वे ऐसा अलौकिक तरीकों से भी करते हैं। प्रत्येक घटना में, स्वर्गदूत लोगों को परमेश्‍वर की ओर संकेत करते हैं और उसे ही महिमा देते हैं। पवित्र स्वर्गदूत स्वयं के लिए आराधना को स्वीकार करने से मना कर देते हैं (प्रकाशितवाक्य 22:8-9)।

आधुनिक रिर्पोटों के अनुसार, स्वर्गदूतों का प्रगटीकरण कई स्वरूपों में हो रहा है। कुछ घटनाओं में, एक अज्ञात् प्राणी किसी गम्भीर दुर्घटना या मृत्यु के होने को रोक देता है और तत्पश्चात् लुप्त हो जाता है। अन्य घटनाओं में, अस्थाई रूप से एक पंख या श्वेत-वस्त्र धारी को देखा जाता है और वह इसके पश्चात् चला जाता है। जिस व्यक्ति ने स्वर्गदूत को देखा होता है, वह अक्सर परमेश्‍वर की उपस्थिति के आश्‍वासन और शान्ति की भावना के साथ पीछे रह जाता है। इस तरह के प्रगटीकरण प्रेरितों 27:23 में वर्णित बाइबल आधारित पद्धति के साथ सहमत दिखाई देते हुए प्रतीत होते हैं।

प्रकटीकरण का अन्य प्रकार यह है कि कई बार आज के समय में यह रिर्पोट आई है कि "स्वर्गदूत समूह" में होते हैं। लूका 2:13 में, चरवाहों के सामने स्वर्गीय समूह प्रगट हुआ था, जब उन्हें यीशु के जन्म के बारे में बताया गया था। कुछ लोगों ने आराधना के स्थान में इसी तरह के अनुभवों के होने का वर्णन किया है। उनका यह अनुभव दिए हुए नमूने के साथ सही नहीं बैठता है, क्योंकि यह विशेष रूप से आत्मिक उत्साह की भावना प्रदान करने को छोड़ कोई अन्य उद्देश्य पूरा नहीं करता है। लूका के सुसमाचार में स्वर्गदूतों का समूह एक विशिष्ट समाचार को सुना रहे थे।

प्रकटीकरण के तीसरे प्रकार में केवल शारीरिक भावना ही सम्मिलित है। बुजुर्ग लोगों ने अक्सर यह वर्णित किया है कि उनके तीव्र अकेलपन के समय में मानो हाथों या पंखों ने उन्हें चारों ओर से लपेटे हुआ था। परमेश्‍वर निश्चित रूप से सारी सांत्वना का ईश्‍वर है, और पवित्र शास्त्र परमेश्‍वर को अपने पंखों के साथ स्वयं को ढकते हुए वर्णित करता है (भजन 91: 4)। इस तरह के वर्णन पँखों द्वारा ढके जाने के उदाहरणों के अनुरूप सही होगी।

जैसे वह सदैव से कार्यरत् था, वैसे अब भी परमेश्‍वर संसार में कार्यरत् है, और निश्चित रूप से उसके स्वर्गदूत भी कार्यरत् हैं। ठीक वैसे ही जैसे स्वर्गदूतों ने परमेश्‍वर के लोगों को अतीत में सुरक्षा प्रदान किया, हम आश्‍वस्त हो सकते हैं कि वे आज भी सुरक्षा प्रदान करते हैं। इब्रानियों 13:2 कहता है, "अतिथि-सत्कार करना न भूलना, क्योंकि इसके द्वारा कुछ लोगों ने अनजाने में स्वर्गदूतों का आदर-सत्कार किया है।" जब हम परमेश्‍वर की आज्ञा का पालन करते हैं, तो इस बात की सम्भावना अत्यधिक है कि हमारा सामना उसके स्वर्गदूतों से हो जाए, भले हम इसे न पहचान पाएँ। विशेष परिस्थितियों में, परमेश्‍वर ने उसके लोगों को उसके अदृश्य स्वर्गदूतों को देखने की अनुमति प्रदान की है, ताकि परमेश्‍वर के लोग उसकी सेवा में निरन्तर लगे रहें और इसे करने के लिए उत्साहित रहें (2 राजा 6:16-17)।

हमें स्वर्गीय प्राणियों के लिए पवित्र शास्त्र में दी हुई चेतावनियों पर अवश्य ही ध्यान देना चाहिए: यहाँ पर पाप में गिरे हुए स्वर्गदूत भी हैं, जो शैतान के लिए कार्य करते हैं, वे ऐसा कुछ भी कार्य करेंगे जो नाश करता हो और हमें नष्ट कर देंगे। गलातियों 1:8 हमें स्वर्गदूत के द्वारा सुनाए जाने वाले किसी भी "नए" सुसमाचार के विरूद्ध चेतावनी देता है। कुलुस्सियों 2:18 हमें स्वर्गदूतों की आराधना के विरूद्ध चेतावनी देता है। बाइबल में जब कभी भी लोगों ने स्वर्गदूतों के सामने दण्डवत् किया है, तब इन प्राणियों ने पूर्ण दृढ़ता के साथ आराधना को स्वीकार करने के लिए इन्कार कर दिया है। जो कोई भी स्वर्गदूत आराधना को स्वीकार करता है, और प्रभु यीशु को महिमा नहीं देता है, वह एक ठग है। दूसरा कुरिन्थियों 11:14-15 कहता है कि शैतान और उसके स्वर्गदूत ज्योर्तिमय स्वर्गदूत का रूप धारण करते हुए धोखा देते और किसी भी नाश की ओर ले जाते हैं, जो उनकी सुनता है।

हमें इस ज्ञान के द्वारा प्रोत्साहित किया गया है कि परमेश्‍वर के स्वर्गदूत कार्य कर रहे हैं। विशेष परिस्थितियों में, हम स्वयं ही उनसे होने वाली व्यक्तिगत् मुलाकात का कारण बन सकते हैं। तथापि, इस ज्ञान से भी कहीं बढ़कर हमारे पास वह ज्ञान है, जिसे स्वयं यीशु ने कहा है, "और देखो, मैं जगत के अन्त तक सदा तुम्हारे संग हूँ" (मत्ती 28:20)। यीशु, जिसने स्वर्गदूतों की रचना की है और जो आराधना को स्वीकार करता है, ने हमें हमारी परीक्षा के समय अपनी उपस्थिति के होने की प्रतिज्ञा की है।

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