अगापे प्रेम क्या है?


प्रश्न: अगापे प्रेम क्या है?

उत्तर:
यूनानी शब्द अगापे को अक्सर नए नियम में "प्रेम" कहा जाता है। "अगापे प्रेम" अन्य प्रकारों के प्रेम से कैसे भिन्न है? अगापे प्रेम का सार सद्भाव, परोपकार और प्रेम के होने में स्वेच्छा के साथ हर्ष का पाया जाना है। नया नियम में रोमांटिक अर्थात् रोमानी या यौन सम्बन्धी प्रेम का वर्णन करने के लिए अगापे का उपयोग नहीं किया जाता है। न ही यह घनिष्ठ मित्रता या भाईचारे के प्रेम का उल्लेख करता है, जिसके लिए यूनानी शब्द फिलीया का उपयोग किया जाता है। अगापे प्रेम में विश्वासयोग्यता, प्रतिबद्धता और इच्छा की एक गतिविधि सम्मिलित है। यह अपने साहसी नैतिक स्वभाव और दृढ़ चरित्र के कारण अन्य प्रकारों के प्रेम से भिन्न है। अगापे प्रेम को 1 कुरिन्थियों 13 में सुन्दरता के साथ वर्णित किया गया है।

नये नियम के बाहर, शब्द अगापे का उपयोग विभिन्न सन्दर्भों में किया जाता है, परन्तु नए नियम में इसका एक अलग ही अर्थ है। अगापे का उपयोग परमेश्वर के और परमेश्वर की ओर आने वाले प्रेम के लिए वर्णन करने के लिए किया जाता है, जिसका स्वभाव ही प्रेम है: "... परमेश्वर प्रेम है" (1 यूहन्ना 4:8)। परमेश्वर केवल प्रेम ही नहीं करता है; अपितु वह स्वयं प्रेम है। सब कुछ जिसे परमेश्वर करता है, वह उसके प्रेम से बहता है।अगापे का उपयोग हमारे परमेश्वर के द्वारा हमें प्रेम करने (लूका 10:27), एक सेवक का अपने मालिक के प्रति विश्वासयोग्यता से भरा हुआ सम्मान (मत्ती 6:24), और एक व्यक्ति का इस संसार के प्रति लगाव (यूहन्ना 3:19) के वर्णन के लिए भी किया जाता है।

प्रेम का वह प्रकार जो परमेश्वर की विशेषता को प्रगट करता है, वह एक दु:खद, भावुक भाव नहीं है, जैसा कि हम अक्सर चित्रित करते हैं। परमेश्वर प्रेम करता है, क्योंकि यह उसका स्वभाव है और उसके होने की अभिव्यक्ति है। वह न प्रेम किए जाने वाले और प्रेम के योग्य न होने वालों को भी प्रेम करता है, इसलिए नहीं कि हम प्रेम करने के योग्य हैं या इसलिए नहीं कि हमारे पास कोई उत्कृष्टता है, अपितु इसलिए कि प्रेम करना उसका स्वभाव है और उसे अपने स्वभाव के प्रति सच्चा होना चाहिए।

अगापे प्रेम सदैव उसके द्वारा दिखाया जाता है, जिस गतिविधि को यह करता है। परमेश्वर का प्रेम सबसे स्पष्ट रूप में क्रूस के ऊपर प्रदर्शित होता है। "परन्तु परमेश्‍वर ने जो दया का धनी है, अपने उस बड़े प्रेम के कारण जिस से उसने हम से प्रेम किया, जब हम अपराधों के कारण मरे हुए थे तो हमें मसीह के साथ जिलाया - अनुग्रह ही से तुम्हारा उद्धार हुआ है" (इफिसियों 2:4–5)। हम इस तरह के बलिदान के योग्य नहीं थे, "परन्तु परमेश्‍वर हम पर अपने प्रेम की भलाई इस रीति से प्रगट करता है: कि जब हम पापी ही थे, तभी मसीह हमारे लिये मरा" (रोमियों 5:8)। परमेश्वर का अगापे प्रेम शर्तहीन, कृपा से पूर्ण है, और वह जिसे प्रेम करता है, उसकी निरन्तर भलाई की खोज करता है। बाइबल कहती है कि हम उसके बहुतायत के अगापे प्रेम के अयोग्य प्राप्तकर्ता हैं (1 यूहन्ना 3:1)। परमेश्वर का अगापे प्रेम उन लोगों के लिए परमेश्वर के पुत्र के बलिदान का कारण बनता है, जिन्हें वह प्रेम करता है (यूहन्ना 3:16-18)।

हमें दूसरों को अगापे प्रेम के साथ प्रेम करना है, चाहे वे साथी विश्वासी हों (यूहन्ना 13:34) या कठोर शत्रु (मत्ती 5:44)। यीशु ने अच्छे सामरी के दृष्टान्त को दूसरों के लिए बलिदान दिए जाने के उदाहरण के रूप में दिया, यहाँ तक कि उन लोगों के लिए भी जो हमारी कुछ चिन्ता नहीं करते। मसीह के द्वारा आदर्श के रूप में प्रस्तुत किया गया अगापे प्रेम भावना के ऊपर आधारित नहीं है; अपितु, यह इच्छा की दृढ़ता के द्वारा निर्धारित किया गया है, यह दूसरों की भलाई को स्वयं से पहले किए जाने के प्रति हर्षित संकल्प है।

अगापे प्रेम हमारे पास स्वाभाविक रूप से नहीं आता है। पाप में पतित अपने स्वभाव के कारण, हम इस तरह के प्रेम को उत्पन्न करने में असमर्थ हैं। यदि हमें वैसे प्रेम करना, जैसा कि परमेश्वर हम से प्रेम करता है, तो यह प्रेम — अगापे प्रेम है — जो केवल इसके स्रोत से ही आ सकता है। यह वैसा प्रेम जिसे "पवित्र आत्मा ने जो हमें दिया गया है, उसके द्वारा परमेश्‍वर का प्रेम हमारे मन में डाला गया है" यह तब होता है, जब हम उसकी सन्तान बन जाते हैं (रोमियों 5:5; की तुलना गलातियों 5:22 से करें)। “हम ने प्रेम इसी से जाना कि उसने हमारे लिये अपने प्राण दे दिए; और हमें भी भाइयों के लिये प्राण देना चाहिए”(1 यूहन्ना 3:16)। परमेश्वर के द्वारा हमें प्रति प्रेम करने के कारण, हम एक दूसरे से प्रेम करने में सक्षम हो जाते हैं।

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