ब्रह्माण्ड की आयु कितनी है?


प्रश्न: ब्रह्माण्ड की आयु कितनी है?

उत्तर:
उत्पत्ति 1:1 में, हमें बताया गया है कि "आदि में परमेश्‍वर ने आकाश और पृथ्वी की सृष्टि की।" बाइबल सृष्टि के होने की कोई तिथि नहीं देता है; एक मात्र संकेत यही पाया जाता है कि इसकी उत्पत्ति "आदि में" हुई थी। इब्रानी में, शब्द "आदि" के लिए बेरेशथ आया है, जिसका अर्थ शाब्दिक रूप से "सिर" है।

सभी मसीही विश्‍वासी सहमत हैं कि परमेश्‍वर ने ब्रह्माण्ड को रचा है। मसीही विश्‍वासियों में उत्पत्ति अध्याय 1 में दिए शब्द दिन (इब्रानी भाषा में योम) की व्याख्या के दृष्टिकोण में भिन्नताएँ पाई जाती हैं। जो लोग शाब्दिक रूप से चौबीस घण्टे के "दिन" की मान्यता को स्वीकार करते हैं, तुलनात्मक रूप से वे पृथ्वी के युवा होने पर विश्‍वास करते हैं; जो लोग एक गैर-शाब्दिक, काव्यात्मक रूप से "दिन" की मान्यता को स्वीकार करते हैं, वे पृथ्वी के बहुत अधिक पुराना होने पर विश्‍वास करते हैं।

कई विद्वानों और मसीही विश्‍वासी वैज्ञानिकों की मान्यता है कि उत्पत्ति में शब्द दिन एक शाब्दिक, चौबीस घण्टे को उद्धृत करता है। यह उत्पत्ति 1 में आए हुए कथन "तथा साँझ हुई फिर भोर हुआ" की पुनरावृत्ति की व्याख्या करेगा। एक साँझ और एक सुबह एक दिन (यहूदी गणना में, एक नया दिन सूर्यास्त में आरम्भ होता है) को निर्मित करते हैं। अन्य लोग पवित्रशास्त्र में किसी अन्य स्थान पर उपयोग हुए शब्द दिन के गैर-शाब्दिक होने को इंगित करते हैं, उदाहरण के लिए, "प्रभु का दिन", और तर्क देते हैं कि साँझ से लेकर सुबह एक दिन के बराबर नहीं होता है और इसलिए इसके स्थान पर समय की अवधि के आरम्भ और अन्त को आलंकारिक रूप में समझा जाना चाहिए।

यदि उत्पत्ति अध्याय 5 और 11 में वंशावलियाँ और पुराने नियम के शेष इतिहास की कठोरता से व्याख्या की जाती है, तो आदम की सृष्टि लगभग 4000 ईसा पूर्व में हुई हो सकती है। परन्तु यह केवल आदम की सृष्टि की तिथि ही होगी, यह आवश्यक नहीं है कि यही पृथ्वी की सृष्टि, या ब्रह्माण्ड की सृष्टि की तिथि हो। उत्पत्ति 1 के वृतान्त में समय के "अन्तराल" की सम्भावना भी पाई जाती है।

यह सब कहने का अर्थ यह है, कि बाइबल स्पष्ट रूप से ब्रह्माण्ड की आयु नहीं बताती है। एक सेवाकाई के रूप में gotquestions एक युवा पृथ्वी के होने के दृष्टिकोण को अपनाती है और विश्‍वास करती है कि उत्पत्ति 1 में शाब्दिक रूप से चौबीस घण्टे की व्याख्या सर्वोत्तम है। साथ ही, इस विचार के साथ हमारी गम्भीर असहमति नहीं है कि पृथ्वी और ब्रह्माण्ड 6,000 वर्षों से अधिक पुरानी हो सकती है। चाहे भिन्नताओं को अन्तरालों के द्वारा समझाया गया है या परमेश्‍वर के द्वारा "आयु के प्रगटीकरण" या किसी अन्य कारक के साथ – एक ऐसे ब्रह्माण्ड की रचना की गई हो – जो 6,000 से अधिक वर्षों - पुराने ब्रह्माण्ड की व्याख्या करती हो, तथापि यह बाइबल के प्रति महत्वपूर्ण या धार्मिक समस्या को उत्पन्न नहीं करती हैं।

अन्त में, ब्रह्माण्ड की आयु पवित्रशास्त्र या विज्ञान के द्वारा प्रमाणित नहीं की जा सकती है। चाहे ब्रह्माण्ड 6,000 वर्षों या अरबों वर्षों ही पुराना क्यों नहीं है, दोनों ही दृष्टिकोण (और इन के बीच में सब कुछ) विश्‍वास और धारणाओं के ऊपर ही टिके हुए हैं। उन लोगों के उद्देश्यों के ऊपर प्रश्न करना सदैव बुद्धिमानी है, जो तर्क देते हैं कि पृथ्वी अरबों वर्ष पुरानी होनी चाहिए, विशेषकर जब बाइबल इस तरह के पूर्वनिश्‍चितता का समर्थन नहीं करती है।

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