अब्राहम की वाचा क्या है?


प्रश्न: अब्राहम की वाचा क्या है?

उत्तर:
एक वाचा दो पक्षों के मध्य में किया गया एक समझौता होता है। वाचाओं के दो मूल प्रकार: शर्तसहित और शर्तरहित हैं। एक शर्तसहित या द्विपक्षीय वाचा एक ऐसा समझौता होता है, जो कि दोनों पक्षों के द्वारा पूरा किए जाने के लिए बाध्यकारी होता है। दोनों पक्ष कुछ शर्तों को पूरा करने के लिए सहमत होते हैं। यदि कोई भी पक्ष अपने उत्तरदायित्वों को पूरा करने में विफल रहता है, तो वाचा टूट जाती है, और किसी भी पक्ष को वाचा की अपेक्षाओं को पूरा नहीं करना होता है। शर्तरहित या एकपक्षीय वाचा दो पक्षों के मध्य किया गया एक समझौता है, परन्तु दोनों पक्षों में से केवल एक को ही इसकी शर्तों को पूरा करना होता है। दूसरे पक्ष के लिए शर्तों को पूरा करना आवश्यक नहीं है।

अब्राहम की वाचा एक बिना शर्त की वाचा है। परमेश्‍वर ने अब्राहम को प्रतिज्ञा दी जिसमें अब्राहम को किसी भी शर्तों को पूरा नहीं करना था। उत्पत्ति 15:18-21 अब्राहम की वाचा के एक अंश का वर्णन करता है, विशेष रूप से भूमि के क्षेत्रों का निपटारा करने के लिए जिसे देने की प्रतिज्ञा परमेश्‍वर ने अब्राहम और उसके वंशजों से की थी।

अब्राहम की वास्तविक वाचा उत्पत्ति 12:1-3 में पाई जाती है। उत्पत्ति 15 में वर्णित अनुष्ठान वाचा के शर्तरहित होने के स्वभाव को इंगित करता है। एकमात्र समय जब वाचा को पूरा करने के लिए दोनों पक्षों को जानवरों के टुकड़ों में से होकर निकलना चाहिए था, तब उस समय वाचा के पूरा होने की निर्भरता दोनों पक्षों के द्वारा किए हुए समर्पण को बनाए रखने में होती। यह अब्राहम नहीं था, जो टुकड़ों के मध्य में होकर निकला था, अपितु परमेश्‍वर था, जिसके द्वारा अकेले ही जानवरों के टुकड़ों में होकर निकलने की विशेषता के ऊपर इसलिए ध्यान दिया जाना चाहिए क्योंकि यह एक धूँआ देने वाली एक अंगीठी और एक जलती हुई मशाल है, जो परमेश्‍वर का प्रतिनिधित्व करती हैं। ऐसा प्रतीत होता है कि ऐसा एक कार्य, दोनों पक्षों के द्वारा साझा किया जाना चाहिए, परन्तु इस घटना में परमेश्‍वर के द्वारा ही किया गया कार्य इस सच्चाई को समझाने के लिए सन्देह से परे है कि वाचा मुख्य रूप से परमेश्‍वर के द्वारा एक प्रतिज्ञा है। वह स्वयं को वाचा के साथ बाँधता है। परमेश्‍वर ने होने दिया कि अब्राहम को नींद आ जाए ताकि वह जानवरों के दो टुकड़ों में से होकर निकलने में सक्षम न हो सके। वाचा की पूर्ति अकेले परमेश्‍वर का उत्तरदायित्व बन गया।

बाद में, परमेश्‍वर ने अब्राहम के साथ अब्राहम की वाचा के विेशेष संकेत के रूप में खतना का अनुष्ठान दिया (उत्पत्ति 17: 9-14)। अब्राहम के वंश में सभी पुरुषों का खतना किया जाना चाहिए था और इस प्रकार उनके शरीर में वे जीवन भर के लिए एक चिन्ह होगा कि वे संसार में परमेश्‍वर की भौतिक आशीष के भागीदार थे। यदि अब्राहम के किसी भी वंशज ने खतना को करने से इनकार किया तो वह स्वयं को परमेश्‍वर की वाचा से बाहर होना घोषित कर रहा था; यह बताता है कि क्यों परमेश्‍वर मूसा के ऊपर क्रोधित था, जब मूसा निर्गमन 4:24-26 में वह अपने पुत्र का खतना कराने में असफल रहा था।

परमेश्‍वर ने स्वयं के लिए एक विशेष लोगों को बुलाहट देने का दृढ़ संकल्प लिया, और उन विशेष लोगों के माध्यम से वह सभी जातियों को आशीष देगा। अब्राहम की वाचा राज्य की धारणा और पुराने नियम के धर्मविज्ञान के मूल को उचित रीति से समझने के लिए सर्वोपरि है। अब्राहम की वाचा उत्पत्ति 12:1-3 में वर्णित है, और (1) यह एक बिना शर्त वाली वाचा है। इसमें कोई शर्त नहीं है (कोई भी "यदि" कथन ऐसा नहीं है, जो इसकी पूर्ति को मनुष्य के निर्भर होने का सुझाव देता है)। (2) यह एक शाब्दिक वाचा भी है, जिसमें की गई प्रतिज्ञाओं को वास्तविक समझा जाना चाहिए। जिस देश की प्रतिज्ञा की गई है, उसे शब्द की सामान्य परिभाषा में समझा जाना चाहिए — यह स्वर्ग की आकृति नहीं है। (3) साथ ही यह एक अनन्तकालीन वाचा भी है। परमेश्‍वर के द्वारा इस्राएल के साथ की गई प्रतिज्ञाएँ अनन्तकालीन हैं।

अब्राहम की वाचा की तीन मुख्य विशेषताएँ हैं:

1. भूमि की प्रतिज्ञा (उत्पत्ति 12:1) — परमेश्‍वर ने अब्राहम को कसदियों के ऊर से उस देश में जाने के लिए बुलाया, जिसे वह उसे देगा (उत्पत्ति 12:1)। उत्पत्ति 13:14-18 में इसी प्रतिज्ञा को फिर से दोहराया गया है; इसके क्षेत्र का माप उत्पत्ति 15:18-21 में दिया गया है (जो स्वर्ग के इस बारे में किसी भी धारणा को पूरा करना कठिन बना देती है)। अब्राहम की वाचा में दिया हुआ भूमि का पहलू व्यवस्थाविवरण 30:1-10 में विस्तारित किया गया है, जो कि फिलिस्तीनी वाचा है।

2. वंशजों की प्रतिज्ञा (उत्पत्ति 12: 2)। परमेश्‍वर ने अब्राहम से प्रतिज्ञा की थी कि वह उससे एक बड़ी जाति राष्ट्र बना देगा। अब्राहम, जो 75 वर्ष का था और बेघर था (उत्पत्ति 12:4), के साथ उसके कई वंशों के होने की प्रतिज्ञा की गई थी। यह वचन उत्पत्ति 17:6 में आगे विस्तारित किया गया है, जहाँ परमेश्‍वर ने प्रतिज्ञा की थी कि जातियाँ और राजा इस बुजुर्ग कुलपति के वंश से आएंगे। यह वचन (जिसे 2 शमूएल 7:12-16 में दाऊद के साथ बाँधी गई वाचा में विस्तारित किया गया है) इब्रानी लोगों के ऊपर प्रतिज्ञा किए हुए मसीह के राज्य में शासन के लिए दाऊद के सिंहासन को स्थापित किए जाने की पूर्ति करता है।

3. आशीष और उद्धार की प्रतिज्ञा (उत्पत्ति 12:3) — परमेश्‍वर ने अब्राहम और पृथ्वी के परिवारों को उसके माध्यम से आशीष देने की प्रतिज्ञा की। यह वचन नए वाचा में विस्तारित किया गया है (यिर्मयाह 31:31-34; की तुलना इब्रानियों 8:6-13 से करें) और इसका लेना देना इस्राएल की आत्मिक आशीष और छुटकारे के साथ है। यिर्मयाह 31:34 पाप की क्षमा की आशा करता है। वाचा के शर्तहीन होने और शाश्‍वतकालीन स्वभाव को देखा गया है, जिसमें यह पाया गया है कि इस वाचा की पुष्टि इसहाक के साथ की गई है (उत्पत्ति 21:12; 26:3-4)। "मैं करूँगा" वाली प्रतिज्ञाएँ फिर से वाचा के शर्तहीन पहलू का सुझाव देती हैं। बाद में वाचा की पुष्टि याकूब के साथ की गई है (उत्पत्ति 28:14-15)। यह उल्लेखनीय है कि कुलपतियों के पापों के मध्य भी परमेश्‍वर ने इन प्रतिज्ञाओं की पुष्टि की, जो एक सच्चाई के रूप में अब्राहम की वाचा के शर्तहीन स्वभाव के ऊपर जोर देती है।

अब्राहम की वाचा को पूरा करने की परमेश्‍वर की विधि शाब्दिक है, क्योंकि परमेश्‍वर ने आंशिक रूप से इतिहास में वाचा को पूरा किया: परमेश्‍वर ने भूमि देकर अब्राहम को आशीष दी (उत्पत्ति 13:14-17), और कई शताब्दियों पश्‍चात्, अब्राहम के पुत्रों ने इस भूमि को अपने नियन्त्रण में ले लिया: "इस प्रकार यहोवा ने इस्राएलियों को वह सारा देश दिया, जिसे उसने उनके पूर्वजों से शपथ खाकर देने को कहा था; और वे उसके अधिकारी होकर उसमें बस गए" (यहोशू 21:43)। परमेश्‍वर ने अब्राहम को आत्मिक रूप से आशीष दी (उत्पत्ति 13:8, 18; 14:22-23; 21:22); परमेश्‍वर ने उसे कई वंश दिए (उत्पत्ति 22:17; 49:3-28)। यद्यपि, अब्राहम की वाचा का एक महत्वपूर्ण तत्व, प्रतिज्ञा किए हुए मसीह के राज्य की भविष्य में होने वाली पूर्णता की मांग करता है:

(1) एक जाति के रूप में इस्राएल भविष्य में पूर्ण रूप से भूमि को अपने नियन्त्रण में कर लेगा। पुराने नियम के असँख्य सन्दर्भ इस्राएल के भविष्य में आने वाली आशीष और भूमि को अपने अधीन कर लेने के लिए अब्राहम के साथ प्रतिज्ञा स्वरूप दिए गए हैं। यहेजकेल भविष्य के आने वाले दिन का वर्णन करता है, जब इस्राएल को उसकी भूमि के ऊपर पुनः स्थापित कर दिया जाता है (यहेजकेल 20:33-37, 40-42; 36:1-37:28)।

(2) एक जाति के रूप में इस्राएल यीशु को मसीह के रूप में स्वीकार करेगा और क्षमा और पुन्रर्स्थापित किया जाएगा (रोमियों 11:25-27)।

(3) इस्राएल पश्‍चाताप करेगा और भविष्य में परमेश्‍वर की क्षमा को प्राप्त करेगा (जकर्याह 12:10-14)। अब्राहम की वाचा अपनी अन्तिम पूर्ति को इस्राएल के लोगों को बचाने और आशीष देने के लिए मसीह के पुन: आगमन के सम्बन्ध में पाती है। यह इस्राएली जाति है, जिसके द्वारा परमेश्‍वर ने उत्पत्ति 12:1-3 में संसार की जातियों को आशीष देने की प्रतिज्ञा की है। वह अन्तिम आशीष पापों की क्षमा और पृथ्वी पर मसीह के वैभवशाली राज्य की स्थापना के साथ निरन्तर के लिए बनी रहेगी।

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